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शिक्षा व्यवस्था को गुणवत्तापूर्ण, पारदर्शी और विद्यार्थी-केंद्रित बनाने पर सरकार का विशेष जोर....

Aug 22
6 min read
  • स्कूल शिक्षा विभाग की उपलब्धियों पर मंत्री गजेंद्र यादव ने की प्रेस कॉन्फ्रेंस, दो वर्षों के कार्यों का रखा लेखा-जोखा......

पत्रकार अमृतेश्वर सिंह की क़लम से:-

रायपुर स्कूल शिक्षा विभाग की विगत दो वर्षों की विभागीय गतिविधियों एवं उपलब्धियों को लेकर आज छत्तीसगढ़ संवाद के ऑडिटोरियम, अटल नगर, नवा रायपुर में प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित की गई। प्रेस कॉन्फ्रेंस को स्कूल शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव एवं स्कूल शिक्षा विभाग के सचिव डॉ. कमलप्रीत सिंह ने संयुक्त रूप से संबोधित किया। इस दौरान विभाग द्वारा शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार, शिक्षकों की उपलब्धता एवं पदोन्नति, भर्ती प्रक्रिया, विद्यार्थियों को दी जा रही सुविधाओं, विद्यालय अधोसंरचना, बहुभाषी शिक्षा तथा तकनीक आधारित मॉनिटरिंग सहित विभिन्न क्षेत्रों में किए गए कार्यों एवं उपलब्धियों की जानकारी दी गई। स्कूल शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव ने बताया कि विगत दो वर्षों में स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा शिक्षा व्यवस्था को अधिक गुणवत्तापूर्ण, पारदर्शी, तकनीक-सक्षम, समावेशी एवं विद्यार्थी-केंद्रित बनाने की दिशा में अनेक महत्वपूर्ण कदम उठाए गए हैं।

विद्यालयों का युक्तियुक्तकरण और शिक्षकों की उपलब्धता

राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 एवं शिक्षा का अधिकार अधिनियम-2009 के प्रावधानों के अनुरूप 10,538 विद्यालयों का समायोजन किया गया। युक्तियुक्तकरण के माध्यम से 15,165 शिक्षकों एवं प्राचार्यों का समायोजन किया गया। 453 शिक्षकविहीन विद्यालयों में शिक्षकों की पूर्ति तथा 4,729 एकल शिक्षकीय विद्यालयों में शिक्षकों की व्यवस्था की गई है। शिक्षकों की पदोन्नति के क्षेत्र में भी महत्वपूर्ण उपलब्धि दर्ज की गई है। टी संवर्ग में 1,335 तथा ई संवर्ग में 1,478, कुल 2,813 पदों पर प्राचार्यों की पदोन्नति की गई। टी संवर्ग में 1,798 व्याख्याताओं की पदोन्नति तथा विगत दो वर्षों में विभिन्न पदों पर 7,000 से अधिक पदोन्नतियां की गई हैं।

शिक्षक भर्ती को मिली गति

स्कूल शिक्षा मंत्री यादव ने बताया कि दिव्यांग बच्चों के लिए स्पेशल एजुकेटर के 848 पद स्वीकृत किए गए। वर्ष 2025 में 62 पदों पर सीधी भर्ती से नियुक्ति की गई। विगत दो वर्षों में 2,104 शैक्षणिक पदों पर सीधी भर्ती की गई है। इसके अतिरिक्त 5,000 शिक्षकीय पदों पर सीधी भर्ती परीक्षा प्रक्रिया में है। स्वामी आत्मानंद एवं विवेकानंद विद्यालयों में 3,000 से अधिक पदों पर संविदा भर्ती प्रक्रिया भी जारी है।

पारदर्शी एवं तकनीक आधारित भर्ती प्रक्रिया

मंत्री यादव ने बताया कि स्वामी आत्मानंद उत्कृष्ट विद्यालय, स्वामी विवेकानंद उत्कृष्ट विद्यालय एवं अन्य शासकीय संस्थाओं में शैक्षणिक एवं गैर-शैक्षणिक संविदा पदों की भर्ती के लिए राज्य स्तरीय ऑनलाइन कंप्यूटर आधारित परीक्षा (सीबीटी) की शुरुआत की गई है। स्वामी आत्मानंद उत्कृष्ट विद्यालय के 1,895 तथा स्वामी विवेकानंद उत्कृष्ट विद्यालय के 1,171, कुल 3,066 पदों पर संविदा भर्ती प्रक्रिया प्रचलित है। सीबीटी के माध्यम से भर्ती में पारदर्शिता और कम समय में परीक्षा परिणाम उपलब्ध कराने पर जोर दिया गया है।

नई शिक्षा नीति एवं पाठ्यपुस्तकों में नवाचार

15 जुलाई 2024 से विद्यालयों में राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 लागू की गई। कक्षा 1 एवं 2 की हिंदी पुस्तकों में बारहखड़ी को शामिल किया गया। कक्षा 1 एवं 2 के लिए 16 स्थानीय तथा 4 अंतरराज्यीय भाषाओं में पाठ्यपुस्तकों का निर्माण किया गया। कक्षा 1, 2, 3 एवं 6 के विषयों की एनसीईआरटी पाठ्यपुस्तकों का अनुकूलन किया गया है। कक्षा 3 से 8 तक के विद्यार्थियों के लिए सहायक वाचन सामग्री भी विकसित की गई है।

बहुभाषी शिक्षा को बढ़ावा

यादव ने कहा कि छत्तीसगढ़ भाषा-चित्रण (Language Mapping) करने वाला देश का पहला राज्य है। बस्तर संभाग में बच्चों की भाषा के कक्षा में उपयोग के लिए 2,700 शिक्षकों को प्रशिक्षित किया गया। सरगुजा संभाग में 2,368 शिक्षकों का प्रशिक्षण किया गया है। कक्षा 1 से 3 तक छत्तीसगढ़ी, गोंडी, हल्बी और सादरी को शिक्षा के माध्यम के अनुरूप पाठ्यपुस्तक निर्माण की प्रक्रिया जारी है।

ऑनलाइन उपस्थिति और प्रशासनिक डिजिटलीकरण

शिक्षामंत्री ने कहा कि शिक्षकों की नियमित उपस्थिति और शैक्षणिक अनुशासन सुनिश्चित करने के लिए आधार आधारित बायोमेट्रिक एवं टीके एप्प के माध्यम से उपस्थिति व्यवस्था लागू की गई है। प्रतिदिन टीके एप्प के माध्यम से लगभग 85 प्रतिशत शिक्षकों की ऑनलाइन उपस्थिति दर्ज हो रही है। अवकाश प्रबंधन पोर्टल, पेपरलेस कार्यप्रणाली एवं ऑनलाइन संपत्ति विवरण जैसी व्यवस्थाओं से प्रशासनिक कार्यों को अधिक सरल एवं पारदर्शी बनाया गया है।


विद्यार्थियों को निःशुल्क पाठ्यपुस्तक, साइकिल एवं गणवेश

यादव ने बताया कि कक्षा 1 से 10 तक के विद्यार्थियों को सत्र प्रारंभ होने से पूर्व पाठ्यपुस्तक उपलब्ध कराने की पहल से 45 लाख 33 हजार 261 विद्यार्थी लाभान्वित हुए। पाठ्यपुस्तकों के वितरण एवं सत्यापन के लिए स्कैनिंग व्यवस्था लागू की गई तथा हिंदी-अंग्रेजी के अतिरिक्त 16 बोलियों में पाठ्यपुस्तक प्रकाशन की पहल की गई। उन्होंने कहा कि निःशुल्क सरस्वती साइकिल योजना के अंतर्गत 1 लाख 62 हजार 827 बालिकाएं लाभान्वित हुईं। कक्षा 1 से 8 तक के विद्यार्थियों को निःशुल्क गणवेश उपलब्ध कराया गया, जिससे 28 लाख 63 हजार 786 बच्चे लाभान्वित हुए।


परीक्षा परिणाम में सुधार

शिक्षामंत्री यादव ने बताया कि शैक्षणिक सत्र 2025-26 में कक्षा 10वीं एवं 12वीं के परीक्षा परिणामों में लगभग 2 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। परीक्षा पूर्व समीक्षा, ब्लूप्रिंट निर्माण एवं अध्यापन, पालक-शिक्षक बैठकों तथा केंद्रीकृत परीक्षाओं के माध्यम से परीक्षा परिणाम सुधारने पर विशेष जोर दिया गया है।


शनिवार बैग-रहित दिवस से विद्यार्थियों का समग्र विकास

यादव ने कहा कि प्रत्येक शनिवार विद्यार्थियों के लिए तनाव एवं भयमुक्त वातावरण में पठन-पाठन के साथ खेल, योग एवं व्यायाम, स्थानीय कला-संस्कृति, महापुरुषों की जयंती, तीज-त्योहार एवं ऐतिहासिक तिथियों से परिचित कराने वाली गतिविधियां आयोजित की जा रही हैं। भाषण, निबंध, गीत, कहानी एवं लोककथाओं के माध्यम से विद्यार्थियों के सतत विकास पर बल दिया जा रहा है।


विद्यालय अधोसंरचना के विस्तार पर विशेष जोर

शिक्षामंत्री ने बताया कि विगत तीन वर्षों में 504 नवीन विद्यालयों की स्वीकृति दी गई। वित्तीय वर्ष 2026-27 के बजट में 700 भवनविहीन विद्यालयों के लिए नवीन विद्यालयों का प्रावधान किया गया है। वर्ष 2023 से 2026 के मध्य 2,583 नवीन अतिरिक्त कक्षों की स्वीकृति दी गई। विद्यालयों के शौचालय निर्माण एवं मरम्मत के लिए 52 करोड़ 39 लाख रूपए की राशि स्वीकृत की गई तथा 302 शौचालयों का निर्माण पूर्ण किया गया है।


150 स्वामी विवेकानंद उत्कृष्ट विद्यालयों के लिए 100 करोड़ रूपए का प्रावधान

यादव ने बताया कि वित्तीय वर्ष 2026-27 के बजट में 150 स्वामी विवेकानंद उत्कृष्ट विद्यालयों के भवन निर्माण एवं संचालन के लिए 100 करोड़ रूपए का प्रावधान किया गया है। प्रत्येक विकासखंड में कम से कम एक स्वामी विवेकानंद उत्कृष्ट विद्यालय स्थापित करने की दिशा में कार्य किया जा रहा है। इन विद्यालयों के माध्यम से विद्यार्थियों को भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार करने पर जोर दिया जा रहा है।


बस्तर एवं आदिवासी अंचलों में शिक्षा का विस्तार

शिक्षामंत्री यादव ने बताया कि नियत नेल्ला नार के अंतर्गत बस्तर संभाग के छह जिलों के 97 प्रतिशत ग्रामों में प्राथमिक शालाओं की स्थापना की गई है। द्विभाषीय पुस्तकों के माध्यम से बस्तर संभाग में 13,817 शिक्षकों को प्रशिक्षित किया गया। शिक्षकविहीन एवं एकल शिक्षकीय विद्यालयों में 573 शिक्षा दूतों के माध्यम से शिक्षा उपलब्ध कराई जा रही है। 48 बंद विद्यालय पुनः खोले गए तथा 36 नवीन विद्यालय प्रारंभ किए गए हैं।


एआई आधारित विद्या समीक्षा केंद्र से ऑनलाइन मॉनिटरिंग

यादव ने बताया कि शिक्षा व्यवस्था की प्रभावी ऑनलाइन मॉनिटरिंग के लिए एआई आधारित विद्या समीक्षा केंद्र की स्थापना की गई है। इसके माध्यम से अधोसंरचना, भौतिक सुविधाओं, पीएम पोषण, सहित विभिन्न योजनाओं की निगरानी की जा रही है। कॉल सेंटर के माध्यम से शिक्षकों, पालकों, संकुल समन्वयकों एवं अधिकारियों से एक लाख से अधिक कॉल के जरिए फीडबैक लिया गया है। पाठ्यपुस्तक वितरण की बारकोड आधारित ट्रैकिंग से शासन को लगभग 40 करोड़ रूपए की बचत हुई है।


विशेष पिछड़ी जनजातियों के विद्यार्थियों के लिए आवासीय सुविधा

शिक्षामंत्री ने बताया कि प्रधानमंत्री जनमन योजना के अंतर्गत विशेष पिछड़ी जनजाति के बच्चों के लिए विद्यालयों के समीप आवासीय छात्रावास की सुविधा विकसित की जा रही है। प्रदेश में संचालित 156 आवासीय विद्यालय एवं छात्रावासों में 33,000 से अधिक बच्चे आवासीय सुविधा का लाभ ले रहे हैं। 13 जिलों में 40 पीवीटीजी छात्रावास स्वीकृत किए गए हैं, जिनमें से 21 का निर्माण कार्य प्रारंभ हो चुका है।


जनजातीय क्षेत्रों के समग्र विकास पर विशेष ध्यान

यादव ने बताया कि प्रधानमंत्री धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान के अंतर्गत जनजातीय क्षेत्रों के समग्र एवं संतुलित विकास पर जोर दिया जा रहा है। स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा इन क्षेत्रों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, विद्यालयीन अधोसंरचना एवं छात्रावास सुविधाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करने की दिशा में कार्य किया जा रहा है। 13 जिलों में 42 छात्रावासों की स्वीकृति दी गई है।


शिक्षा व्यवस्था को और सशक्त बनाने की दिशा में निरंतर प्रयास

प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान विभाग की विभिन्न योजनाओं एवं उपलब्धियों को रेखांकित करते हुए बताया गया कि स्कूल शिक्षा विभाग का निरंतर प्रयास है कि प्रदेश के प्रत्येक विद्यार्थी को गुणवत्तापूर्ण एवं समान अवसर वाली शिक्षा उपलब्ध हो। इसके लिए शिक्षकों की पर्याप्त उपलब्धता, पारदर्शी भर्ती एवं पदोन्नति, आधुनिक अधोसंरचना, बहुभाषी शिक्षा, डिजिटल तकनीक, विद्यार्थियों को आवश्यक शैक्षणिक सामग्री तथा जनजातीय एवं दूरस्थ क्षेत्रों में शिक्षा की पहुंच को प्राथमिकता दी जा रही है। स्कूल शिक्षा विभाग की इन पहलों का व्यापक उद्देश्य प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था को गुणवत्तापूर्ण, पारदर्शी, तकनीक-सक्षम, समावेशी एवं विद्यार्थी-केंद्रित बनाना है।

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