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सरकार बताये तारा कोल ब्लॉक नीलामी कब रद्द होगी ? - दीपक बैज...

3 days ago
2 min read

पत्रकार अमृतेश्वर सिंह की क़लम से :-

छत्तीसगढ़ में तारा कोल ब्लॉक की नीलामी और वनों की कटाई को लेकर सियासत गरमा गई है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने राज्य सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए सवाल किया है कि सरकार स्पष्ट करे कि तारा कोल ब्लॉक की नीलामी को आखिरकार कब रद्द किया जाएगा। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार इस ब्लॉक को उद्योगपति को सौंपने की जिद पर अड़ी हुई है, जिसके चलते लाखों पेड़ों की बली दी जा रही है।


पर्यावरण और वन्यजीवों पर मंडराता गंभीर संकट:

कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि लगभग पाँच हजार एकड़ क्षेत्र में फैले तारा कोल ब्लॉक में से चार हजार एकड़ से अधिक हिस्सा घने जंगलों से घिरा हुआ है। इस परियोजना के कारण दस लाख से ज्यादा पेड़ों को पूरी तरह साफ कर दिया जाएगा। लेमरू एलीफेंट रिजर्व के आसपास होने वाले खनन से राष्ट्रीय धरोहर पशु हाथियों के गलियारे और उनकी आवाजाही पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा। इसके साथ ही, इस क्षेत्र की अनमोल जैव विविधता और अन्य वन्यजीवों का प्राकृतिक आवास भी खतरे में पड़ जाएगा।


पूर्व और वर्तमान सरकार के फैसलों में अंतर:

कांग्रेस का आरोप है कि वर्तमान सरकार ने ही कोयला मंत्रालय को पत्र लिखकर तारा कोल ब्लॉक की नीलामी की अनुशंसा की थी। इसके विपरीत, पिछली कांग्रेस सरकार ने इन कोल ब्लॉकों को नीलामी प्रक्रिया से बाहर रखने के लिए केंद्र को पत्र लिखा था। पार्टी का कहना है कि जिस सरकार ने खुद नीलामी के लिए पैरवी की हो, उससे जंगलों और आदिवासियों के हितों की रक्षा की उम्मीद नहीं की जा सकती।


हसदेव और रामगढ़ की ऐतिहासिक धरोहरों पर खतरा:

बयान में यह भी कहा गया है कि सरकार की नीतियों के कारण हसदेव अरण्य और रामगढ़ की पहाड़ियों जैसी ऐतिहासिक एवं धार्मिक धरोहरों को संकट में डाला जा रहा है। सीता गुफा, जानकी रसोई और प्रभु श्री राम के वन गमन पथ की पावन स्मृतियों वाले क्षेत्रों में खनन की अनुमति दी जा रही है। सेंट्रल इंडिया के इस महत्वपूर्ण 'लंग्स ज़ोन' और पाँचवीं अनुसूची के आदिवासी क्षेत्रों में लगातार हो रहे विरोध के बावजूद स्थानीय आदिवासियों की आवाज़ को नजरअंदाज किया जा रहा है।

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