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जैविक स्रोतों के साथ नैनो यूरिया, नैनो डीएपी, नैनो जिंक एवं नैनो बोरॉन का वैज्ञानिक संतुलन ही टिकाऊ धान उत्पादन की कुंजी...

Jul 23
2 min read

पत्रकार अमृतेश्वर सिंह की कलम से :-

रायपुर :- भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) के राष्ट्रीय जैविक स्ट्रैस प्रबंधन संस्थान (ICAR-NIBSM), रायपुर द्वारा खरीफ मौसम में धान फसल हेतु नैनो यूरिया, नैनो डीएपी, नैनो जिंक एवं नैनो बोरॉन के वैज्ञानिक उपयोग, पोषक तत्व उपयोग दक्षता तथा फसल उत्पादकता पर इनके प्रभाव के मूल्यांकन के लिए उन्नत वैज्ञानिक परीक्षण (Advanced Scientific Field Trials) संचालित किए जा रहे हैं। इन परीक्षणों का उद्देश्य नैनो उर्वरकों एवं सूक्ष्म पोषक तत्वों के वैज्ञानिक उपयोग पर प्रमाण-आधारित (Evidence-Based) तकनीकी अनुशंसाएँ विकसित करना तथा टिकाऊ कृषि को बढ़ावा देना है।

ये वैज्ञानिक परीक्षण संस्थान के निदेशक डॉ. पी. के. राय के मार्गदर्शन में संचालित किए जा रहे हैं। परीक्षणों का उद्देश्य धान उत्पादन में पोषक तत्व उपयोग दक्षता बढ़ाना, रासायनिक उर्वरकों की आवश्यकता कम करना, उत्पादन लागत में कमी लाना, मृदा स्वास्थ्य में सुधार करना तथा पर्यावरण-अनुकूल पोषक तत्व प्रबंधन प्रणाली विकसित करना है। इसी के साथ संस्थान के अनुसंधान प्रक्षेत्र (Research Farm) में किसानों, कृषि अधिकारियों, वैज्ञानिकों एवं शोधार्थियों के लिए वैज्ञानिक अनुसंधान कार्य किए जा रहे हैं, जिनमें नैनो उर्वरकों के वैज्ञानिक उपयोग, उचित मात्रा, सही समय, सुरक्षित छिड़काव तकनीक तथा एकीकृत पोषक तत्व प्रबंधन (Integrated Nutrient Management) की जानकारी दी जा रही है।


इस अवसर पर डॉ. अनिल दीक्षित, परियोजना प्रमुख एवं संयुक्त निदेशक, आईसीएआर-राष्ट्रीय जैविक स्ट्रैस प्रबंधन संस्थान, रायपुर ने कहा कि— "भारत सरकार की सतत एवं प्राकृतिक संसाधन आधारित कृषि नीति के अनुरूप आईसीएआर-एनआईबीएसएम धान उत्पादन में नैनो उर्वरकों की प्रभावशीलता का वैज्ञानिक मूल्यांकन कर रहा है। नैनो उर्वरकों का जैविक स्रोतों के साथ संतुलित एवं वैज्ञानिक उपयोग न केवल मृदा स्वास्थ्य एवं पोषक तत्व उपयोग दक्षता में सुधार करेगा, बल्कि उत्पादन लागत घटाने, पर्यावरण संरक्षण तथा किसानों की आय बढ़ाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।"


वैज्ञानिक परीक्षणों के प्रमुख बिंदु -

  1. धान की पौधों की जड़ों का नैनो डीएपी से उपचार तथा सक्रिय कल्ले (Active Tillering) अवस्था में नैनो यूरिया का पर्णीय छिड़काव कर पोषक तत्व उपयोग दक्षता, पौध वृद्धि तथा पारंपरिक रासायनिक उर्वरकों की आवश्यकता में संभावित कमी का वैज्ञानिक मूल्यांकन किया जा रहा है।


  2. धान में सूक्ष्म पोषक तत्वों की कमी को दूर करने हेतु नैनो जिंक एवं नैनो बोरॉन की प्रभावशीलता का परीक्षण किया जा रहा है। नैनो जिंक क्लोरोफिल निर्माण को बढ़ावा देकर खैरा रोग की रोकथाम में सहायक है, जबकि नैनो बोरॉन पुष्पन, बालियों के विकास, दानों के भराव तथा उनकी गुणवत्ता में सुधार लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।


डॉ. अनिल दीक्षित ने बताया कि इन वैज्ञानिक परीक्षणों के अंतर्गत नैनो उर्वरकों का पौधों द्वारा पोषक तत्वों के अवशोषण, जैविक तनावों (कीट एवं रोगों) के प्रति सहनशीलता, पौध वृद्धि, उपज एवं गुणवत्ता पर पड़ने वाले प्रभावों का भी विस्तृत अध्ययन किया जा रहा है। इन परीक्षणों से प्राप्त परिणाम भविष्य में धान की फसल के लिए वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित, पर्यावरण-अनुकूल एवं लागत-कुशल पोषक तत्व प्रबंधन तकनीकों के विकास में महत्वपूर्ण आधार प्रदान करेंगे।


आईसीएआर-एनआईबीएसएम द्वारा संचालित ये वैज्ञानिक परीक्षण देश में संतुलित पोषक तत्व प्रबंधन, मृदा स्वास्थ्य संरक्षण, उर्वरक उपयोग दक्षता में वृद्धि, उत्पादन लागत में कमी तथा टिकाऊ धान उत्पादन प्रणाली के विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल सिद्ध होंगे।

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