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जिले में मलेरिया से हुई मौतों पर विभाग गंभीरता से संज्ञान लें, निचले स्तर पर नियमित स्वास्थ्य परीक्षण कराएं.....

Aug 1
2 min read
  • कांकेर कलेक्टर ने स्वास्थ्य विभाग की बैठक लेकर हाई अलर्ट मोड पर कार्य करने के दिए निर्देश, कहा- भविष्य में पुनरावृत्ति होने पर संबंधितों के विरूद्ध की जाएगी सख्ती से कार्यवाही

पत्रकार अमृतेश्वर सिंह की कलम से:-

रायपुर, कांकेर जिले के कलेक्टर निलेशकुमार महादेव क्षीरसागर ने स्वास्थ्य विभाग की बैठक लेकर जिले में मलेरिया से हुई मृत्यु के मामलों की समीक्षा की तथा स्वास्थ्य एवं अन्य संबंधित विभागों के अधिकारियों को आवश्यक निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि ऐसे प्रकरणों को विभाग बेहद गंभीरता से लें तथा जमीनी स्तर पर स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं व अन्य विभागीय अमलों को नियमित रूप से स्वास्थ्य परीक्षण करने के लिए निर्देशित किया। साथ ही जिन ग्रामों में मलेरिया के अधिक प्रकरण सामने आ रहे हैं, वहां हाई अलर्ट मोड में काम करने तथा स्थिति पर सतत् निगरानी रखने व उच्च कार्यालय को तत्काल सूचित करने के निर्देश दिए।


जिला कार्यालय के सभा कक्ष में आयोजित बैठक में कलेक्टर ने कहा कि जिले में स्थित सभी आश्रम-छात्रावासों में अध्ययनरत विद्यार्थियों का नियमित रूप से स्वास्थ्य परीक्षण कराएं तथा मलेरिया के अलावा डायरिया, टायफाइड, पीलिया जैसी अन्य वेक्टरजनित बीमारियों के लक्षण पाए जाने पर स्वास्थ्य कैम्प लगाकर प्रत्येक विद्यार्थी और शिक्षक का सैम्पल लें। इसके अलावा आशा वर्कर (मितानिन) की पेटियों में सभी आवश्यक दवाएं उपलब्ध रहे। इसके अतिरिक्त जमीनी कार्यकर्ता सतत् उच्चाधिकारी को सूचित करें व उच्च कार्यालय की बिना पुष्टि के भ्रामक अभिमत न दें।


बैठक में कलेक्टर ने यह भी कहा कि राज्य शासन मलेरिया से हुई मौतों को लेकर बेहद संजीदा है, जिसकी गंभीरता इस बात से पता चलती है कि स्वास्थ्य मंत्री एवं स्वास्थ्य सचिव द्वारा बैठक लेकर आवश्यक निर्देश दिए गए हैं। अगर भविष्य में मलेरिया से मौत के मामले आए तो शासन संबंधितों पर सख्ती से कार्यवाही करने से परहेज नहीं करेगा।


उन्होंने पुनः स्वास्थ्य एवं अन्य विभागों के अधिकारियों को गंभीरता से कार्य करते हुए मलेरिया की रोकथाम के लिए अगले दो माह तक सर्वोच्च प्राथमिकता के आधार पर दायित्वों का निर्वहन करने और उच्च कार्यालय के आदेशों का अक्षरशः पालन करने के निर्देश दिए।


राष्ट्रीय वेक्टरजनित रोग एवं मौसमी बीमारियों की समीक्षा बैठक में मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. आर.सी. ठाकुर ने जानकारी देते हुए बताया कि मलेरिया के अधिकतर मामले जुलाई-अगस्त में परिलक्षित होते हैं तथा इसके लिए विभागीय अमले द्वारा आश्रम-छात्रावासों में रैपिड फीवर सर्वे (आरएफएस) कराया जा रहा है। उन्होंने बताया कि सर्वे के दौरान जिले के अंतागढ़, भानुप्रतापपुर तथा कांकेर विकासखण्ड में अपेक्षाकृत अधिक मामले मिल रहे हैं। उन्हांेने बताया कि कुल 19 हजार 844 सैम्पल में से 672 सकारात्मक प्रकरण सामने आए हैं, जिनका त्वरित उपचार किया गया। इसके लिए जिला एवं विकासखण्ड स्तर पर कंट्रोल रूम की स्थापना की गई है।


साथ ही पायलट प्रोजेक्ट के तहत 35 हजार दवालेपित मच्छरदानी वितरित की गई है तथा घरों के आसपास गड्ढों में जलभराव व पेयजल स्रोतों के समीप दवा छिड़काव कराया जा रहा है। जिला मलेरिया अधिकारी ने बताया कि मलेरिया के अलावा डेंगू, जेई तथा फाइलेरिया की भी सतत् जांच की जा रही है तथा संवेदनशील ग्रामों में स्वास्थ्य अमले की तैनाती कर स्थिति पर निगाह रखी जा रही है। उन्होंने ग्रामीणों से अपील करते हुए कहा कि किसी प्रकार की बीमारी का पता चलने पर अपने नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र में अवश्य स्वास्थ्य जांच कराएं।

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