कुशालपुर-प्रोफेसर कॉलोनी मार्ग के डामरीकरण और ड्रेनेज व्यवस्था को लेकर गंभीर आरोप....

पत्रकार अमृतेश्वर सिंह की कलम से :-
रायपुर: राजधानी के वामनराव लाखे वार्ड (क्रमांक 66) के अंतर्गत कुशालपुर से प्रोफेसर कॉलोनी मार्ग पर कराए जा रहे डामरीकरण कार्य को लेकर राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में बहस तेज हो गई है। लगभग ₹296.85 लाख की लागत से होने वाले इस विकास कार्य पर सवाल उठाते हुए अधिवक्ता और छत्तीसगढ़ श्रम कल्याण मंडल के पूर्व सदस्य मनोज सिंह ठाकुर ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने इस संबंध में आयोजित भूमिपूजन कार्यक्रम में शामिल रहे जनप्रतिनिधियों—सांसद बृजमोहन अग्रवाल, विधायक सुनील सोनी और महापौर मीनल चौबे—से सीधा जवाब मांगा है।
मनोज सिंह ठाकुर ने अपने बयान में कहा कि कुशालपुर और संतोषी नगर क्षेत्र में जलभराव की समस्या विकराल रूप ले चुकी है। स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के तहत बनाए गए ड्रेनेज सिस्टम की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए उन्होंने कहा कि आज भी थोड़ी सी बारिश में यह पूरा इलाका जलमग्न हो जाता है। बिना नालियों की सुध लिए और ड्रेनेज घोटाले की जांच किए बगैर लाखों रुपये का डामर बिछाना जनता के पैसे की सीधी बर्बादी है।
सड़क चौड़ीकरण और ट्रैफिक जाम का मुद्दा -
क्षेत्र की भौगोलिक स्थिति का जिक्र करते हुए उन्होंने बताया कि गोपिया पारा से माँ दंतेश्वरी मंदिर, संतोषी चौक और तिरंगा चौक होते हुए रिंग रोड चौक तक का मार्ग बेहद संकरा है। यहाँ रोजाना लगने वाले लंबे जाम के कारण स्कूली बच्चों, एंबुलेंस चालकों और आम नागरिकों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। उन्होंने जनप्रतिनिधियों से पूछा है कि बिना अतिक्रमण हटाए और सड़क को चौड़ा किए केवल ऊपरी तौर पर डामर बिछाने से यातायात की समस्या का समाधान कैसे संभव होगा?
प्रमुख मांगें और चेतावनी -
ड्रेनेज प्रणाली की उच्चस्तरीय जांच: कुशालपुर व संतोषी नगर स्मार्ट सिटी ड्रेनेज प्रोजेक्ट में बरती गई अनियमितताओं की निष्पक्ष जांच कराई जाए।
विकास क्रम में बदलाव: डामरीकरण से पहले जलभराव का स्थायी समाधान करते हुए सड़क का चौड़ीकरण सुनिश्चित किया जाए।
अंत में चेतावनी दी गई है कि यदि स्थानीय प्रशासन और जनप्रतिनिधियों ने इन बुनियादी मुद्दों पर ध्यान नहीं दिया, तो क्षेत्रवासी इस कार्यशैली के खिलाफ तीव्र जन-आंदोलन शुरू करने के लिए बाध्य होंगे।






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