सुप्रीम कोर्ट की सख्त चेतावनी, स्कूलों में सैनिटरी पैड और शौचालय पर जवाब न देने वाले राज्यों पर गिरेगी गाज...

ब्रेकिंग ADN न्यूज़ :-
देश के शिक्षण संस्थानों में छात्राओं के लिए बुनियादी स्वास्थ्य सुविधाएं सुनिश्चित करने को लेकर सर्वोच्च न्यायालय ने कड़ा रुख अपनाया है। न्यायमूर्ति जे.बी. पारदीवाला और न्यायमूर्ति आर. महादेवन की पीठ ने डॉ. जया ठाकुर बनाम भारत सरकार मामले की सुनवाई करते हुए राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की उदासीनता पर गहरी नाराजगी व्यक्त की है।
अदालत ने स्पष्ट किया है कि मासिक धर्म स्वच्छता का अधिकार संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत जीवन और गरिमा के मौलिक अधिकार का अभिन्न हिस्सा है। यदि जमीनी स्तर पर इसके आदेशों का पालन नहीं हुआ, तो गंभीर परिणाम भुगतने होंगे। मूल फैसले के तहत देश के सभी सरकारी और निजी विद्यालयों में कक्षा छह से बारहवीं तक की छात्राओं के लिए विशेष प्रबंध करने के निर्देश दिए गए थे।
मुख्य बिंदु:-
विद्यालयों में छात्र और छात्राओं के लिए पृथक एवं क्रियाशील शौचालय, जल और साबुन की व्यवस्था।
बालिकाओं को निःशुल्क सैनिटरी नैपकिन का वितरण।
आपातकालीन जरूरतों के लिए प्रत्येक विद्यालय में menstrual hygiene management corner का निर्माण, जिसमें अतिरिक्त वस्त्र और डिस्पोजेबल पैड उपलब्ध हों।
सुनवाई के दौरान अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ने पीठ को अवगत कराया कि केंद्र के प्रयासों के बावजूद किसी भी राज्य या केंद्र शासित प्रदेश ने अब तक अपना पक्ष प्रस्तुत नहीं किया है। इस पर अदालत ने कड़ी चेतावनी देते हुए इसे अंतिम अवसर माना है। आगामी चौदह दिसंबर को दोपहर ढाई बजे होने वाली अगली सुनवाई से पहले यदि अनुपालन रिपोर्ट दाखिल नहीं की जाती है, तो संबंधित प्रदेश के मुख्य सचिव के विरुद्ध अवमानना कार्रवाई शुरू कर दी जाएगी। अदालत ने इस पहल को दूर-दराज के क्षेत्रों की उन बालिकाओं के भविष्य के लिए आवश्यक बताया है जो सुविधाओं के आभाव में अपनी शिक्षा बीच में ही छोड़ देती हैं।
राकेश साहू, जांजगीर चांपा, छत्तीसगढ़।






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