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नक्सलवाद के खात्मे से वैचारिक समर्थकों में बेचैनी, कांग्रेस अपना रुख स्पष्ट करे: केदार कश्यप...

Aug 20
2 min read
  • युवाओं की आड़ में नक्सली विचारधारा का बचाव बंद करे कांग्रेस: केदार कश्यप...

  • नक्सलवाद पर कांग्रेस की दोहरी राजनीति अब नहीं चलेगी: केदार कश्यप...

  • बस्तर का युवा नक्सलवाद नहीं, शांति और विकास चाहता है: केदार कश्यप...

पत्रकार अमृतेश्वर सिंह की क़लम से -

रायपुर। ‘दिमागी नक्सलवाद’ को लेकर कांग्रेस नेताओं की बयानबाजी पर वन मंत्री केदार कश्यप ने तीखा पलटवार किया है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश के युवाओं या उनके लोकतांत्रिक आंदोलनों को नक्सलवाद से नहीं जोड़ा, बल्कि नक्सली हिंसा को वैचारिक समर्थन देने वाली मानसिकता पर चिंता व्यक्त की है। कांग्रेस प्रधानमंत्री के वक्तव्य को तोड़-मरोड़कर युवाओं के नाम पर भ्रम फैलाने का प्रयास कर रही है।


कश्यप ने कहा, “नक्सलवाद खत्म हो रहा है तो उसके समर्थकों की बेचैनी भी सामने आ रही है। बरसात का अवसर है तो मेंढक के टर्राने से कौन रोक सकता है। राष्ट्रीय स्तर से लेकर राज्य स्तर तक नक्सल समर्थक किस तरह चिल्ला रहे हैं, यह पूरा देश देख रहा है।”


उन्होंने कहा कि कांग्रेस के कुछ नेता नक्सलियों को अपना रोल मॉडल तक मानते रहे हैं और आज वही लोग नक्सलवाद के खिलाफ लड़ाई में अपने योगदान की बड़ी-बड़ी बातें कर रहे हैं। कांग्रेस की नीतियों, नरमी और मिलीभगत के कारण ही नक्सलवाद को वर्षों तक विस्तार का अवसर मिला। कश्यप ने पूर्व केंद्रीय गृह मंत्री पी. चिदंबरम पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि आज वे खुद को ‘दिमागी नक्सली’ बता रहे हैं, लेकिन देश उनसे जानना चाहता है कि जब देश की आंतरिक सुरक्षा की जिम्मेदारी उनके हाथों में थी, तब नक्सलवाद के खिलाफ निर्णायक लड़ाई क्यों नहीं लड़ी गई? उनके कार्यकाल के दौरान छत्तीसगढ़ लगातार नक्सली हिंसा से जूझता रहा। उन्होंने कहा कि सवाल सीधा है - जब देश की आंतरिक सुरक्षा की कमान आपके हाथों में थी, तब नक्सलवाद पर निर्णायक प्रहार क्यों नहीं हुआ ? नक्सली हिंसा और उसकी विचारधारा के प्रति सहानुभूति या नरमी रखने वाली सोच नक्सलवाद को वैचारिक ताकत देती है।

कश्यप ने कहा कि छत्तीसगढ़ कांग्रेस भी अपनी चुप्पी तोड़े और स्पष्ट करे कि वह पी. चिदंबरम के बयान के साथ खड़ी है या नहीं। नक्सलवाद जैसे गंभीर विषय पर कांग्रेस का दोहरा चरित्र और सुविधानुसार राजनीति स्वीकार नहीं की जा सकती।

उन्होंने कहा कि बस्तर का युवा नक्सलवाद के साथ नहीं हैं बस्तर का युवा अब शांति, शिक्षा, रोजगार और विकास चाहता है। कांग्रेस युवाओं की आड़ में नक्सली विचारधारा के समर्थकों का बचाव करना बंद करे।

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