स्मार्ट सिटी मिशन मार्च 2025 में खत्म, फिर भी रायपुर में ₹27 करोड़ और बिलासपुर में ₹161 करोड़ के प्रोजेक्ट्स जमीन पर अधूरे....
स्मार्ट सिटी घोटाले में बड़ा खुलासा: रायपुर के विकास का ₹1.82 करोड़ अधिकारियों ने 'ऑफिस खर्च' में उड़ाया! EOW जांच के बीच केंद्र की आरटीआई से हुआ पर्दाफाश।
कागजों में दिखा दिया 100% खर्च और 'शून्य' बैलेंस, जबकि धरातल पर काम पेंडिंग।
अधिकारियों की लापरवाही से छत्तीसगढ़ को ₹98 करोड़ के केंद्रीय अनुदान का बड़ा फटका।

पत्रकार अमृतेश्वर सिंह की क़लम से:- रायपुर। रायपुर और बिलासपुर स्मार्ट सिटी के 1,764 करोड़ रुपये के कार्यों में हुई वित्तीय अनियमितताओं को लेकर राज्य आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो (EOW/ACB) में चल रही जांच के बीच एक और बड़ा दस्तावेजी प्रमाण सामने आया है। मामले के शिकायतकर्ता एवं वरिष्ठ अधिवक्ता मनोज सिंह ठाकुर ने केंद्रीय आवासन एवं शहरी कार्य मंत्रालय (MoHUA), नई दिल्ली से प्राप्त 12 अक्टूबर 2026 की नई आरटीआई के दस्तावेज मीडिया को जारी किए हैं। इन सरकारी दस्तावेजों ने स्मार्ट सिटी के अधिकारियों के वित्तीय कुप्रबंधन की पोल खोल दी है।
मीडिया के लिए मुख्य खुलासे (Key Points):
विकास के पैसे से ऑफिस के शौक (Fund Diversion):
केंद्रीय मंत्रालय की आरटीआई रिपोर्ट के पेज नंबर 8 पर रायपुर स्मार्ट सिटी के खुद के आधिकारिक पत्र (पत्र क्र. 25153) में यह लिखित रूप में स्वीकार किया गया है कि ऑफिस और प्रशासनिक खर्च (A&OE) के लिए मिले बजट से जब काम नहीं चला, तो अधिकारियों ने शहर के विकास कार्यों (Project Fund) के लिए आए पैसे में से 1 करोड़ 82 लाख 50 हजार रुपये उधार लेकर ऑफिस खर्च में उड़ा दिए! जनता के विकास के पैसे का यह सीधा डायवर्जन है।
कागजों में सब गोलमाल, जमीन पर काम अधूरे:
केंद्र सरकार की अपनी रिपोर्ट (Annexure-II) के अनुसार, स्मार्ट सिटी मिशन आधिकारिक रूप से 31 मार्च 2025 को समाप्त हो चुका है। कागजों में 100% भुगतान और 'शून्य' (NIL) बैलेंस दिखा दिया गया है, लेकिन धरातल की सच्चाई यह है कि—रायपुर में 27 करोड़ रुपये की लागत के 3 प्रोजेक्ट्स और बिलासपुर में 161 करोड़ रुपये की लागत के 8 प्रोजेक्ट्स आज भी जमीन पर अधूरे (Implementation Stage) पड़े हैं।
छत्तीसगढ़ को 98 करोड़ का नुकसान:
केंद्र सरकार ने प्रत्येक स्मार्ट सिटी के लिए 490 करोड़ रुपये दिए थे। इंदौर, जबलपुर, नागपुर और भुवनेश्वर ने पूरे 490-490 करोड़ प्राप्त किए, लेकिन रायपुर और बिलासपुर के अधिकारियों की नाकामी के कारण रायपुर को सिर्फ 453 करोड़ (37 करोड़ का नुकसान) और बिलासपुर को सिर्फ 429 करोड़ (61 करोड़ का नुकसान) ही मिल पाए। यानी छत्तीसगढ़ को कुल 98 करोड़ रुपये के केंद्रीय फंड से हाथ धोना पड़ा।
अधिवक्ता मनोज सिंह ठाकुर ने बताया कि इस पूरे मामले की आधिकारिक शिकायत पहले ही EOW/ACB में दर्ज कराई जा चुकी है, और इन अकाट्य सरकारी दस्तावेजों के आधार पर इस घोटाले की परतें और तेजी से खुलेंगी।






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