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किसान खेत में मेहनत करे या पटवारी-तहसीलदार के दफ्तर का चक्कर काटे?....

Sep 22
3 min read

पत्रकार अमृतेश्वर सिंह की क़लम से :-

















  • भाजपा सरकार ‘एग्री स्टेक’ नहीं, किसानों के रास्ते में ‘डिजिटल स्पीड ब्रेकर’ लगा रही है ताकि धान कम खरीदना पड़े - कांग्रेस

रायपुर:- एग्री स्टेक पंजीयन की जटिलता के बीच अब संयुक्त खाताधारकों और सहखातेदारों के लिए अलग-अलग पंजीयन की अनिवार्यता के फरमान को भाजपा सरकार का किसान विरोधी षड्यंत्र करार देते हुए प्रदेश कांग्रेस कमेटी के मुख्य प्रवक्ता सुरेंद्र वर्मा ने कहा है कि एग्री स्टेक के नाम पर भाजपा सरकार ने छत्तीसगढ़ के अन्नदाता को परेशान करने का कुचक्र रचा है। नियम आसान करने के बजाय रोज नए पेच फंसाकर धान खरीदी का रकबा घटाने की नीयत साफ दिख रही है।प्रदेश की भाजपा सरकार डिजिटल सुधार के नाम पर छत्तीसगढ़ के किसानों पर अत्याचार कर रही है। पहले एग्री स्टेक पोर्टल के सर्वर ने किसानों का पसीना छुड़ाया और अब संयुक्त खाताधारकों व सह-खातेदारों के अलग-अलग पंजीयन का नया फरमान थोप दिया गया है। यह नीतियां पारदर्शिता के लिए नहीं, बल्कि किसानों को प्रक्रिया में उलझाकर धान खरीदी का रकबा कम करने की सुनियोजित साजिश है। कांग्रेस पार्टी मांग करती है कि इस अव्यवहारिक नियम को तत्काल वापस लिया जाए।


प्रदेश कांग्रेस कमेटी के मुख्य प्रवक्ता सुरेंद्र वर्मा ने कहा है कि भाजपा सरकार डिजिटल क्रांति और पारदर्शी धान खरीदी का दावा कर रही है, लेकिन जमीनी हकीकत इसके विपरीत है, सर्वर डाउन रहने, तकनीकी उलझनों और रोज बदलते नए नियमों के कारण किसान पटवारी कार्यालयों और सोसायटियों के चक्कर काटने को मजबूर हैं। अचानक संयुक्त खाताधारकों और सहखातेदारों के लिए अलग-अलग अनिवार्य पंजीयन का फरमान जारी कर दिया गया। ग्रामीण क्षेत्रों में पारिवारिक सहमति से एक व्यक्ति के नाम पर फसल बेचने की पुरानी व्यवस्था थी, जब छत्तीसगढ़ में सदियों से संयुक्त खातेदारी की पारिवारिक व्यवस्था चल रही है, तो धान खरीदी के ठीक पहले अलग-अलग पंजीयन का तुगलकी फरमान क्यों जारी किया गया? क्या सरकार का असली मकसद एग्री स्टेक और सह-खातेदारी के नाम पर धान का रकबा घटाना और किसानों को 3100 रुपये प्रति क्विंटल देने से बचना है? बिना पर्याप्त तैयारी और जागरूकता के यह जटिलता थोपी गई है, जिसका असली मकसद धान खरीदी के रकबे को कम करना और किसानों को प्रक्रियात्मक जटिलता में उलझाकर धान बेचने से रोकना है।


प्रदेश कांग्रेस कमेटी के मुख्य प्रवक्ता सुरेंद्र वर्मा ने कहा है कि क्या भाजपा सरकार यह चाहती है कि खेत में पसीना बहाना छोड़कर दफ्तर में अंगूठा लगाने के लिए लाइन में खड़े रहे किसान? यह सुधार नहीं, किसानों को परेशान करने का कुत्सित प्रयास है। छत्तीसगढ़ की संयुक्त परिवार परंपरा और ग्रामीण व्यवस्था पर विभाजनकारी भाजपा का तकनीकी हथौड़ा चल रहा है। संयुक्त खाते वाले किसान परिवार विवाद और अनावश्यक भाग-दौड़ का शिकार हो रहे हैं। बुजुर्ग, महिला सह-खातेदार और दूर रहने वाले परिजनों के अंगूठे/सत्यापन के बिना पंजीयन अटक गया है। इससे धान उपार्जन के समय किसानों को टोकन और सही समय पर भुगतान मिलने पर संकट मंडरा रहा है। पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार ने किसान-हित को सर्वाेपरि रखा था। राजीव गांधी किसान न्याय योजना के तहत सरल पंजीयन प्रक्रिया और गिरधावरी में सुगमता थी। तब लक्ष्य किसान को आसान व्यवस्था से जोड़ना था, जबकि वर्तमान भाजपा सरकार का ध्यान डिजिटल रोड़े अटकाकर खरीदी घटाने पर है। भाजपा सरकार का ध्यान डिजिटल रोड़े अटकाकर खरीदी घटाने पर है। साय सरकार का डिजिटल फॉर्मूला सीधा है, न नियम सरल होंगे, न टोकन कटेगा, न धान खरीदा जाएगा।

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