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यूरिया-डीएपी की बिक्री घटी, मौसम बना बड़ी वजह.....

Aug 13
3 min read

ब्रेकिंग ADN न्यूज़ -

नई दिल्ली। जुलाई-अगस्त के खरीफ सीजन में किसानों के लिए सबसे अहम माने जाने वाले उर्वरकों की मांग को लेकर नया आंकड़ा सामने आया है। पिछले साल जहां देश के कई राज्यों में खाद की किल्लत और आपूर्ति संकट की खबरें सामने आई थीं, वहीं इस साल स्थिति अलग दिखाई दे रही है। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, जुलाई महीने में यूरिया, डीएपी और अन्य प्रमुख उर्वरकों की बिक्री में बड़ी गिरावट दर्ज की गई है। कृषि क्षेत्र में खरीफ सीजन को उर्वरकों की सबसे अधिक खपत वाला समय माना जाता है। धान, मक्का, कपास, सोयाबीन और अन्य खरीफ फसलों की बुवाई के दौरान किसान बड़ी मात्रा में खाद का इस्तेमाल करते हैं। ऐसे में इस अवधि में उर्वरक बिक्री में कमी को कृषि गतिविधियों और मौसम की स्थिति से जोड़कर देखा जा रहा है।


इस साल जुलाई में यूरिया, डीएपी और अन्य प्रमुख खादों की मांग में कमी आई है। विशेषज्ञों का मानना है कि इसके पीछे कई कारण जिम्मेदार हैं, जिनमें मानसून की स्थिति और अलनीनो का प्रभाव प्रमुख है। अलनीनो के कारण मौसम के पैटर्न में बदलाव देखने को मिलता है। इसका असर बारिश की मात्रा और वितरण पर पड़ सकता है। इस साल कई क्षेत्रों में मानसूनी बारिश की अनिश्चितता के कारण किसानों ने बुवाई और खेती से जुड़े फैसलों में सावधानी बरती। इसका सीधा असर उर्वरकों की मांग पर पड़ा।


किसानों को फसल की अच्छी पैदावार के लिए समय पर खाद की जरूरत होती है। लेकिन जब बारिश की स्थिति अनुकूल नहीं होती या बुवाई में देरी होती है तो किसान खाद की खरीद भी टाल देते हैं। यही वजह है कि खरीफ के शुरुआती महीनों में उर्वरकों की बिक्री में कमी देखी गई है। पिछले साल की तुलना में इस साल खाद की उपलब्धता को लेकर स्थिति बेहतर रही। सरकार और संबंधित विभागों ने उर्वरकों की आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए पहले से तैयारी की थी। हालांकि, इस बार समस्या उपलब्धता की नहीं बल्कि मांग में गिरावट की दिखाई दे रही है।


कृषि विशेषज्ञों के अनुसार, उर्वरकों की बिक्री में कमी को सीधे तौर पर किसानों की जरूरत कम होने से नहीं जोड़ा जा सकता। कई बार किसान मौसम की स्थिति को देखते हुए खाद खरीदने का समय आगे बढ़ा देते हैं। अगर बाद के महीनों में बारिश बेहतर रहती है तो मांग में फिर तेजी आ सकती है। यूरिया और डीएपी किसानों के बीच सबसे अधिक इस्तेमाल होने वाले उर्वरक हैं। इनका उपयोग फसल की शुरुआती वृद्धि और उत्पादन क्षमता बढ़ाने के लिए किया जाता है। लेकिन खरीफ सीजन में इनकी बिक्री में गिरावट यह संकेत देती है कि खेती की गतिविधियां इस समय मौसम के प्रभाव में हैं।


सरकार की ओर से लगातार किसानों को संतुलित उर्वरक उपयोग की सलाह दी जाती है। विशेषज्ञों का कहना है कि जरूरत से अधिक खाद का इस्तेमाल मिट्टी की गुणवत्ता को प्रभावित कर सकता है। ऐसे में उर्वरकों की मांग में कमी को कुछ हद तक बेहतर कृषि प्रबंधन से भी जोड़ा जा सकता है। हालांकि, किसानों के संगठनों का कहना है कि मौसम की अनिश्चितता के कारण खेती की लागत और जोखिम बढ़ रहा है। कई किसान बारिश की स्थिति स्पष्ट होने के बाद ही बड़े स्तर पर खेती से जुड़े खर्च करने का निर्णय लेते हैं। आने वाले महीनों में मानसून की स्थिति और खरीफ फसलों की बुवाई की रफ्तार यह तय करेगी कि उर्वरकों की मांग में आगे कितना बदलाव आता है। यदि बारिश सामान्य रहती है और खेती की गतिविधियां तेज होती हैं तो उर्वरक बिक्री में सुधार की संभावना है। फिलहाल जुलाई के आंकड़े यह संकेत दे रहे हैं कि इस साल खरीफ सीजन में उर्वरकों की मांग पिछले साल की तुलना में कमजोर रही है। जहां पिछले साल खाद की कमी बड़ी चुनौती थी, वहीं इस बार मौसम और अलनीनो के प्रभाव के कारण मांग में गिरावट कृषि बाजार के लिए नया मुद्दा बनकर सामने आई है।

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