google.com, pub-3310156774694367, DIRECT, f08c47fec0942fa0
top of page
WhatsApp Image 2025-09-10 at 15.54_edite
ADN FILMS POSTER

BREAKING ADN NEWS

WhatsApp Image 2026-09-08 at 12.10.10.jpeg
WhatsApp Image 2026-09-08 at 12.06.00.jpeg
WhatsApp Image 2026-09-08 at 12.06.01.jpeg
WhatsApp Image 2026-09-08 at 12.06.01 (1).jpeg
WhatsApp Image 2026-09-08 at 12.06.01 (2).jpeg

पोला तिहार: मिट्टी के खिलौनों और पारंपरिक पकवानों से सजा पर्व.....

50 minutes ago
2 min read

ब्रेकिंग ADN न्यूज़:-

छुईखदान:- छत्तीसगढ़ की समृद्ध संस्कृति और लोक परंपराओं से जुड़े पोला तिहार को लेकर अंचल सहित ग्रामीण इलाकों में उत्साह का माहौल है। कृषि कार्य संपन्न होने के बाद मनाए जाने वाले इस पारंपरिक पर्व को लेकर बाजारों में रौनक बढ़ गई है। छुईखदान के साप्ताहिक बाजार में मिट्टी के पारंपरिक बर्तन और रंग-बिरंगे खिलौनों की दुकानें सज गई हैं, जिन्हें देखने और खरीदने के लिए लोगों की भीड़ पहुंच रही है। त्योहार को देखते हुए स्थानीय कुम्हारों ने मिट्टी के आकर्षक खिलौने बाजार में उतारे हैं।















इस बार मिट्टी के बैल की जोड़ी 30 से 50 रुपये, मिट्टी का पोला यानी जाता 30 से 40 रुपये और पारंपरिक रसोई के खिलौने जैसे चूल्हा, मटका, कढ़ाई और गंजी 5 से 10 रुपये प्रति नग की कीमत में बिक्री के लिए रखे गए हैं। कुम्हारों का कहना है कि इस बार कीमतों में ज्यादा बढ़ोतरी नहीं की गई है, ताकि हर वर्ग के लोग त्योहार के लिए खरीदारी कर सकें।


भादो मास की अमावस्या को मनाया जाने वाला पोला पर्व मूल रूप से कृषि व्यवस्था और गोवंश के प्रति आभार प्रकट करने से जुड़ा है। लोक मान्यताओं के अनुसार, इस समय तक निंदाई-रोपाई जैसे कृषि कार्य पूरे हो जाते हैं और धान की फसल में बालियां आने के साथ अन्न के पकने की प्रक्रिया शुरू होती है। छत्तीसगढ़ जैसे कृषि प्रधान राज्य में खेती-किसानी में बैलों की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। यही वजह है कि पोला के दिन किसान अपने बैलों को सजाकर उनकी पूजा-अर्चना करते हैं। कई स्थानों पर बैल सजाओ प्रतियोगिताएं भी आयोजित की जाती हैं। पोला पर्व बच्चों के लिए भी खास उत्साह लेकर आता है। पूजा के बाद बच्चे मिट्टी के नंदीबैल और छोटे-छोटे पारंपरिक बर्तनों से खेलते हैं। वहीं घरों में ठेठरी, खुरमी, गुड़-चीला और गुलगुल भजिया जैसे पारंपरिक पकवान भी बनाए जाते हैं। मौसम की अनिश्चितता और अनियमित बारिश के बावजूद पोला पर्व को लेकर किसानों और आम लोगों का उत्साह कम नहीं हुआ है। बाजारों की रौनक और बच्चों की खुशी से साफ है कि छत्तीसगढ़ की लोक परंपराओं से जुड़ा यह पर्व आज भी लोगों के जीवन में अपनी खास जगह बनाए हुए है।


Comments


© 2018 by Anis lala dani. Proudly created with breakingadnnews.com

  • Subscribe Channale
bottom of page
naver-site-verification: navere8d42c0359e3e135363406d5b6093c27.html