बस्तर दशहरा में आधी रात संपन्न हुई निशा जात्रा की रस्म...

ब्रेकिंग ADN न्यूज़ :-
जगदलपुर :- विश्व प्रसिद्ध बस्तर दशहरा की महत्वपूर्ण धार्मिक परंपराओं में शामिल निशा जात्रा का विधान 19 अक्टूबर की आधी रात को संपन्न हुआ। जगदलपुर के अनुपमा चौक स्थित निशा जात्रा गुड़ी में देवी-देवताओं की विशेष पूजा-अर्चना की गई। इस दौरान बस्तर राजपरिवार के सदस्य कमलचंद भंजदेव, दंतेश्वरी मंदिर के प्रधान पुजारी, मांझी-चालकी और बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे। दीपों की रोशनी में निभाई गई परंपरा निशा जात्रा के दौरान पारंपरिक वाद्ययंत्रों की गूंज, दीपों की रोशनी और आतिशबाजी के बीच धार्मिक अनुष्ठान किए गए। राजपरिवार के सदस्यों ने मंदिर पहुंचकर देवी-देवताओं की पूजा की और बस्तर सहित पूरे देश की सुख-शांति और समृद्धि की कामना की।
परंपरा के अनुसार, सबसे पहले भैरव देव की पूजा की गई। इसके बाद मंदिर परिसर में 12 बकरों की बलि देने का धार्मिक विधान संपन्न हुआ। मावली मंदिर, सिंहद्वार और काली मंदिर में भी विशेष पूजा-अर्चना की गई। दंतेश्वरी मंदिर में काले कबूतर और सात मोंगरी मछलियों का भोग अर्पित किया गया। वहीं श्रीराम मंदिर में उड़द दाल का भोग और रखिया कुम्हड़ा की प्रतीकात्मक बलि दी गई।
निशा जात्रा की विशेष बात यह रही कि 12 गांवों के राउत ग्रामीण 12 कांवड़ों में 24 मिट्टी के मटके लेकर पहुंचे। सिंगनपुर, राजूर, छिटकागुड़ा, एरंडवाल, मुसलीगुड़ा, उडुवा, नैनपुर, रायकोट, आरापुर, चालकीगुड़ा, चोकर और धर्माउर गांवों के राउतों ने पारंपरिक भोग-प्रसाद तैयार करने की जिम्मेदारी निभाई।
अब मावली परघाव की होगी रस्म निशा जात्रा संपन्न होने के बाद बस्तर दशहरा की अगली प्रमुख रस्म मावली परघाव की तैयारी शुरू होगी। इस परंपरा में माता की डोली और छत्र का विधि-विधान से स्वागत किया जाता है। बस्तर दशहरा की इन परंपराओं में स्थानीय देवी-देवताओं, राजपरिवार, पुजारियों और ग्रामीण समुदायों की महत्वपूर्ण भागीदारी रहती है।






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