google.com, pub-3310156774694367, DIRECT, f08c47fec0942fa0
top of page
WhatsApp Image 2025-09-10 at 15.54_edite
ADN FILMS POSTER

BREAKING ADN NEWS

WhatsApp Image 2026-09-19 at 09.46.31.jpeg
WhatsApp Image 2026-09-08 at 12.10.10.jpeg
WhatsApp Image 2026-09-19 at 09.46.30 (2).jpeg
WhatsApp Image 2026-09-19 at 09.46.31 (1).jpeg
WhatsApp Image 2026-09-19 at 09.46.30 (1).jpeg

आबकारी विभाग पर गंभीर आरोप: नकली होलोग्राम-घोटाला और ओवररेटिंग से जनता का शोषण......

Jul 17
5 min read

ब्रेकिंग ADN न्यूज़ -

आबकारी विभाग में भ्रष्ट अधिकारियों का वर्चस्व, एफआईआर में दर्ज अधिकारी, कब होगी गिर तारी नष्टीकरण, ओवर रेट, नकली होलोग्राम वाली शराब बेचने के मामले में लीपा-पोती छत्तीसगढिय़ों का पैसा लूटने में आबकारी विभाग बना नंबर वन भ्रष्ट घोटालेबाज एफआईआर में दर्ज आरोपी, बाहरी अधिकारी, आबकारी विभाग का मु य कर्ता-धर्ता बने साजिशन आबकारी विभाग भाजपा सरकार को हर स्तर पर बदनाम करने के लिए आतुर, नई-नई योजना बनाकर जनता को लूट रहे |


शराब दुकानों में समय सीमा के उपरांत ओवर रेटिंग के साथ हल्के ब्रांड की शराब देकर छत्तीसगढ़ को लूटा जा रहा अधिकांश बार में फायर से टी और हाइजिन की अनदेखी, समय सीमा के बाद नकली शराब, बीयर मनमाना दाम पर बेच रहे, पीने वाले हैं परेशान, खुजली, हार्ट अटैक, बीपी और चर्मरोग की बीमारियां हो रही रायपुर (जसेरि)। राजधानी में सिलतरा वेयर हाउस से नष्टीकरण वाली शराब खुले बाजार में बिकने तथा पूरे प्रदेश में शराब की ओवररेटिंग के खुलासे के बाद भी आबकारी विभाग दोषियों को बचाने में जुटा है। सिलतरा वेयर हाउस से नष्टीकरण वाली शराब जिस प्रभारी अधिकारी दीप मसीह के संरक्षण में खुले बाजार में बेची गई उस अधिकारी को प्रमोट कर राज्य उडऩदस्ते का प्रभारी बना दिया गया। मामले के खुलासे के बाद कमिश्नर ने वेयरहाउस में जांच के लिए एक टीम भेजी लेकिन उक्त अधिकारी ने वहां बैठे-बैठे ही अपने प्रभाव से पूरी जांच को मैनेज कर लिया और मामले को दबा दिया गया। मामले में लीपा-पोती होने के बाद उक्त अधिकारी वेयर हाउस प्रभारी अधिकारी के पद से रिलीव हो गईं। उन्हें इनाम देकर राज्य उडऩदस्ते का प्रभारी बनाया गया है।


आबकारी विभाग ओवर रेटिंग शराब बिक्री के मामले में जहां छोटे अधिकारियों-कर्मचारियों को निशाना बनाकर कार्रवाई का दिखावा कर रहा है वहीं सिलतरा वेयर हाऊस से आऊट डेटिंग व नष्टीकरण वाली शराब खुले बाजार में बेचे जाने के मामले में कोई भी कार्रवाई करने से बच रहा है। दरअसल विधानसभा में ध्यानाकर्षण के माध्यम से मामला उठने के बावजूद सरकार व विभाग द्वारा मामले को संज्ञान में न लेना आश्चर्यजनक है। भ्रष्ट अधिकारियों ने नष्टीकरण के बजाय जहरीली शराब को आसपास के ढाबे और होटलों में बेच कर लाभ कमाया। यह सबकुछ प्रभारी अधिकारी के संरक्षण में वेयर हाउस के कर्मचारियों द्वारा किया गया। इतना ही नहीं प्रभारी अधिकारी को अब उपकृत कर राज्य आबकारी उडऩदस्ते का प्रभारी बना दिया गया है। इससे साफ है कि अपनी और विभाग के उच्चाधिकारियों की जेब भरने वाले अधिकारियों पर किसी तरह की कार्रवाई की उ मीद बेमानी है।


ऐसे अधिकारियों का बेखौफ होना और किसी कार्रवाई को लेकर संशंकित न होना भी हैरान करने वाला है। ऐसे अधिकारी खुले तौर पर दावा करते हैं कि कोई उनका कुछ नहीं बिगाड़ सकता। अधिकारियों की ऐसी कार्यप्रणाली से जनता और सरकार के प्रति उनकी गैर जवाबदेही साफ नजर आती है। विभाग की नजर में भ्रष्ट अधिकारी प्रमोशन के हकदार बन गए हैं। इसका स्पष्ट संकेत यह है कि पूर्व में इन्हीं आरोपों में हटाए गए 29 अधिकारी कर्मचारियों को फिर से बहाल करने की तैयारी अंदरखाने चल रही है। वहीं औव्हर रेटिंग की जांच कर रहे उडऩदस्ता के अधिकारियों पर विभाग के बड़े भ्रष्ट अधिकारियों की वक्र दृष्टि पड़ गई है।


जो आबकारी विभाग में ईमानदारी के साथ काम कर रहे उन पर विभाग की गाज गिर रही है। माना जा रहा है कि विभाग के भ्रष्ट अधिकारी ओव्हर रेटिंग की जांच को प्रभावित कर रोकने की साजिश को अंजाम देने में लगे हुए है ताकि उन्हें ओव्हर रेटिंग का कमीशन पूर्ववत मिलता रहे। इन खुलासों से आबकारी विभाग की निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। स्थानीय स्तर पर लंबे समय से शराब दुकानों में ओवररेटिंग की शिकायतें मिल रही थीं। अन्य अनियमितताओं की शिकायतें भी लगातार सामने आती रही हैं। कहा जा रहा है कि राज्य स्तरीय उडऩदस्ता की इस कार्रवाई ने विभागीय निगरानी पर चर्चा तेज कर दी है। स्थानीय लोगों का कहना है कि जिले की कुछ शराब दुकानों में पहले भी अधिक कीमत वसूली जाती थी। उडऩदस्ता की कार्रवाई के बाद अब आबकारी विभाग से आगे की जांच की अपेक्षा है। संभावित कार्रवाई पर भी सभी की नजर बनी हुई है। विभाग को इन शिकायतों पर गंभीरता से ध्यान देना चाहिए।


नष्टीकरण के बजाय बाजार में बेच रहे एक्सपायरी शराब

आबकारी विभाग के अनुसार बहुत पुरानी हो चुकी या बिक्री अवधि के करीब पहुंच चुकी शराब और बीयर को नष्ट करने का आदेश दिया जाता है। दुकानों और गोदामों से प्राप्त जानकारी के आधार पर सूची तैयार कर वेयरहाउस प्रभारी को नष्टीकरण की प्रक्रिया पूरी करने के निर्देश दिए जाते हैं। आरोप है कि कागजों में नष्टीकरण दिखाने के बाद यही स्टॉक बाजार में बेच दिया जाता है। उदाहरण के तौर पर: सेवन हिल्स बीयर की लगभग 100 पेटियां, जिन्हें एक्सपायरी के कारण नष्ट किया जाना था, अवैध रूप से बेच दी गईं। बडवाइजर बीयर की करीब 200 पेटियों को वास्तविक नुकसान से अधिक क्षतिग्रस्त दिखाया गया। परनोड कंपनी की इंपीरियल ब्लू (आईबी) शराब की लगभग 100 पेटियों को भी क्षतिग्रस्त खेप का हिस्सा बताकर अवैध रूप से बेचने का आरोप है। इस पूरे खेल में प्रभारी अधिकारी का संरक्षण और वेयरहाउस में पदस्थ कर्मचारियों का हाथ बताया जा रहा है।


कांग्रेस विधायक संदीप साहू ने विधानसभा के मानसून सत्र में आबकारी मंत्री का ध्यानाकर्षण करते हुए पूरे प्रदेश में नकली शराब के निर्माण होने की बात को सदन में रखी। जिसमें बलौदाबाजार, भाटापारा, तिल्दा-नेवरा और आसपास के ग्रामीण इलाकों में नकली शराब का निर्माण बड़े पैमाने पर किए जाने की ओर ध्यान आकृष्ट कराया। इलाहाबाद हाईकोर्ट से पूर्व आबकारी आयुक्त निरंजन दास को जमानत इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बहुचर्चित कथित छत्तीसगढ़ शराब घोटाले से जुड़ी उत्तर प्रदेश की एफआईआर में छत्तीसगढ़ के पूर्व आबकारी आयुक्त और सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी निरंजन दास को जमानत दे दी है, कोर्ट ने साफ किया कि केवल आरोपी के आपराधिक इतिहास के आधार पर जमानत से इनकार नहीं किया जा सकता, जब तक यह साबित न हो कि वह न्यायिक प्रक्रिया को प्रभावित कर सकता है या फरार होने की आशंका है. कोर्ट बोला- जमानत का मकसद ट्रायल में मौजूदगी सुनिश्चित करना : जस्टिस विक्रम डी. चौहान की एकल पीठ ने कहा कि जमानत का उद्देश्य आरोपी की ट्रायल के दौरान अदालत में मौजूदगी सुनिश्चित करना है।


राज्य सरकार की ओर से ऐसा कोई ठोस साक्ष्य पेश नहीं किया गया जिससे यह साबित हो कि निरंजन दास जांच या न्यायिक प्रक्रिया में बाधा डाल सकते हैं, गवाहों को प्रभावित कर सकते हैं या सबूतों से छेड़छाड़ कर सकते हैं। इसलिए केवल आपराधिक इतिहास को आधार बनाकर जमानत से इनकार करना उचित नहीं होगा। 2,161 करोड़ के कथित घोटाले से जुड़ा है मामला अभियोजन के अनुसार, निरंजन दास पर आरोप है कि छत्तीसगढ़ के आबकारी आयुक्त रहते हुए उन्होंने ऐसी आबकारी नीति और टेंडर प्रक्रिया तैयार की, जिससे नोएडा स्थित एम/एस प्रिज्म होलोग्राफी सिक्योरिटी फिल् स प्राइवेट लिमिटेड को अनुचित लाभ मिला। आरोप है कि नकली होलोग्राम के जरिए शराब घोटाले को अंजाम दिया गया। इस मामले में छत्तीसगढ़ और उत्तर प्रदेश दोनों राज्यों में एफआईआर दर्ज की गई थी। उत्तर प्रदेश में मामला इसलिए दर्ज हुआ क्योंकि कथित तौर पर होलोग्राम की छपाई नोएडा में हुई थी।


सुप्रीम कोर्ट से पहले ही मिल चुकी थी राहत - सुनवाई के दौरान यह भी बताया गया कि छत्तीसगढ़ के मु य मामले में सुप्रीम कोर्ट मई 2026 में निरंजन दास को पहले ही जमानत दे चुका है। हाईकोर्ट ने यह भी माना कि कथित आर्थिक नुकसान छत्तीसगढ़ में हुआ है, जबकि यूपी में जांच पूरी हो चुकी है और चार्जशीट दाखिल की जा चुकी है, जिसमें 22 गवाह शामिल हैं। ऐसे में ट्रायल लंबा चलने की संभावना को देखते हुए अदालत ने जमानत मंजूर कर ली।

Comments


© 2018 by Anis lala dani. Proudly created with breakingadnnews.com

  • Subscribe Channale
bottom of page
naver-site-verification: navere8d42c0359e3e135363406d5b6093c27.html