शिक्षक समाज राष्ट्र निर्माण का मुख्य आधार, विभाजनकारी ताकतों से सतर्क रहने की जरूरत - मुख्यमंत्री

ब्रेकिंग ADN न्यूज़ :-
लखनऊ: मुख्यमंत्री ने हाल ही में एक प्रांतीय शिक्षक गरिमा कार्यशाला को संबोधित करते हुए स्पष्ट शब्दों में कहा कि देश को जातियों या क्षेत्रों के छोटे-छोटे हिस्सों में बांटने की सोच भारत की प्रगति के लिए गंभीर खतरा है। समाज को विभाजित करने की यह प्रवृत्ति आज भी अलग-अलग रूपों में सक्रिय है, जिसे विफल करने की बड़ी जिम्मेदारी शिक्षकों के कंधों पर है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि देश को जातियों के आधार पर आपस में लड़ाने के बजाय एक मजबूत और एकजुट राष्ट्र के रूप में आगे बढ़ाना ही सबका मुख्य लक्ष्य होना चाहिए।
विचार और संगठन की लंबी यात्रा -
कार्यक्रम के दौरान उन्होंने गायत्री परिवार के शताब्दी वर्ष का जिक्र करते हुए कहा कि महान संस्थाएं व्यक्तियों के नाम पर नहीं, बल्कि मजबूत विचारों के दम पर लंबी यात्रा तय करती हैं। उन्होंने बताया कि किस प्रकार एक सदी पहले स्थापित हुए विभिन्न संगठनों ने अपने-अपने रास्तों से समाज में जनचेतना जगाने का कार्य किया है। शिक्षकों की भूमिका को रेखांकित करते हुए उन्होंने कहा कि यदि शिक्षक अपनी जिम्मेदारी पूरी निष्ठा के साथ निभाएं, तो देश को पुन: वैश्विक गुरु बनने से कोई नहीं रोक सकता।
परिवार और पर्यावरण संरक्षण पर जोर -
आधुनिक जीवनशैली में बिखरते संयुक्त परिवारों की संस्कृति पर चिंता जताते हुए उन्होंने कहा कि मजबूत परिवार ही सशक्त समाज की नींव होते हैं। इसके साथ ही पर्यावरण और प्रकृति संतुलन का संदेश देते हुए उन्होंने कहा कि नदियां हमारी जीवनरेखा हैं, जिन्हें साफ और अविरल बनाए रखना हम सबका सामूहिक कर्तव्य है।
उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले विद्यालय सम्मानित -
इस गरिमामयी आयोजन के दौरान भारतीय संस्कृति ज्ञान परीक्षा में शानदार प्रदर्शन करने वाले शीर्ष विद्यालयों को सम्मानित किया गया। इस सूची में सीतापुर, लखनऊ, रायबरेली, गाजियाबाद, अमेठी, बुलंदशहर, चित्रकूट और मुजफ्फरनगर के प्रमुख शिक्षण संस्थान शामिल रहे। इस अवसर पर स्थानीय जनप्रतिनिधियों और विद्वानों ने भी शिक्षा के क्षेत्र में हुए सकारात्मक बदलावों और भारतीय संस्कृति के मूल्यों को नई पीढ़ी तक पहुंचाने के महत्व पर अपने विचार रखे।






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