एसईसीआर रेलवे की माल ढुलाई से ₹30 हजार करोड़ कमाई- मनोज सिंह ठाकुर...
एसईसीआर रेलवे केवल माल ढुलाई से ₹30 हजार करोड़ कमाने का बना जरिया, जनता के लिए सुविधा शून्य: मनोज सिंह ठाकुर का बड़ा हमला (आरटीआई में खुलासा) |
"मुनाफा रेलवे का, मुसीबत जनता की"— मालगाड़ियों से ₹30,000 करोड़ की कमाई, पर रद्द ट्रेनों से परेशान मुसाफिरों के लिए फूटी कौड़ी की वैकल्पिक व्यवस्था नहीं: मनोज सिंह ठाकुर |
लगातार ट्रेनें निरस्त करने पर रेलवे का लिखित कबूलनामा— "दैनिक यात्रियों के लिए कोई वैकल्पिक यात्रा व्यवस्था नहीं" |
रद्द ट्रेनों के आंकड़े छिपाने पर भड़के जननेता मनोज सिंह ठाकुर, बोले— "जनता की आवाज दबाने नहीं देंगे, जरूरत पड़ी तो हाईकोर्ट में लगाएंगे पीआईएल" |

पत्रकार अमृतेश्वर सिंह की कलम से :- रायपुर :- दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे (एसईसीआर रेलवे) द्वारा लगातार यात्री ट्रेनों को रद्द करने और आम जनता की हो रही भारी फजीहत के खिलाफ प्रमुख जननेता एवं अधिवक्ता मनोज सिंह ठाकुर ने मोर्चा खोल दिया है। ठाकुर द्वारा सूचना का अधिकार (आरटीआई) अधिनियम के तहत हासिल किए गए आधिकारिक दस्तावेजों से यह सनसनीखेज सच सामने आया है कि एसईसीआर रेलवे केवल माल ढुलाई से हजारों करोड़ रुपये कमाने का जरिया बनकर रह गया है, जबकि आम नागरिकों, नौकरीपेशा, छात्रों और मरीजों की सुविधाओं को शून्य कर दिया गया है।

मुनाफे का रिकॉर्ड, पर जनता बेहाल: मनोज सिंह ठाकुर
जननेता मनोज सिंह ठाकुर ने एसईसीआर रेलवे बिलासपुर द्वारा जारी आधिकारिक आंकड़ों का हवाला देते हुए कड़े शब्दों में कहा कि रेलवे का पूरा ध्यान सिर्फ कोयला और माल ढोकर तिजोरी भरने पर है |
वर्ष 2022-23: माल ढुलाई से कमाई ₹26,581.3 करोड़ (यात्री किराया: मात्र ₹1,131.92 करोड़)
वर्ष 2023-24: माल ढुलाई से कमाई ₹27,794.61 करोड़ (यात्री किराया: मात्र ₹1,280.73 करोड़)
वर्ष 2024-25: माल ढुलाई से कमाई ₹29,372.43 करोड़ (यात्री किराया: मात्र ₹1,330.70 करोड़)
वर्ष 2025-26: माल ढुलाई से कमाई ₹30,410.30 करोड़ (यात्री किराया: मात्र ₹1,417.95 करोड़)
वर्ष 2026-27 (अगस्त 2026 तक): माल ढुलाई से कमाई ₹13,105.74 करोड़ दर्ज हो चुकी है।
ठाकुर ने सवाल उठाया कि देश में सबसे ज्यादा मुनाफा देने वाले जोन के स्थानीय नागरिकों को ही ट्रेनों की बुनियादी सुविधा से महरूम क्यों रखा जा रहा है?
रेलवे का संवेदनहीन कबूलनामा— यात्रियों के लिए कोई वैकल्पिक साधन नहीं |
मनोज सिंह ठाकुर ने आरटीआई के बिंदु क्रमांक 4 का उल्लेख करते हुए बताया कि जब रेलवे से पूछा गया कि निरस्त ट्रेनों के कारण परेशान दैनिक यात्रियों के लिए क्या वैकल्पिक व्यवस्था की गई है, तो रेलवे ने लिखित में शर्मनाक जवाब दिया— "No separate alternative travel arrangements are provided for affected daily commuters" (प्रभावित दैनिक यात्रियों के लिए कोई अलग वैकल्पिक यात्रा व्यवस्था नहीं की गई है)।
ठाकुर ने कहा कि अचानक पैसेंजर और मेमू ट्रेनें बंद कर दी जाती हैं, जिससे आम जनता को मजबूरन निजी बसों और टैक्सियों में लूटना पड़ता है। जब रेलवे 30 हजार करोड़ रुपये कमा रहा है, तो क्या वह अपने यात्रियों के लिए वैकल्पिक बस परिवहन भी उपलब्ध नहीं करा सकता?
रद्द ट्रेनों की जानकारी छिपाने का आरोप :-
मनोज सिंह ठाकुर ने आरोप लगाया कि 2023 से 2026 तक रद्द की गई ट्रेनों की कुल संख्या और उनके कारणों की जानकारी देने के बजाय वाणिज्य विभाग ने इसे परिचालन विभाग पर टाल दिया है। उन्होंने कहा कि रेलवे सच छिपाने की कोशिश कर रहा है, लेकिन जनता के हक की लड़ाई को बीच में नहीं छोड़ा जाएगा।
जननेता मनोज सिंह ठाकुर की दो टूक चेतावनी-
मालगाड़ियों को प्राथमिकता देकर लोकल और पैसेंजर ट्रेनों को रद्द या लेट करने की जनविरोधी नीति पर तत्काल रोक लगाई जाए। जब तक सभी ट्रेनें पूरी तरह बहाल नहीं होतीं, तब तक प्रभावित दैनिक यात्रियों के लिए रेलवे अपने खर्च पर वैकल्पिक परिवहन की व्यवस्था करे।
मनोज सिंह ठाकुर ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि रेल प्रशासन ने यात्री सुविधाओं को अविलंब बहाल नहीं किया, तो वे आम जनता और दैनिक यात्रियों को लामबंद कर बड़ा जनांदोलन करेंगे और इस विषय को लेकर माननीय उच्च न्यायालय में जनहित याचिका (PIL) दायर करेंगे।
भवदीय,
मनोज सिंह ठाकुर
(वरिष्ठ अधिवक्ता एवं समाजसेवी/जननेता)
कुशालपुर, ठाकुर बलराम सिंह गली, संतोषी चौक,
रायपुर (छत्तीसगढ़)
मोबाइल: 9425203728
(संलग्न: दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे द्वारा जारी आरटीआई उत्तर पत्र की छायाप्रति) |






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