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धान खरीदी की तिथि घोषित नहीं करना सरकार की बदनीयती - भूपेश बघेल....

58 minutes ago
5 min read

पत्रकार अमृतेश्वर सिंह की क़लम से:-

रायपुर। पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने अपने निवास पर पत्रकार वार्ता को संबोधित करते हुए धान खरीदी, पटवारियों की हड़ताल, महतारी वंदन योजना में महिलाओं से वसूली, पीएससी परीक्षा की गड़बड़ी और बीटीआई ग्राउंड के मुद्दे पर साय सरकार को आड़े हाथों लिया। उन्होंने कहा कि सरकार नहीं चाहती कि किसान, गरीब और मजदूर ठीक से दीपावली मना सकें, इसीलिए अभी तक धान खरीदी की तिथि की घोषणा नहीं की गई है। प्रधानमंत्री मोदी ने अपने जन्मदिन पर तो खूब तड़के/तेल जलवा दिया, लेकिन अब गरीबों के घरों में दीपावली का दीया भी नहीं जलने देना चाहते। किसान जब धान बेचेगा, तभी उसके घर में असली दीपावली मनेगी। भाजपा सरकार के बनने से पहले तक राज्य स्थापना दिवस यानी 1 नवंबर या दीपावली के आसपास धान खरीदी शुरू हो जाती थी, ताकि किसान त्यौहार मना सकें। लेकिन आज स्थिति यह है कि सरकार तारीख को लेकर कोई निर्णय नहीं ले पाई है, और न ही खरीदी केंद्रों पर बारदाने या अन्य जमीनी स्तर की कोई तैयारी दिख रही है।


हमारी मांग है कि दीपावली से पहले धान खरीदी शुरू की जाए। यदि ऐसा संभव नहीं है, तो किसानों को अग्रिम भुगतान किया जाए। इस वर्ष धान का समर्थन मूल्य 3358 रुपये प्रति क्विंटल किया जाए। पिछले दो वर्षों में समर्थन मूल्य 258 रुपये बढ़ा है—वर्ष 2024-25 में 117 रुपये, वर्ष 2025-26 में 69 रुपये और वर्ष 2026-27 में 72 रुपये की वृद्धि हुई है। भाजपा का वादा 3100 रुपये प्रति क्विंटल का था, इसलिए इसमें 258 रुपये जोड़कर किसानों को 3358 रुपये का भुगतान किया जाए। उन्होंने आगे कहा कि सरकार पिछले साल का चावल अभी तक एफसीआई (FCI) में जमा नहीं कर पाई है। सरकारी डीपीआर वेबसाइट के 25 सितंबर के आंकड़ों के अनुसार, इस वर्ष कुल चावल जमा करने का लक्ष्य 89 लाख टन है, जिसमें से अब तक मात्र 37.50 लाख टन चावल ही जमा हुआ है। अभी भी 51.50 लाख टन चावल राइस मिलरों द्वारा सरकार के पास जमा किया जाना बाकी है। विभिन्न मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, अभी तक 14.79 मीट्रिक टन धान का संग्रहण केंद्रों से उठाव नहीं हुआ है। न तो मिलरों के पास जगह है और न ही संग्रहण केंद्र खाली हैं, यही वजह है कि सरकार जानबूझकर धान खरीदी में देरी करना चाहती है।


पटवारियों की हड़ताल से किसान परेशान

पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि धान खरीदी के लिए पंजीयन की अंतिम तिथि 31 अक्टूबर निर्धारित है, लेकिन पटवारियों की हड़ताल के चलते समय पर सभी किसानों का पंजीयन कैसे हो पाएगा? पंजीयन का कार्य चल रहा है, लेकिन फौती काटना बंद होने और राजस्व रिकॉर्ड दुरुस्त न होने से किसान तहसील कार्यालयों के चक्कर काटने को मजबूर हैं। पटवारी प्रतिवेदन के बिना तहसीलदार और एसडीएम कार्यालयों में राजस्व प्रकरण लंबित हो गए हैं। धारा 115 के तहत लाखों प्रकरण पहले से ही शीर्ष कार्यालयों में लंबित हैं और अब नए प्रतिवेदन भी नहीं पहुंच पा रहे हैं। फौती, नामांतरण, बंटवारा और त्रुटि सुधार के लिए किसानों को भारी भटकना पड़ रहा है। यदि रिकॉर्ड समय पर दुरुस्त नहीं हुए, तो हजारों किसानों को धान बेचने से वंचित होना पड़ सकता है। पटवारी राजस्व विभाग द्वारा थोपे गए नए 'फिजिकल वेरिफिकेशन ऐप' (PV App) का विरोध कर रहे हैं। इस ऐप के जरिए डिजिटल सर्वे और जीपीएस फोटो अपलोड करना अनिवार्य किया गया है, लेकिन ऐप में लगातार तकनीकी खामियां आ रही हैं। सर्वर डाउन रहना, लोकेशन मैच न होना और खेत में खड़ी फसल के भौतिक सत्यापन में आ रही व्यावहारिक दिक्कतों से पटवारी परेशान हैं। पटवारी संघ पहले ही सरकार को इन समस्याओं से अवगत करा चुका था, लेकिन सरकार ने गंभीरता नहीं दिखाई, जिसके चलते उन्हें मजबूरन हड़ताल का रास्ता चुनना पड़ा। उनका यह विरोध पूरी तरह जायज है। सरकार को पटवारियों की हड़ताल का जल्द समाधान निकालना चाहिए ताकि धान खरीदी पर इसका विपरीत प्रभाव न पड़े।


महतारी वंदन योजना में महिलाओं से वसूली अनुचित

भूपेश बघेल ने कहा कि महतारी वंदन योजना का लाभ ले रही महिलाओं को अपात्र बताकर अब तक दी गई राशि की वसूली करना महिलाओं के साथ सरासर अन्याय है। विधानसभा चुनाव के समय तो मुख्यमंत्री की पत्नी तक को इस योजना का लाभ देने की बात कही गई थी। 'मोदी की गारंटी' में वादा किया गया था कि हर विवाहित महिला को महतारी वंदन का लाभ मिलेगा, लेकिन सरकार बनने के बाद सरकारी नौकरी और इनकम टैक्स का बंधन लगा दिया गया और अब नया फरमान जारी कर दिया गया है। भारतीय जनता पार्टी की सरकार को महतारी वंदन के नाम पर महिलाओं पर एहसान जताना बंद करना चाहिए। एक तरफ योजना के तहत 1000 रुपये दिए जा रहे हैं, तो दूसरी तरफ पांच चरणों में बिजली बिल 33 प्रतिशत बढ़ाकर 4000 रुपये महीना वसूले जा रहे हैं। भाजपा के मंत्री खुद यह बयान देते हैं कि शराब बेचकर महतारी वंदन का पैसा दिया जा रहा है—यानी सरकार महतारी वंदन के नाम पर 1000 रुपये देकर माताओं-बहनों के पतियों, भाइयों और बच्चों को शराबी बनाना चाहती है। शराबी बनाने की कीमत पर महिलाओं को यह 1000 रुपये नहीं चाहिए। पहले 70 लाख महिलाओं को राशि दी जाती थी, लेकिन अब घटकर लगभग 68 लाख महिलाओं को ही मिल रही है। सरकार की नीयत में खोट साफ नजर आ रहा है।


मुख्य परीक्षा 2025 की कॉपियां अभ्यर्थियों को दे आयोग

पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ पीएससी (PSC) 2025 की मुख्य परीक्षा में बैठे अभ्यर्थी अपनी उत्तर पुस्तिकाओं के अवलोकन की मांग कर रहे हैं। अभ्यर्थियों का कहना है कि उनके मूल्यांकन में गड़बड़ी हुई है और उन्हें न्यूनतम अंक भी मिलने चाहिए थे। इस वर्ष इंटरव्यू (साक्षात्कार) में भी पर्याप्त संख्या में अभ्यर्थी नहीं पहुंच पा रहे हैं। ऐसे में, अपनी विश्वसनीयता बनाए रखने के लिए आयोग को छात्रों को उत्तर पुस्तिकाएं उपलब्ध करा देनी चाहिए ताकि अभ्यर्थियों का भरोसा और आयोग की प्रतिष्ठा दोनों बरकरार रहें। आयोग ने 2025 की मुख्य परीक्षा में 265 पदों के विरुद्ध 795 अभ्यर्थियों को इंटरव्यू के लिए चयनित करने के बजाय केवल 608 अभ्यर्थियों को ही योग्य माना है। साक्षात्कार के लिए 187 अभ्यर्थी कम पहुंचे हैं, जो 1:3 के नियम के विरुद्ध है। पीएससी का तर्क है कि 187 अभ्यर्थी न्यूनतम अंक (66 और 46) प्राप्त नहीं कर सके। कांग्रेस का स्पष्ट मत है कि भर्ती प्रक्रिया की विश्वसनीयता केवल परीक्षा आयोजित कराने से नहीं, बल्कि हर चरण में पारदर्शिता बरतने से सुनिश्चित होती है। उन्होंने आयोग में अब तक अध्यक्ष की नियुक्ति न होने पर भी गहरी चिंता जताई।


बीटीआई ग्राउंड में कमर्शियल-रेसिडेंशियल प्रोजेक्ट गलत

भूपेश बघेल ने कहा कि भाजपा सरकार राजधानी रायपुर के ऐतिहासिक बीटीआई ग्राउंड में कमर्शियल और रेसिडेंशियल प्रोजेक्ट बनाने जा रही है। राजधानी में वैसे ही गिने-चुने मैदान बचे हैं, और अब सरकार उन्हें भी बेचने पर उतारू है। बीटीआई ग्राउंड शहर के मध्य एकमात्र खुला मैदान है, जहां राजधानी के लोग सुबह-शाम सैर करने आते हैं और विभिन्न सामाजिक व सांस्कृतिक आयोजन होते हैं। वहां कमर्शियल और रेसिडेंशियल प्रोजेक्ट बनाना पूरी तरह गलत है। आज राजधानी में खुले मैदानों की सबसे ज्यादा जरूरत है, ऐसे में सरकार को बिल्डर की भूमिका निभाने के बजाय अपने सामाजिक सरोकारों को निभाना चाहिए। रायपुर में खेल मैदानों की पहले से ही भारी कमी है। पूर्ववर्ती भाजपा सरकारों ने साइंस कॉलेज मैदान, सप्रे स्कूल, आरडी तिवारी स्कूल और मोवा स्कूल जैसे सरकारी स्कूलों के मैदानों में दुकानें और निर्माण करवाकर उन्हें पहले ही खत्म कर दिया है। अब एकमात्र बचे बीटीआई ग्राउंड को भी समाप्त किया जाना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण और गलत है।

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