पटवारियों की बेमियादी हड़ताल जारी, शासन के साथ आर-पार की लड़ाई; कामकाज ठप...

ब्रेकिंग ADN न्यूज़:-
रायपुर: छत्तीसगढ़ में अपनी लंबित मांगों को लेकर अनिश्चितकालीन हड़ताल पर गए पटवारियों और प्रशासन के बीच गतिरोध गहराता जा रहा है। भू-अभिलेख संचालक के साथ हुई उच्चस्तरीय बैठक भी बिना किसी ठोस नतीजे के समाप्त हो गई। इसके बाद राजस्व पटवारी संघ ने अपने आंदोलन को और अधिक आक्रामक तरीके से जारी रखने का ऐलान किया है। संघ का कहना है कि वेतन विसंगतियों को दूर करने, पदोन्नति के पर्याप्त अवसर दिलाने और डिजिटल फसल सर्वे के दौरान आने वाली व्यावहारिक बाधाओं का समाधान किए बिना आंदोलन खत्म नहीं किया जाएगा। इस प्रदेशव्यापी हड़ताल के कारण आम जनता और किसानों के जरूरी राजस्व कार्य पूरी तरह प्रभावित हो रहे हैं।
वार्ता बेनतीजा, गतिरोध बरकरार -
राजस्व पटवारी संघ की समस्याओं के समाधान को लेकर शासन स्तर पर चर्चा का दौर चला, लेकिन भू-अभिलेख संचालक के साथ हुई बैठक किसी भी सकारात्मक निष्कर्ष पर नहीं पहुंच सकी। संघ के पदाधिकारियों का कहना है कि डिजिटल फसल सर्वे से जुड़ी तकनीकी अड़चनों और लंबे समय से अटकी मांगों पर स्पष्ट फैसला न होने से कर्मचारियों में भारी रोष है। लगातार अपनी बात रखने के बाद भी उचित निराकरण न मिलने के कारण अब हड़ताल को आगे बढ़ाने के अलावा कोई और रास्ता नहीं बचा है।
काम या इस्तीफे के दबाव से बढ़ा आक्रोश -
बैठक के दौरान काम जारी रखने या इस्तीफा देने जैसी बातें सामने आने से कर्मचारियों और संघ के बीच नाराजगी और अधिक बढ़ गई है। संघ का स्पष्ट मानना है कि मैदानी स्तर पर काम करने वाले कर्मियों की समस्याओं को प्राथमिकता के आधार पर हल किया जाना चाहिए, न कि बिना समाधान के उन पर काम पर लौटने का दबाव बनाया जाए। जब तक मांगों पर ठोस फैसला नहीं होता, तब तक यह अनिश्चितकालीन हड़ताल जारी रहेगी।
13 अक्टूबर से आंदोलन की शुरुआत -
छत्तीसगढ़ राजस्व पटवारी संघ ने गत 13 अक्टूबर 2026 से पूरे प्रदेश में अनिश्चितकालीन हड़ताल का बिगुल फूंका था। इस आंदोलन का मुख्य कारण पीवी ऐप के जरिए फसलों के भौतिक सत्यापन में आ रही गंभीर तकनीकी और व्यावहारिक परेशानियां हैं। पटवारियों का आरोप है कि ऐप की कमियों को दूर करने के बजाय प्रशासन द्वारा कुछ कर्मचारियों के खिलाफ निलंबन और तबादले जैसी दमनात्मक कार्रवाई की गई, जिसके विरोध में पूरा संघ एकजुट होकर मैदान में उतर आया है।
डिजिटल सर्वे और ऐप की तकनीकी पेचीदगियां -
डिजिटल फसल सर्वे और फसलों के भौतिक सत्यापन में इस्तेमाल होने वाले पीवी ऐप को लेकर मैदानी अमले में लगातार असंतोष बना हुआ है। पटवारियों का कहना है कि ऐप संचालन में भारी तकनीकी बाधाएं आ रही हैं, जिसके बावजूद तय समय सीमा में काम पूरा करने का अनुचित दबाव बनाया जाता है। संघ ने मांग की है कि डिजिटल सर्वे प्रक्रिया को सरल बनाया जाए और फील्ड स्टाफ की दिक्कतों का स्थायी हल निकाला जाए।
वेतन विसंगति और पदोन्नति प्रमुख मुद्दे -
लंबे समय से चली आ रही वेतन विसंगति को दूर करना और पदोन्नति के दायरे को बढ़ाना इस आंदोलन के सबसे पुराने और अहम बिंदु हैं। पूर्व में भी कई बार इन मुद्दों को शासन के समक्ष उठाया गया, लेकिन हर बार सिर्फ कोरे आश्वासन ही मिले। इस बार पटवारी संघ किसी भी अधूरे वादे के झांसे में आने के बजाय जमीनी स्तर पर पक्का समाधान चाहता है।
किसानों और आम नागरिकों की बढ़ी मुश्किलें -
पटवारियों की इस लंबी हड़ताल का सीधा असर आम जनता और किसानों पर पड़ रहा है। भूमि के रिकॉर्ड, फसल सत्यापन और अन्य जरूरी राजस्व प्रमाण पत्रों के लिए लोगों को दफ्तरों के चक्कर काटने पड़ रहे हैं। विशेष रूप से आगामी धान खरीदी की तैयारियों और डिजिटल सर्वे के वक्त कामकाज रुकने से कृषि से जुड़ी योजनाओं के क्रियान्वयन पर संकट के बादल मंडराने लगे हैं। कबीरधाम जिले में अकेले 180 से अधिक पटवारियों के धरने पर बैठने से वहां प्रशासनिक कामकाज पूरी तरह ठप पड़ गया है।
राजस्व मंत्री की अपील बेअसर -
हड़ताल के शुरू होने पर राजस्व मंत्री टंकराम वर्मा ने किसानों के हितों और आगामी धान खरीदी का हवाला देते हुए पटवारियों से काम पर लौटने की अपील की थी। हालांकि, सरकार की इस अपील का मैदानी कर्मचारियों पर कोई असर नहीं दिखा और वे अपनी मांगों पर अडिग बने हुए हैं।
मांगें पूरी नहीं हुईं तो आंदोलन होगा और तेज -
राजस्व पटवारी संघ ने दो टूक शब्दों में चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही सकारात्मक पहल नहीं की गई, तो आंदोलन को और उग्र किया जाएगा। जब तक वेतन, पदोन्नति और ऐप संबंधी समस्याओं का स्थाई समाधान नहीं निकलता, तब तक पटवारी काम पर नहीं लौटेंगे।






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