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सावन केवल महीना नहीं, शिव तत्व में लीन होने का पवित्र समय: विधायक डॉ. संपत अग्रवाल....

Aug 5
2 min read
  • विधायक डॉ. संपत अग्रवाल ने सावन के प्रथम सोमवार पर किया भगवान भोलेनाथ का जलाभिषेक, प्रदेश की सुख-समृद्धि की मांगी मन्नत |

  • विधायक डॉ. संपत अग्रवाल ने विधि-विधान से की भगवान शिव की पूजा, बताया सावन मास में जलाभिषेक का धार्मिक व प्राकृतिक महत्व |

  • वैदिक मंत्रोच्चार के बीच विधायक डॉ. संपत अग्रवाल ने टेका माथा, समस्त प्रदेशवासियों के आरोग्य और खुशहाली की कामना की |

पत्रकार अमृतेश्वर सिंह की कलम से:-

बसना सावन मास के पावन अवसर पर बसना विधानसभा क्षेत्र के लोकप्रिय विधायक डॉ. संपत अग्रवाल ने प्रथम सोमवार को देवाधिदेव भगवान भोलेनाथ का विधि-विधान और वैदिक मंत्रोच्चार के साथ जलाभिषेक कर पूजा-अर्चना की। इस दौरान उन्होंने भगवान शिव से समस्त प्रदेशवासियों एवं क्षेत्रवासियों के जीवन में सुख, समृद्धि, शांति और उत्तम स्वास्थ्य की मंगलकामना की। विधायक डॉ अग्रवाल ने भगवान शिव की भक्ति एवं आराधना को समर्पित पावन श्रावण मास के प्रथम सोमवार के अवसर पर सभी को हार्दिक शुभकामनाएं दी। साथ ही कहा कि देवाधिदेव महादेव की असीम कृपा से सभी के जीवन में सुख, समृद्धि एवं उत्तम स्वास्थ्य का वास हो, यही प्रार्थना है।

पूजा-अर्चना के उपरांत श्रद्धालुओं एवं मीडिया प्रतिनिधियों से चर्चा करते हुए विधायक डॉ. संपत अग्रवाल ने कहा कि भगवान शिव कल्याणकारी, आशुतोष और करुणा के सागर हैं। उन्होंने रेखांकित किया कि सावन मास केवल एक सामान्य महीना नहीं है, बल्कि यह शिव तत्व में लीन होकर आत्मिक व आध्यात्मिक ऊर्जा प्राप्त करने का परम पवित्र समय है। भगवान भोलेनाथ की कृपा से ही जीव मात्र का कल्याण संभव है।


सावन माह में भगवान शिव की विशेष पूजा और जलाभिषेक के धार्मिक महत्व पर प्रकाश डालते हुए विधायक डॉ. संपत अग्रवाल ने विस्तार से बताया कि पौराणिक मान्यताओं के अनुसार सावन में ही समुद्र मंथन हुआ था। मंथन से निकले अति विनाशकारी हलाहल विष से पूरी सृष्टि की रक्षा करने हेतु भगवान शिव ने उसे अपने कंठ में धारण कर लिया था। उस विष के तीव्र प्रभाव और दाह (जलन) को शांत करने के लिए समस्त देवी-देवताओं ने उन पर शीतल जल अर्पित किया था। इसी पावन परंपरा का निर्वहन करते हुए आज भी भक्त सावन में भगवान भोलेनाथ का जलाभिषेक करते हैं। इसके साथ ही, यह माह माता पार्वती की कठोर तपस्या का भी साक्षी है, जिसके फलस्वरूप उन्हें भगवान शिव पति रूप में प्राप्त हुए थे; इसीलिए इसे मनोकामना पूर्ति और अटूट भक्ति का अनुपम प्रतीक माना जाता है।


विधायक डॉ. संपत अग्रवाल ने प्रकृति और शिव के गूढ़ संबंध को रेखांकित करते हुए कहा कि सावन की वर्षा ऋतु संपूर्ण प्रकृति को नवजीवन प्रदान करती है। जल ही जीवन का मुख्य आधार है और भगवान शिव सर्वव्यापी हैं। ऐसे में शिव जी पर जल, बेलपत्र और धतूरा जैसे प्राकृतिक पत्र-पुष्प अर्पित करके हम ईश्वर और प्रकृति दोनों के प्रति अपनी गंभीर कृतज्ञता व्यक्त करते हैं। शिव की यह पूजा न केवल व्यक्तिगत शांति प्रदान करती है, बल्कि समाज में सद्भाव और भातृत्व की भावना का विकास करती है। अंत में विधायक डॉ. संपत अग्रवाल ने क्षेत्र के समस्त श्रद्धालुओं से सावन के इस पावन पर्व को भक्तिभाव, पवित्रता और उत्साह के साथ मनाने की भावपूर्ण अपील की।

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