गांधी जयंती पर छत्तीसगढ़ में स्वदेशी और खादी को मिला नया आयाम, 31 मार्च तक वस्त्रों पर 25% छूट का ऐलान....

पत्रकार अमृतेश्वर सिंह की क़लम से:-
रायपुर: राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की जन्म-जयंती के अवसर पर राजधानी रायपुर के पंडित दीनदयाल उपाध्याय ऑडिटोरियम में भव्य प्रदेश स्तरीय खादी सम्मेलन और ग्रामोद्योग विकास प्रदर्शनी का आयोजन किया गया। इस विशेष कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य स्थानीय उत्पादों को बढ़ावा देना और आमजन को स्वदेशी अपनाने के लिए प्रेरित करना रहा।

समारोह की अध्यक्षता कर रहे ग्रामोद्योग और स्कूल शिक्षा विभाग के मंत्री गजेन्द्र यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 'वोकल फॉर लोकल' विजन के अनुरूप देश की अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिए स्वदेशी वस्तुओं को प्राथमिकता देना बेहद जरूरी है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के मार्गदर्शन में राज्य सरकार द्वारा 02 अक्टूबर 2026 से 31 मार्च 2027 तक खादी वस्त्रों पर 25 प्रतिशत की विशेष छूट दी जा रही है।
इन खास पहियों से संवर रहा ग्रामीण उद्योग -
'सेल्फी विद खादी' अभियान: युवाओं और आम नागरिकों को खादी से जोड़ने के लिए इस नई मुहिम की शुरुआत की गई।
वर्चुअल लोकापर्ण: रायपुर के कूंवरगढ़ स्थित खादी उत्पादन केंद्र और अंबिकापुर के नवनिर्मित प्रीमियम सेल्स आउटलेट का वर्चुअल शुभारंभ किया गया।
बस्तर में नए केंद्र: हाथकरघा प्रभाग द्वारा बस्तर के नक्सल-मुक्त क्षेत्रों में विशेष बुनाई प्रशिक्षण केंद्र खोले गए हैं।
'अमारी सिल्क' ब्रांड: रेशम विभाग की ओर से इस नए ब्रांड का अनावरण किया गया, जिससे बस्तर संभाग में स्वरोजगार के नए द्वार खुलेंगे।

स्वावलंबन और आर्थिक सशक्तिकरण का प्रतीक है खादी: महिला एवं बाल विकास मंत्री
महिला एवं बाल विकास मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े ने अपने संबोधन में कहा कि महात्मा गांधी के विचार आज भी समाज के लिए मार्गदर्शक हैं। उन्होंने चरखे और खादी को केवल वस्त्र का साधन नहीं, बल्कि स्वावलंबन और आर्थिक सशक्तिकरण की रीढ़ बताया। उन्होंने अपील की कि छोटे-छोटे प्रयासों से ही बड़े बदलाव लाए जा सकते हैं, इसलिए हर नागरिक को अपने दैनिक जीवन में स्वदेशी को अपनाना चाहिए।

हुनरमंद युवा बनेंगे रोजगार देने वाले: मंत्री गुरु खुशवंत साहेब -
कार्यक्रम में उपस्थित मंत्री गुरु खुशवंत साहेब ने कहा कि कुटीर उद्योगों और स्थानीय हुनर को प्रोत्साहित कर ही देश को आत्मनिर्भर बनाया जा सकता है। केंद्र सरकार की कौशल विकास योजनाओं का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि आज का युवा केवल नौकरी की तलाश करने वाला नहीं, बल्कि अपनी उद्यमिता से दूसरों को रोजगार देने वाला बन रहा है।

पारंपरिक और आधुनिक पहलों का अनूठा संगम -
छत्तीसगढ़ खादी एवं ग्रामोद्योग बोर्ड के अध्यक्ष राकेश पांडेय ने खादी के गौरवशाली इतिहास पर प्रकाश डालते हुए इसे देश के स्वाभिमान का प्रतीक बताया। वहीं, विभाग के सचिव राजेश राणा ने बताया कि प्रदर्शनी के दौरान बस्तर के युवाओं के लिए विशेष कौशल प्रशिक्षण, हथकरघा उत्पादों के ऑनलाइन प्लेटफॉर्म की शुरुआत, और महिला स्व-सहायता समूहों को वेस्ट कपड़ों से स्वदेशी खिलौने बनाने का प्रशिक्षण देने जैसे अनूठे कार्य किए गए हैं।
रंगारंग कार्यक्रम और हस्तशिल्प का प्रदर्शन -
समारोह के दौरान उत्कृष्ट कार्य करने वाले बुनकरों, संस्थानों और प्रशिक्षकों को सम्मानित किया गया और प्रोत्साहन राशि के चेक बांटे गए। बस्तर क्षेत्र के महिला समूहों द्वारा शांति और विकास पर आधारित सांस्कृतिक प्रस्तुतियां दी गईं। साथ ही, हथकरघा की बची हुई सामग्रियों से तैयार सुंदर खिलौनों का प्रदर्शन भी मुख्य आकर्षण का केंद्र रहा। मंत्रियों ने खुद चरखा चलाकर सूत कातने की प्रक्रिया का अनुभव लिया।
इस अवसर पर सांसद बृजमोहन अग्रवाल, विधायक मोतीलाल साहू, महापौर मीनल चौबे सहित विभिन्न निगमों-बोर्डों के अध्यक्ष, जनप्रतिनिधि और बड़ी संख्या में बुनकर समुदाय के लोग उपस्थित रहे।






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