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दिल की नसों की दुर्लभ बनावट बनी चुनौती, अल्फा लूप तकनीक से लगाया डुअल चैंबर पेसमेकर.....

Sep 9
3 min read
  • रायपुर में पहली बार परसिस्टेंट लेफ्ट सुपीरियर वेना कावा (PLSVC) वाली 41 वर्षीय महिला में सफल प्रक्रिया, पूर्ण हृदय अवरोध (Complete Heart Block/CHB) के इलाज के लिए लगा पेसमेकर ( Pacemaker).....

  • आयुष्मान योजना के तहत हुआ उपचार.....

पत्रकार अमृतेश्वर सिंह की क़लम -

रायपुर, पंडित जवाहरलाल नेहरू स्मृति चिकित्सा महाविद्यालय, रायपुर से संबद्ध डॉ. भीमराव अम्बेडकर स्मृति चिकित्सालय स्थित एडवांस्ड कार्डियक इंस्टीट्यूट (एसीआई) में परसिस्टेंट लेफ्ट सुपीरियर वेना कावा (Persistent Left Superior Vena Cava/PLSVC) वाली 41 वर्षीय महिला मरीज में अल्फा लूप (Alpha Loop) तकनीक से पेसमेकर लीड का सफल इम्प्लांटेशन किया गया। विभागाध्यक्ष कार्डियोलॉजी विभाग डॉ. (प्रो.) स्मित श्रीवास्तव के अनुसार राजधानी रायपुर में इस तरह की जटिल हार्ट प्रक्रिया का यह पहला मामला है।


डॉ. स्मित के अनुसार, मरीज पूर्ण हृदय अवरोध (Complete Heart Block/CHB) से पीड़ित थीं। ब्रैडीकार्डिया जैसी स्थिति में हृदय की धड़कनों को सामान्य बनाए रखने के लिए उन्हें स्थायी पेसमेकर की आवश्यकता थी। प्रक्रिया के दौरान मरीज की शिराओं की संरचना सामान्य से अलग होने के कारण पेसमेकर की लीड को हृदय तक पहुंचाना चुनौतीपूर्ण था।


क्या है परसिस्टेंट लेफ्ट सुपीरियर वेना कावा (PLSVC) ?

परसिस्टेंट लेफ्ट सुपीरियर वेना कावा (Persistent Left Superior Vena Cava PLSVC) एक ऐसी जन्मजात शारीरिक स्थिति है, जिसमें शरीर के ऊपरी हिस्से से रक्त को वापस हृदय तक पहुंचाने वाली बाईं ओर की एक नस जन्म के बाद भी बनी रहती है। सामान्यतः गर्भ में भ्रूण के शिशु बनने तक के विकास के दौरान यह नस धीरे-धीरे समाप्त हो जाती है, लेकिन कुछ लोगों में यह जन्म के बाद भी बनी रहती है, जिसे पीएलएसवीसी (PLSVC) कहा जाता है। अधिकांश मामलों में पीएलएसवीसी से व्यक्ति को कोई परेशानी नहीं होती और हृदय सामान्य रूप से काम करता रहता है। कई बार इसका पता किसी अन्य जांच या हृदय से संबंधित प्रक्रिया के दौरान संयोग से चलता है। हालांकि, पेसमेकर लगाने जैसी प्रक्रियाओं में नसों का यह अलग रास्ता कभी - कभी चिकित्सकों के लिए तकनीकी चुनौती पैदा कर सकता है।


ईश्वर के बनाए रास्ते से अलग था पेसमेकर लीड का मार्ग -

सामान्य परिस्थितियों में पेसमेकर की लीड सुपीरियर वेना कावा (Superior Vena Cava - एक छोटी, चौड़ी शिरा, जो शरीर के ऊपरी हिस्से से ऑक्सीजन रहित रक्त को सीधे हृदय के दाहिने अलिंद में ले जाती है) से राइट एट्रियम (Right Atrium) और फिर राइट वेंट्रिकल (Right Ventricle) तक पहुंचाई जाती है लेकिन पीएलएसवीसी (PLSVC) की स्थिति में लीड को बाईं ओर मौजूद नस (Left Pectoral side) से होकर कोरोनरी साइनस (Coronary Sinus) के रास्ते राइट एट्रियम (Right Atrium) तक पहुंचाना पड़ता है। इसके बाद लीड को ट्राईकस्पिड (Tricuspid Valve) के पार राइट वेंट्रिकल (Right Ventricle) में स्थापित करना चुनौतीपूर्ण होता है।


इस चुनौतीपूर्ण स्थिति को देखते हुए अल्फा (Alpha Loop) तकनीक का उपयोग किया गया। इसमें पेसमेकर की लीड को राइट एट्रियम (Right Atrium) में विशेष घुमाव देकर एक लूप बनाया जाता है, जो देखने में ग्रीक अक्षर *अल्फा (Alpha (α))* जैसा दिखाई देता है। इस विशेष विन्यास (configuration) की मदद से लीड को उचित दिशा और पर्याप्त ढीला या झोलपूर्वक (slack) छोड़ते हुए राइट वेंट्रिकल (Right Ventricle) तक पहुंचाया जाता है और स्थिर स्थिति में स्थापित किया जाता है।


कार्डियोलॉजी विभाग की विशेषज्ञ टीम ने मरीज की विशेष शिरापरक संरचना को ध्यान में रखते हुए अल्फा (Alpha Loop) तकनीक से पेसमेकर लीड को सफलतापूर्वक स्थापित किया। इसके बाद मरीज में डुअल चैंबर पेसमेकर (Dual Chamber Pacemaker) का सफल इम्प्लांटेशन किया गया। प्रक्रिया के बाद पेसमेकर की लीड की स्थिति एवं कार्यप्रणाली संतोषजनक रही और मरीज की स्थिति स्थिर है।


विशेषज्ञ टीम ने सफलतापूर्वक पूरी की प्रक्रिया -

यह जटिल प्रक्रिया डॉ. स्मित श्रीवास्तव, विभागाध्यक्ष, कार्डियोलॉजी विभाग के नेतृत्व में संपन्न हुई। टीम में डॉ. इनायत रिजवी (असि.प्रो.कार्डियोलॉजी) , डॉ. वासु कन्नौज व डॉ. मसूद (डीएम रेजिडेंट) शामिल रहे। प्रक्रिया के दौरान तकनीकी सहयोग टेक्नीशियन नवीन एवं जितेंद्र ने प्रदान किया। वहीं नर्सिंग स्टाफ बुद्धेश्वर, रोशनी एवं आशा ने मरीज की देखभाल एवं प्रक्रिया के दौरान आवश्यक प्रदान किया।


आयुष्मान योजना के तहत हुआ उपचार -

मरीज का उपचार आयुष्मान भारत योजना के अंतर्गत किया गया। शासकीय चिकित्सा संस्थान मेडिकल कॉलेज रायपुर के एसीआई में इस चुनौतीपूर्ण प्रक्रिया की सफलता अस्पताल में उन्नत कार्डियक सेवाओं के विस्तार की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है।

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