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नगरीय प्रशासन विभाग के प्रमुख सचिव सोनमणि बोरा ने ई-बस योजना, पीएम आवास और वेस्ट-टू-एनर्जी परियोजना की समीक्षा की.....

Aug 25
4 min read
  • जनसुविधा आधारित ई-बस रूट तैयार करने, 30 सितम्बर तक प्रगतिरत आवासों को पूर्ण करने, वेस्ट-टू-एनर्जी के लिए व्यवहारिक वित्तीय मॉडल और 15वें वित्त आयोग के कार्यों की बेहतर प्लानिंग के दिए निर्देश...

पत्रकार अमृतेश्वर सिंह की क़लम से:-

रायपुर नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग के प्रमुख सचिव सोनमणि बोरा ने आज मंत्रालय में वरिष्ठ अधिकारियों की बैठक लेकर विभागीय योजनाओं की समीक्षा की। उन्होंने प्रधानमंत्री ई-बस योजना, प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) 1.0, स्वच्छ भारत मिशन (शहरी) 2.0 के अंतर्गत प्रस्तावित वेस्ट-टू-एनर्जी परियोजना तथा 15वें वित्त आयोग के अंतर्गत किए जा रहे कार्यों की विस्तृत समीक्षा की। उन्होंने योजनाओं की व्यवहारिकता, वित्तीय पक्ष, समयबद्ध क्रियान्वयन तथा नागरिकों को मिलने वाले लाभों की समीक्षा करते हुए अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। उन्होंने इन योजनाओं के क्रियान्वयन में जनसुविधा, समग्र योजना, समयबद्धता, वित्तीय व्यवहार्यता और दीर्घकालिक स्थिरता को प्राथमिकता देने को कहा। उन्होंने अधिकारियों को योजनाओं की नियमित मॉनिटरिंग करते हुए निर्धारित लक्ष्यों की समय-सीमा में पूर्ति सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। सूडा के मुख्य कार्यपालन अधिकारी सुमित अग्रवाल भी बैठक में मौजूद थे।


प्रमुख सचिव सोनमणि बोरा ने बैठक में प्रधानमंत्री ई-बस योजना के तहत रायपुर में ई-बसों के संचालन को व्यवस्थित, सुविधाजनक और अधिक जनोपयोगी बनाने के लिए व्यापक रूट प्लान तैयार करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि ई-बसों के रूट निर्धारित करते समय रायपुर के प्रमुख दर्शनीय स्थलों के साथ स्कूलों, कॉलेजों, अस्पतालों तथा अन्य महत्वपूर्ण स्थलों को शामिल करें, ताकि शहर के विभिन्न हिस्सों के बीच बेहतर कनेक्टिविटी सुनिश्चित हो सके और अधिक से अधिक नागरिक सार्वजनिक परिवहन का लाभ उठा सकें। उन्होंने प्रस्तावित बस रूटों की व्यवहारिकता, यात्री आवागमन एवं कनेक्टिविटी का आकलन करने के लिए विस्तृत सर्वे प्लान तैयार कराने के निर्देश दिए। साथ ही पीपीपी मॉडल के आधार पर बस-स्टॉप्स की सूची तैयार करने तथा बस-स्टॉप्स का निर्धारण यात्रियों की सुविधा और आवश्यकता के अनुरूप करने को कहा।


प्रमुख सचिव ने यात्रियों की सुविधा और आम नागरिकों की भुगतान क्षमता को ध्यान में रखते हुए युक्तिसंगत एवं सुविधाजनक किराया निर्धारित करने की प्रक्रिया शुरू करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि ई-बस योजना को आधुनिक एवं नागरिक-केंद्रित बनाने के लिए नवीन तकनीकों का प्रभावी उपयोग किया जाए। बस-रूट, बस-स्टॉप, बसों की उपलब्धता एवं यात्री सुविधाओं से संबंधित व्यवस्थाओं को तकनीक आधारित बनाते हुए ऐसी कार्ययोजना तैयार की जाए, जिससे यात्रियों को सुगम, सुरक्षित और बेहतर सार्वजनिक परिवहन सुविधा उपलब्ध हो सके। बोरा ने प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) 1.0 के अंतर्गत निर्माणाधीन आवासों को मिशन अवधि की अंतिम निर्धारित तिथि 30 सितम्बर 2026 तक पूर्ण करने के निर्देश दिए। उन्होंने नगरीय निकायों में शेष एवं निर्माणाधीन आवासों की संख्या के आधार पर साप्ताहिक लक्ष्य निर्धारित कर विशेष ड्राइव चलाने तथा आवास निर्माण को मिशन मोड में पूर्ण करने को कहा। उन्होंने प्रत्येक नगरीय निकाय स्तर पर आवासों की प्रगति की नियमित समीक्षा करने और जहां निर्माण कार्य धीमी गति से चल रहा है, वहां आवश्यक समन्वय कर कार्यों में तेजी लाने को कहा।


प्रमुख सचिव ने जिला कलेक्टरों को भी जिले में शेष आवासों को पूर्ण कराने के लिए स्पष्ट लक्ष्य निर्धारित करने तथा उनकी सतत समीक्षा सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि जिला प्रशासन एवं नगरीय निकायों के बीच बेहतर समन्वय के माध्यम से लंबित आवासों को समय-सीमा में पूर्ण कराया जाए। आवास निर्माण में आने वाली तकनीकी, प्रशासनिक व अन्य समस्याओं की समयबद्ध पहचान कर उनका निराकरण सुनिश्चित किए जाएं। उन्होंने हितग्राहियों के आवास निर्माण की वास्तविक प्रगति के आधार पर योजना के प्रावधानों के अनुसार किस्त की राशि का भुगतान समय पर सुनिश्चित करने के निर्देश दिए, ताकि हितग्राहियों को आवश्यक वित्तीय सहायता मिल सके और निर्माण कार्य में गति बनी रहे।


बोरा ने बैठक में स्वच्छ भारत मिशन (शहरी) 2.0 के वेस्ट-टू-एनर्जी परियोजना की योजनाओं के लिए चिन्हित क्लस्टरों, उनकी व्यवहार्यता तथा वित्तीय पक्षों का विस्तृत परीक्षण किया। उन्होंने कहा कि वेस्ट-टू-एनर्जी परियोजनाएं ठोस अपशिष्ट के वैज्ञानिक एवं प्रभावी प्रबंधन की दिशा में महत्वपूर्ण पहल हैं। इनके क्रियान्वयन के लिए तकनीकी व्यवहार्यता के साथ-साथ दीर्घकालिक वित्तीय स्थिरता का स्पष्ट आकलन भी आवश्यक है। उन्होंने वेस्ट-टू-एनर्जी परियोजनाओं में राज्य सरकार एवं नगरीय निकायों पर पड़ने वाले संभावित वित्तीय दायित्व का समग्र आकलन करने के निर्देश दिए। उन्होंने भविष्य में इन परियोजनाओं के संचालन एवं अन्य आवश्यकताओं के लिए अपेक्षित वित्तीय संसाधनों का यथार्थपरक अनुमान तैयार करने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि प्रस्तावों को आगे बढ़ाते समय राज्य सरकार पर पड़ने वाले संभावित दीर्घकालिक वित्तीय भार का स्पष्ट आकलन किया जाए, ताकि परियोजनाओं की वित्तीय संरचना व्यवहारिक एवं टिकाऊ हो।


बैठक में पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप (PPP) मॉडल के अंतर्गत निजी क्षेत्र की संभावित सहभागिता पर भी विस्तार से चर्चा की गई। प्रमुख सचिव सोनमणि बोरा ने सक्षम एवं अनुभवी निजी भागीदारों की उपलब्धता, परियोजना में निवेश के प्रति उनकी रुचि तथा उनकी अपेक्षाओं का विस्तृत आकलन करने के निर्देश दिए। उन्होंने राज्य सरकार, नगरीय निकायों एवं निजी क्षेत्र के बीच उत्तरदायित्वों और वित्तीय सहभागिता का संतुलित निर्धारण सुनिश्चित करने पर भी जोर दिया, ताकि परियोजनाओं का क्रियान्वयन व्यावहारिक एवं दीर्घकालिक रूप से टिकाऊ बनाया जा सके। उन्होंने प्रस्ताव को यथाशीघ्र अंतिम रूप देकर आगे की कार्यवाही सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।


15वें वित्त आयोग के कार्यों की बेहतर प्लानिंग और गैप एनालिसिस पर जोर

प्रमुख सचिव बोरा ने बैठक में अधिकारियों को 15वें वित्त आयोग से प्राप्त राशि का उपयोग समुचित एवं दीर्घकालिक योजनाओं के आधार पर करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि नगरीय निकायों में उपलब्ध संसाधनों और स्थानीय आवश्यकताओं का आकलन कर प्राथमिकता के आधार पर कार्यों की योजना तैयार की जाए, जिससे सीमित संसाधनों का अधिकतम प्रभावी उपयोग सुनिश्चित हो सके। उन्होंने विशेष रूप से सड़कों की प्लानिंग पर जोर देते हुए कहा कि सड़क निर्माण एवं उन्नयन के कार्यों को अलग-अलग एवं बिखरे हुए रूप में करने के बजाय शहर की समग्र अधोसंरचना एवं भविष्य की आवश्यकताओं को ध्यान में रखकर योजनाबद्ध तरीके से किया जाए। सड़कों से जुड़े कार्यों के लिए आवश्यकता, यातायात दबाव, कनेक्टिविटी और क्षेत्र की वर्तमान स्थिति का आकलन करते हुए प्राथमिकता तय करने के निर्देश दिए।


प्रमुख सचिव ने नगरीय निकायों में सैचुरेशन आधारित विकास पर भी चर्चा की। उन्होंने कहा कि प्रत्येक क्षेत्र में उपलब्ध मूलभूत सुविधाओं की स्थिति का आकलन कर यह सुनिश्चित किया जाए कि आवश्यक नागरिक सुविधाएं पूर्ण रूप से उपलब्ध हों। इसके लिए उन्होंने गैप एनालिसिस तैयार करने के निर्देश दिए, जिससे सड़क, नाली, पेयजल, प्रकाश व्यवस्था तथा अन्य आवश्यक शहरी अधोसंरचना से संबंधित कमियों को चिन्हित कर प्राथमिकता के आधार पर कार्ययोजना तैयार की जा सके। गैप एनालिसिस के आधार पर कार्यों का चयन होने से विकास कार्य अधिक लक्षित, प्रभावी और परिणामोन्मुख होंगे।

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