छत्तीसगढ़ मंडी बोर्ड में सियासी संग्राम: एमडी की नियुक्ति पर बवाल, पूर्व CM भूपेश बघेल ने मुख्यमंत्री को लिखा पत्र...

पत्रकार अमृतेश्वर सिंह की क़लम से :-
रायपुर। छत्तीसगढ़ राज्य कृषि विपणन (मंडी) बोर्ड के प्रबंध संचालक (MD) महेंद्र सिंह सवन्नी का मामला अब एक बड़े सियासी विवाद में तब्दील हो गया है। संविदा नियुक्ति, पदोन्नति में गड़बड़ी और कथित कमीशनखोरी को लेकर विपक्ष ने राज्य सरकार पर जोरदार हमला बोला है। सूबे के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने इस मामले में सीधे मुख्यमंत्री विष्णु देव साय को पत्र लिखकर एमडी की नियुक्ति को तुरंत प्रभाव से रद्द करने की मांग उठाई है। वहीं, कांग्रेस नेता सुशील सन्नी अग्रवाल ने भी सरकार की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।
नियमों को ताक पर रखकर प्रमोशन का आरोप -
पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने अपने पत्र में खुलासा किया है कि मंडी बोर्ड के कई त्रस्त कर्मचारियों ने उनसे मिलकर अपनी शिकायतें रखी हैं। बघेल का आरोप है कि साल 2005 की विभागीय पदोन्नति समिति (DPC) में 14वें स्थान पर रहने वाले सवन्नी को नियम विरुद्ध तरीके से अपील कर पहले पायदान पर लाया गया। इसके बाद 2005 से 2007 के छोटे से अंतराल में ही उन्हें सहायक संचालक से लेकर अपर संचालक तक चार अहम पदोन्नतियां दे दी गईं, जो पूरी तरह से प्रक्रिया के खिलाफ है।
16 साल से रायपुर में जमे, रिटायरमेंट के बाद 5 बार मिला सेवा विस्तार -
विपक्ष के मुताबिक, संबंधित अधिकारी पिछले 16 वर्षों से राजधानी रायपुर के मुख्यालय में जमे हुए हैं। हद तो तब हो गई जब जून 2024 में सेवानिवृत्त होने के बावजूद उन्हें लगातार पांच बार संविदा विस्तार दे दिया गया। पूर्व सीएम ने मंडी बोर्ड में 45 प्रतिशत कमीशन के खेल का भी जिक्र किया है और इस पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच की मांग की है। कर्मचारियों के प्रताड़ना का आलम यह है कि कर्मचारी महासंघ के पूर्व प्रांत अध्यक्ष डॉ. मलिक राम पोर्ते और अपर संचालक कमलेश इक्का सहित कई लोगों ने राखी थाने में अधिकारी की तानाशाही के खिलाफ मामला तक दर्ज कराया है।
15 दिन में कार्रवाई नहीं हुई तो जंतर-मंतर पर होगा प्रदर्शन -
इस पूरे विवाद में पूर्व श्रम कल्याण बोर्ड के अध्यक्ष और कांग्रेस नेता सुशील सन्नी अग्रवाल ने भी मोर्चा खोल दिया है। उन्होंने कहा कि सामान्य प्रशासन विभाग (GAD) के नियमों की खुलेआम धज्जियां उड़ाई जा रही हैं और बोर्ड के कर्मचारी खौफ के साए में काम करने को मजबूर हैं। अग्रवाल ने चेतावनी दी है कि यदि अगले 15 दिनों के भीतर इस मामले में कोई ठोस दंडात्मक कार्रवाई नहीं की गई, तो वे पीड़ित कर्मचारियों के साथ दिल्ली के जंतर-मंतर पर जाकर धरने पर बैठेंगे।
विपक्ष की प्रमुख मांगें:
मंडी बोर्ड के एमडी महेंद्र सवन्नी की मौजूदा संविदा नियुक्ति को तत्काल प्रभाव से निरस्त किया जाए।
साल 2005 से 2007 के बीच मिली संदिग्ध पदोन्नतियों और 16 साल के लंबे कार्यकाल की निष्पक्ष जांच कराई जाए।






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