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बाल श्रम कराने वालों पर अब बहुस्तरीय कानूनी कार्रवाई की तैयारी....

Jul 24
3 min read
  • हर मुक्त बच्चे को मिलेगा नया जीवन, बाल श्रम पर बाल आयोग की बड़ी बैठक |

  • बाल श्रम पर जीरो टॉलरेंस, रेस्क्यू के बाद एफआईआर और पुनर्वास दोनों होगा अनिवार्य |

पत्रकार अमृतेश्वर सिंह की कलम से:-

रायपुर, छत्तीसगढ़ राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग की अध्यक्ष डॉ. वर्णिका शर्मा की अध्यक्षता में बाल एवं किशोर श्रम (प्रतिषेध एवं विनियमन) अधिनियम, 1986 के प्रभावी क्रियान्वयन के संबंध में श्रम विभाग के उप श्रम आयुक्त, सहायक श्रम अधिकारियों तथा विपिन ठाकुर, राज्य समन्वयक, एसोसिएशन फॉर वॉलंटरी एक्शन की उपस्थिति में आयोग कार्यालय में समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक में बाल श्रम के मामलों में त्वरित बचाव, प्रभावी विधिक कार्रवाई, विभागीय समन्वय तथा बाल श्रमिकों के समग्र पुनर्वास को लेकर विस्तृत चर्चा की गई। बैठक के दौरान आयोग अध्यक्ष डॉ. वर्णिका शर्मा ने इस बात पर विशेष बल दिया कि रेस्क्यू किए गए प्रत्येक बाल श्रमिक को अनिवार्य रूप से बाल कल्याण समिति के समक्ष प्रस्तुत किया जाए, ताकि किशोर न्याय (बालकों की देखरेख एवं संरक्षण) अधिनियम, 2015 के प्रावधानों के अनुरूप उनके संरक्षण, देखरेख एवं पुनर्वास की विधिक प्रक्रिया सुनिश्चित की जा सके।

समीक्षा के दौरान यह भी सामने आया कि रेस्क्यू किए गए बच्चों को शासन द्वारा प्रदान की जाने वाली आर्थिक सहायता एवं क्षतिपूर्ति की राशि के वितरण में अत्यधिक विलंब और बड़ा अंतराल पाया जा रहा है। इस पर डॉ. वर्णिका शर्मा ने गहरी चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि आर्थिक सहायता में अनावश्यक देरी बच्चों के प्रभावी पुनर्वास में बाधा उत्पन्न करती है। उन्होंने इस प्रक्रिया को समयबद्ध एवं पारदर्शी बनाते हुए पात्र प्रत्येक बाल श्रमिक को शीघ्र आर्थिक सहायता एवं क्षतिपूर्ति उपलब्ध कराने पर विशेष बल दिया। समीक्षा के दौरान यह निर्णय लिया गया कि बाल श्रमिकों के रेस्क्यू के उपरांत कार्रवाई केवल बाल एवं किशोर श्रम (प्रतिषेध एवं विनियमन) अधिनियम, 1986 तक सीमित न रहे, बल्कि प्रकरण की प्रकृति के अनुसार भारतीय न्याय संहिता, किशोर न्याय (बालकों की देखरेख एवं संरक्षण) अधिनियम, 2015, बंधुआ मजदूरी प्रणाली (उन्मूलन) अधिनियम, 1976 तथा अन्य प्रासंगिक विधिक प्रावधानों के अंतर्गत भी तत्काल एफआईआर दर्ज कर प्रभावी अभियोजन सुनिश्चित किया जाए।

साथ ही बाल एवं किशोर श्रम (प्रतिषेध एवं विनियमन) अधिनियम, 1986 की धारा 3 के अंतर्गत बालकों के नियोजन पर पूर्ण प्रतिबंध है तथा धारा 14 एवं धारा 14-बी के तहत दोषी नियोजकों के विरुद्ध कठोर दंडात्मक कार्रवाई एवं मुक्त कराए गए बाल श्रमिकों के पुनर्वास संबंधी प्रावधानों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित किया जाना आवश्यक बताया गया। सभी पात्र बाल श्रमिकों को शासन के नियमानुसार आर्थिक सहायता एवं क्षतिपूर्ति उपलब्ध कराने की प्रक्रिया में तेजी लाने पर भी बल दिया गया। साथ ही प्रत्येक जिले में गठित बाल श्रम टास्क फोर्स तथा बंधुआ मजदूरों के लिए गठित सतर्कता समिति के मध्य प्रभावी समन्वय स्थापित कर संयुक्त कार्रवाई सुनिश्चित करने पर सहमति व्यक्त की गई। बैठक में गृह विभाग, स्कूल शिक्षा विभाग, कौशल विकास विभाग तथा महिला एवं बाल विकास विभाग की भूमिका को और अधिक प्रभावी बनाने पर भी विस्तार से चर्चा हुई।

इस दौरान इस बात पर विशेष बल दिया गया कि बाल श्रमिकों का पुनर्वास केवल कानूनी कार्रवाई तक सीमित न रहकर उन्हें शिक्षा, कौशल विकास, सामाजिक सुरक्षा तथा सम्मानजनक जीवन से जोड़ने की समग्र प्रक्रिया के रूप में सुनिश्चित किया जाए। इसके अतिरिक्त प्रत्येक जिले में पदस्थ श्रम अधिकारियों एवं श्रम निरीक्षकों के लिए बाल श्रमिकों के बचाव, विधिक कार्रवाई एवं पुनर्वास संबंधी दायित्वों पर विशेष प्रशिक्षण एवं समीक्षा बैठकें आयोजित करने तथा उनकी अनुपालन रिपोर्ट आयोग को उपलब्ध कराने पर भी सहमति बनी। बैठक के अंत में डॉ. वर्णिका शर्मा ने कहा कि छत्तीसगढ़ राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग बाल श्रम के प्रति शून्य सहिष्णुता की नीति के साथ कार्य कर रहा है। किसी भी बच्चे का बचपन श्रम की भेंट नहीं चढ़ने दिया जाएगा। बाल श्रम कराने वाले प्रत्येक दोषी के विरुद्ध कानून के अनुरूप कठोर कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी तथा प्रत्येक मुक्त कराए गए बच्चे के सुरक्षित, शिक्षित एवं सम्मानजनक भविष्य के लिए सभी संबंधित विभागों को समन्वित, संवेदनशील एवं उत्तरदायी दृष्टिकोण के साथ कार्य करना होगा।


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