शेयर बाजार : कच्चे तेल की आग और विदेशी निवेशकों की बिकवाली से सेंसेक्स-निफ्टी औंधे मुंह गिरे.....

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नई दिल्ली: ग्लोबल मार्केट से मिल रहे निगेटिव संकेतों और कच्चे तेल की आसमान छूती कीमतों ने मंगलवार को भारतीय शेयर बाजार को बुरी तरह झकझोर दिया। दलाल स्ट्रीट पर आज भारी बिकवाली हावी रही, जिससे सेंसेक्स और निफ्टी अपने छह महीने के निचले स्तर के करीब लुढ़क गए। खासकर बैंकिंग सेक्टर्स में आए भारी दबाव ने बाजार की कमर तोड़ कर रख दी।
शुरुआती कारोबार से ही बाजार में निराशा का माहौल दिखा। बीएसई का प्रमुख इंडेक्स सेंसेक्स लगभग 0.8 फीसदी गोता लगाकर 72,180 के स्तर तक खिसक गया। वहीं, नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) के निफ्टी 50 में भी 0.77 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई और यह 22,606 के करीब आ गया। इसके अलावा बैंक निफ्टी का भी बुरा हाल रहा और यह 53,862 के स्तर पर संघर्ष करता नजर आया।
बाजार में गिरावट के मुख्य कारण:
इस भारी तबाही के पीछे मुख्य रूप से तीन बड़े कारण सामने आ रहे हैं:
महंगा कच्चा तेल: अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड ऑयल का भाव 107 डॉलर प्रति बैरल के खतरनाक स्तर को छू गया है। भारत तेल का एक बड़ा आयातक देश है, ऐसे में तेल की कीमतों में इस उछाल से आयात बिल और महंगाई दर बढ़ने का डर पैदा हो गया है, जिसका सीधा असर कंपनियों की लागत पर पड़ेगा।
FII की आक्रामक बिकवाली: विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) की ओर से लगातार भारी फंड की निकासी हो रही है। पिछले कारोबारी सत्र में ही विदेशी निवेशकों ने बाजार से 5,300 करोड़ रुपये से ज्यादा निकाल लिए थे। हालांकि, घरेलू निवेशकों (DII) ने लिवाली करके बाजार को संभालने की कोशिश जरूर की, लेकिन बिकवाली का दबाव इतना था कि बाजार संभल नहीं पाया।
वैश्विक तनाव और बॉन्ड यील्ड: मिडिल ईस्ट (पश्चिम एशिया) में बढ़ता भू-राजनीतिक तनाव और अमेरिका में ऊंची बॉन्ड यील्ड भी निवेशकों की चिंता का एक बड़ा कारण बने हुए हैं, जिसका नकारात्मक प्रभाव पूरे एशियाई बाजारों पर देखने को मिल रहा है।
इन शेयरों में रहा सबसे ज्यादा दबाव:
सेक्टोरल इंडेक्स की बात करें तो, वित्तीय और बैंकिंग शेयरों ने बाजार को सबसे ज्यादा नुकसान पहुंचाया। HDFC और ICICI बैंक जैसे दिग्गज बैंकों के शेयर लाल निशान में कारोबार करते दिखे। इसके साथ ही, आईटी, ऑटो और मेटल सेक्टर में भी निवेशकों ने जमकर अपना पैसा निकाला।
बाजार के जानकारों का मानना है कि आने वाले दिनों में शेयर बाजार की चाल काफी हद तक क्रूड ऑयल की कीमतों, विदेशी निवेशकों के अगले कदम और ग्लोबल घटनाक्रमों पर ही निर्भर करेगी।






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