RTI से 77,402 मीट्रिक टन अमानक चावल का खुलासा, FCI-मार्कफेड की चुप्पी पर उठे गंभीर सवाल...
RTI से बड़े गोलमाल का पर्दाफाश: 77,402 मीट्रिक टन अमानक चावल पर FCI और मार्कफेड की रहस्यमयी चुप्पी!
न FIR, न बैंक गारंटी जब्त, न विजिलेंस जांच; क्या गुणवत्ता के नाम पर चल रहा है सरकारी खजाने को लूटने का सुनियोजित खेल?
वरिष्ठ अधिवक्ता एवं राजनेता मनोज सिंह ठाकुर का ऐलान: "CVC और EOW में दर्ज कराएंगे शिकायत, हाईकोर्ट में दायर होगी PIL" |

पत्रकार अमृतेश्वर सिंह की कलम से :-
रायपुर: छत्तीसगढ़ में कस्टम मिलिंग, धान उपार्जन और खाद्यान्न सुरक्षा के नाम पर एक बड़े प्रशासनिक गोलमाल का खुलासा हुआ है। सूचना के अधिकार (RTI) के तहत भारतीय खाद्य निगम (FCI), मंडल कार्यालय रायपुर से मिले आधिकारिक दस्तावेजों से यह साफ हो गया है कि राज्य में गुणवत्ता के नाम पर सरकारी खजाने को करोड़ों रुपये की चपत लगाने की आशंका है, और जिम्मेदार तंत्र पूरी तरह मूकदर्शक बना हुआ है।
आरटीआई कार्यकर्ता, राजनेता एवं अधिवक्ता *मनोज सिंह ठाकुर* द्वारा मांगे गए जवाब (FCI पत्र क्रमांक DO RYP-35011/60/2026-35, दिनांक 28.10.2026) ने राज्य की धान खरीदी और मिलिंग व्यवस्था के काले सच को उजागर कर दिया है।
RTI खुलासे के तथ्य और गंभीर कानूनी सवाल:
1. 77,402 मीट्रिक टन चावल खारिज, लेकिन रिकवरी कहाँ है?: FCI मण्डल कार्यालय ने लिखित में स्वीकार किया है कि 01 जनवरी 2023 से वर्तमान तक अकेले रायपुर मण्डल में *77,402.25 मीट्रिक टन (MT)* कस्टम मिल्ड राइस (CMR) को अमानक (Sub-standard) बताकर खारिज किया गया है। लेकिन इसके एवज में मिलरों से कितना मानक चावल वापस जमा कराया गया, इसका कोई स्पष्ट हिसाब नहीं है।
2. आपराधिक दायित्व पर पर्दा: सरकारी धान मिलरों को 'अमानत' के रूप में दिया जाता है। यदि उन्होंने 77 हजार मीट्रिक टन अमानक चावल दिया, तो यह सीधे तौर पर *भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 316* और *आवश्यक वस्तु अधिनियम (EC Act)* के तहत जांच और FIR का विषय है। लेकिन FCI ने कार्रवाई का पूरा ठीकरा राज्य एजेंसी 'मार्कफेड' पर फोड़कर अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ लिया है।
3. CVC के नियमों की अनदेखी (विजिलेंस जांच नहीं): इतने विशाल पैमाने पर सरकारी खाद्यान्न रिजेक्ट होने पर स्वतः संज्ञान लेकर उच्चस्तरीय विजिलेंस जांच होनी चाहिए थी। लेकिन FCI ने अपने जवाब में माना है कि इस मामले में *केंद्रीय सतर्कता दल (Central Vigilance Team)* द्वारा कोई जांच या निरीक्षण नहीं किया गया है।
4. *किसानों और धान उपार्जन व्यवस्था को ठप्प करने की आशंका:* मिलरों द्वारा मानक चावल जमा न करने और गोदामों के जाम होने से अंततः सोसायटियों से धान का उठाव प्रभावित होता है। इससे पूरी सरकारी व्यवस्था चरमराती है और परोक्ष रूप से प्रदेश का अन्नदाता (किसान) प्रताड़ित होता है। यह विभागीय अधिकारियों और डिफ़ॉल्ट मिलरों की कथित मिलीभगत का स्पष्ट संकेत है।
"कानूनी कार्रवाई और जन-आंदोलन दोनों मोर्चों पर लड़ूंगा" — मनोज सिंह ठाकुर
इस पूरे गंभीर प्रकरण पर कड़ा रुख अपनाते हुए अधिवक्ता एवं राजनेता *मनोज सिंह ठाकुर* ने कहा, "एक अधिवक्ता और सार्वजनिक जीवन में सक्रिय जनप्रतिनिधि होने के नाते मैं इस संगठित गोलमाल को बर्दाश्त नहीं कर सकता। 77 हजार मीट्रिक टन खाद्यान्न का रिजेक्शन कोई सामान्य बात नहीं है। यह सीधे तौर पर सरकारी खजाने में बड़ी सेंधमारी की आशंका को जन्म देता है।"
अपनी कानूनी और राजनीतिक रणनीति स्पष्ट करते हुए एक कड़ा अल्टीमेटम दिया गया है— "यदि राज्य सरकार (मार्कफेड) और FCI ने तत्काल प्रभाव से डिफ़ॉल्ट मिलरों की विस्तृत जांच कर उनकी बैंक गारंटी राजसात करने और FIR की कार्रवाई नहीं की, तो हम चुप नहीं बैठेंगे। इस मामले की विस्तृत शिकायत दस्तावेजों के साथ केंद्रीय सतर्कता आयोग (CVC, नई दिल्ली) और राज्य आर्थिक अपराध अन्वेषण शाखा (EOW/ACB) में दर्ज कराई जाएगी। इसके अलावा, पूरे प्रकरण की CBI या उच्चस्तरीय समिति से जांच कराने के लिए माननीय उच्च न्यायालय (High Court) में जनहित याचिका (PIL) दायर की जाएगी।
जारीकर्ता-
मनोज सिंह ठाकुर
अधिवक्ता, जिला न्यायालय रायपुर एवं उच्च न्यायालय बिलासपुर (छ.ग.)
पूर्व सदस्य, छत्तीसगढ़ श्रम कल्याण मण्डल
आरटीआई कार्यकर्ता, राजनेता एवं प्रखर सामाजिक वक्ता
*निवास:* कुशालपुर ठाकुर बलराम सिंह गली, संतोषी चौक, रायपुर (छ.ग.) - 492001 | #RTI #Chhattisgarh #Raipur #FCI #Markfed #CustomMilling #RiceScam #FoodSecurity #ManojSinghThakur #CVC #EOW #breakingADNnews






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