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धमनियों में छिपा खतराः वैस्कुलर डिजीज़ लिए क्यों जरूरी है सतर्कता.....

Aug 22
2 min read
  • डॉ. हरि कुमार पी. के., एडल्ट् कार्डियक सर्जरी, पीडियाट्रिक एंड कॉन्जेनाइटल हार्ट सर्जरी, एमएमआई नारायणा हॉस्पिटल, रायपुर.....

पत्रकार अमृतेश्वर सिंह की क़लम से -

क्या आपके जोड़ों में दर्द रहता है ? या त्वचा दिन-ब-दिन खराब होते जा रही है ? हो सकता है, यह समस्याएं न चर्म रोग से जुड़ी हो न अर्थराइटिस से। यह रक्त संचार मे लाने वाले रुकावट 'वैस्कुलर डिजिज़' से जूरी हो सकती है जिसके लक्षणों को हम आम समझकर अनदेखा कर देते हैं। यह बीमारी जितनी आसानी से नज़रअंदाज़ हो जाती है, उतनी ही महंगी साबित होती है। जिन लक्षणों को लोग मामूली समझकर टाल देते हैं, जैसे पैरों में ऐंठन, ठंडे पैर या न भरने वाला घाव, वही अक्सर किसी बड़ी जटिलता से पहले मिलने वाली इकलौती चेतावनी होते हैं।


लक्षण छोटे, नुकसान बड़े...

वैस्कुलर डिजीज़ शरीर को अंदर से चुपचाप खोखला कर देने वाली एक गंभीर बीमारी है। क्योंकि, टांगों मै दर्द जैसे लक्षणों को हम बुढ़ापे की समस्या समझ कर टाल देते हैं। जब हमे हमारे पैर ठंडे महसूस होते है, हम इन लक्षणों को अनदेखा कर, मौसम पर डाल देते हैं। न भरने वाला घाव किस्मत पर डाल दिया जाता है। ये लक्षण उस समय हमारे दिमाग में नहीं आते हैं और हर बहाना बीमारी को बिना पकड़े आगे बढ़ने का और समय दे देता है, जब तक कि धमनियां खुद संभलने लायक नहीं रह जातीं।


किन्हें सबसे ज़्यादा खतरा...

यह खतरा डायबिटीज़ के मरीज़ों और धूम्रपान का सेवन करने वालों में सबसे ज़्यादा होता है, क्योंकि इन दोनों समूहों में परिधीय धमनी रोग (हाथ-पैरों की नसों का ब्लॉक होना) का खतरा सामान्य आबादी से कहीं अधिक होता है। इनमें से कई मरीज़ों की असली डायग्नोसिस किसी स्क्रीनिंग या स्कैन से नहीं होती। यह तब सामने आती है जब पैर का घाव भरना बंद हो जाता है या किसी अंग में रक्त संचार लगभग रुक जाता है, तब यह आम लक्षण नहीं रह जाते बल्कि आपातकालीन स्थिति में तब्दील हो जाते हैं।


समय पर स्क्रीनिंग क्यों ज़रूरी है...

निराशाजनक सच्चाई यह है कि ऐसा होना ज़रूरी नहीं है। वैस्कुलर स्क्रीनिंग एक छोटी प्रक्रिया है जो बीमारी को संकट बनने से बहुत पहले पकड़ सकती है। समय पर पता चलने पर इलाज सिर्फ दवा या जीवनशैली में बदलाव तक सीमित हो सकता है। देर से पता चलने पर इलाज किसी अंग को खोने या ऐसे स्ट्रोक से गुज़रने तक पहुंच सकता है, जिसे स्क्रीनिंग से रोका जा सकता था।


डर नहीं, सतर्कता ज़रूरी...

वैस्कुलर डिजीज़ आगे बढ़ने से पहले इजाज़त नहीं मांगती। यह बस इंतज़ार करती है। वैस्कुलर डिजीज़ का कारगर जवाब डर नहीं, बल्कि एक पांच मिनट का टेस्ट् है, जो किसी अंग को, किसी जीवन को बचा सकता है।

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