महिला सशक्तिकरण की दिशा में बढ़ते कदम, सरकारी योजनाओं से मिल रहा नया संबल...
लेमन ग्रास की भीनी महक से बदल रही महिलाओं की तकदीर, गौरेला-पेण्ड्रा-मरवाही की दीदियां बन रहीं 'लखपति दीदी'...
अमारू गांव में 20 एकड़ भूमि पर लेमन ग्रास की खेती, ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मिल रही नई मजबूती...

पत्रकार अमृतेश्वर सिंह की क़लम से :-
रायपुर, 05 अक्टूबर 2026 — छत्तीसगढ़ की वादियों और प्राकृतिक संपदा से परिपूर्ण गौरेला-पेण्ड्रा-मरवाही (जीपीएम) जिले में इन दिनों एक अलग ही खुशबू फैली हुई है। यह महक सिर्फ लेमन ग्रास की नहीं, बल्कि ग्रामीण महिलाओं के बुलंद हौसलों और उनकी आत्मनिर्भरता की है। कभी चार दीवारों और घर-गृहस्थी तक सीमित रहने वाली महिलाएं आज संगठित होकर खेती और स्वरोजगार के रास्ते अपने परिवार की मजबूत आर्थिक ताकत बन चुकी हैं। जिले के ग्राम अमारू में बिहान योजना से जुड़ी महिला स्वसहायता समूहों की दीदियों ने लेमन ग्रास की व्यावसायिक खेती के जरिए स्वावलंबन की एक नई मिसाल पेश की है।
देशभर की ग्रामीण महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बना कर उन्हें ‘लखपति दीदी’ के रूप में स्थापित करने के दृष्टिकोण को राज्य में धरातल पर उतारा जा रहा है। केंद्र और राज्य सरकार की विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं के बेहतर तालमेल से महिलाओं को स्वसहायता समूहों से जोड़ने के साथ वित्तीय सहायता, बैंक लिंकेज, विशेष प्रशिक्षण और आजीविका के आधुनिक अवसर मुहैया कराए जा रहे हैं। इसी क्रम में जीपीएम जिले में औषधीय और व्यावसायिक फसलों के उत्पादन को बढ़ावा देकर महिलाओं की आय बढ़ाने की अनोखी पहल शुरू की गई है।
सामूहिक खेती से तैयार हो रहा आजीविका का नया मॉडल -
जनपद पंचायत पेंड्रा के अंतर्गत आने वाले ग्राम अमारू में 10 महिला स्वसहायता समूहों की दीदियों ने एकजुट होकर लगभग 20 एकड़ भूमि पर सामूहिक रूप से लेमन ग्रास की खेती की है। इन समूहों में ज्योति महिला समूह, महामाया समूह, जय संतोषी माता समूह और हनी समूह प्रमुख रूप से शामिल हैं। महिलाओं का यह साझा प्रयास केवल फसल उगाने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह स्थानीय संसाधनों का सदुपयोग कर ग्रामीण स्तर पर स्थायी आजीविका का एक बेहतरीन मॉडल गढ़ रहा है।
लेमन ग्रास एक बेहद उपयोगी सुगंधित एवं औषधीय पौधा है, जिससे निकलने वाले तेल की मांग बाजार में बनी रहती है। अमारू गांव की ये मेहनती महिलाएं खेती के बाद इस पौधे से तेल का निष्कर्षण कर उसे खुले बाजार और प्रमुख औषधीय संस्थानों तक पहुंचाने की पुख्ता तैयारी कर रही हैं, जिससे इनकी मेहनत को सीधा और उचित बाजार मिल सकेगा।
अलग-अलग गतिविधियों से बढ़ रही आमदनी -
ज्योति महिला समूह से जुड़ी गायत्री काशीपुरी बताती हैं कि उनके समूह की 11 महिलाएं पादप औषधि बोर्ड के सहयोग से लेमन ग्रास की खेती में जुटी हैं। उन्होंने साझा किया कि इससे प्राप्त तेल का उपयोग चाय, इत्र और विभिन्न प्रकार की आयुर्वेदिक औषधियों के निर्माण में किया जाता है, जिससे आने वाले समय में अच्छी कमाई की पूरी उम्मीद है।
इसी तरह, महामाया समूह की सुशीला भानू, जय संतोषी माता समूह की पाबरिया भानू और हनी समूह की पूजा ध्रुव का कहना है कि बिहान योजना से जुड़ने के बाद उनकी जिंदगी में सकारात्मक बदलाव आया है। समूहों को शुरुआती तौर पर 15 हजार रुपये की चक्रीय राशि, 60 हजार रुपये की सामुदायिक निवेश निधि और बैंक लिंकेज का बड़ा लाभ मिला है।
इस वित्तीय संबल और सामूहिक ताकत के बूते महिलाएं अब केवल लेमन ग्रास तक ही सीमित नहीं हैं, बल्कि वे सेंटरिंग प्लेट व्यवसाय, टेंट हाउस संचालन, सब्जी बाड़ी, किराना दुकान, बकरी पालन और मुर्गी पालन जैसे कई अन्य आजीविका कार्यों से भी जुड़ चुकी हैं। इससे न केवल उनकी व्यक्तिगत आय बढ़ी है, बल्कि घर-परिवार के अहम फैसलों में उनकी भागीदारी और खुद का आत्मविश्वास भी मजबूत हुआ है।
बदलती तस्वीर और सुनहरे भविष्य की उम्मीद -
ग्राम अमारू की यह सफलता ग्रामीण छत्तीसगढ़ में आ रहे क्रांतिकारी बदलाव की जीवंत तस्वीर पेश करती है। जिन हाथों ने वर्षों तक सिर्फ परिवार की देखरेख की, वे आज खेतों में तकनीकी खेती कर आर्थिक आज़ादी की नई इबारत लिख रहे हैं। समूह की शक्ति, प्रशासनिक सहयोग और महिलाओं का अटूट परिश्रम मिलकर गांव में समृद्धि का नया रास्ता तैयार कर रहा है।
लेमन ग्रास की यह मादक महक अब खेतों की सरहदों को लांघकर इन महिलाओं के सुनहरे भविष्य, उनके परिवारों की खुशहाली और एक आत्मनिर्भर छत्तीसगढ़ की पहचान बनती जा रही है।






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