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देवी-देवताओं के कार्यों का लिया गया लेखा-जोखा: 35 को सुनाई गई सजा.....

17 hours ago
2 min read

ब्रेकिंग ADN न्यूज़:-

कोंडागांव:- जिले के केशकाल में भादोम जात्रा के दौरान एक अनोखी परंपरा निभाई गई। यहां भंगाराम माई के दरबार में इंसानों की नहीं, बल्कि देवी-देवताओं की अदालत लगती है। मान्यता के अनुसार क्षेत्र के 9 परगना से पहुंचे देवी-देवताओं के सालभर के कार्यों का लेखा-जोखा लिया जाता है। इस दौरान जिन देवी-देवताओं का कार्य संतोषजनक नहीं पाया गया, उन्हें उनके कथित दोष के अनुसार सजा सुनाई जाती है।

















इस वर्ष कुल 35 देवी-देवताओं को सजा सुनाए जाने की बात सामने आई है। केशकाल के तेलीन सती माई मंदिर के समीप और टाटामारी पर्यटन मार्ग पर स्थित भंगाराम देवी के दरबार में आयोजित भादोम जात्रा में बड़ी संख्या में देवी-देवताओं के साथ उनके पुजारी, सिरहा, गुनिया, मांझी और गायता-मुखिया शामिल हुए। स्थानीय मान्यता के अनुसार भंगाराम माई के दरबार में क्षेत्र के देवी-देवताओं की हाजिरी जरूरी होती है। मान्यता है कि देवी-देवताओं के कार्यों की समीक्षा के दौरान यदि किसी देवी-देवता से जुड़ी शिकायत सामने आती है या उनके दायित्वों का ठीक से निर्वहन नहीं माना जाता, तो भंगाराम माई के दरबार में उन्हें दोषी मानकर सजा सुनाई जाती है। यह परंपरा आदिम संस्कृति और स्थानीय आस्था से जुड़ी हुई है। भंगाराम देवी की जात्रा हर साल भादो माह के कृष्ण पक्ष के शनिवार को आयोजित की जाती है।


इसके पहले लगातार छह शनिवार तक विशेष पूजा-अर्चना की जाती है, जबकि सातवें शनिवार को मुख्य भादोम जात्रा होती है। जात्रा के दौरान फूल, पान-सुपारी समेत पारंपरिक मान्यताओं के अनुसार पूजा-अर्चना की जाती है। इस परंपरा से जुड़ी एक खास मान्यता यह भी है कि भंगाराम माई की अनुमति के बिना किसी नए देवी-देवता की पूजा शुरू नहीं की जाती। जात्रा के दिन महिलाओं के दरबार में प्रवेश पर भी परंपरागत रूप से प्रतिबंध रहता है। भंगाराम माई के दरबार में निभाई जाने वाली इस अनूठी परंपरा को देखने के लिए केशकाल के साथ ही दूर-दराज के इलाकों से भी बड़ी संख्या में लोग पहुंचे। देवी-देवताओं की अदालत और उन्हें सजा सुनाने की यह परंपरा स्थानीय आदिम संस्कृति और आस्था का एक अनोखा स्वरूप मानी जाती है।


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