छत्तीसगढ़ के सारंगढ़-बिलाईगढ़ में 'नौनिहाल छात्रवृत्ति' बनी वरदान, श्रमिक परिवार की बेटी की पढ़ाई को मिली नई उड़ान.....

ब्रेकिंग ADN न्यूज़ :-
रायपुर: जब सरकारी कल्याणकारी योजनाएं सही वक्त पर जरूरतमंदों तक पहुंचती हैं, तो वे सिर्फ कागजी मदद नहीं रहतीं, बल्कि किसी के सपनों को साकार करने की मजबूत सीढ़ी बन जाती हैं। छत्तीसगढ़ के सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिले के अंतर्गत आने वाले ग्राम झुमका (विकासखंड बिलाईगढ़) से एक ऐसी ही प्रेरक और उम्मीद जगाने वाली दास्तान सामने आई है, जहां 'नौनिहाल छात्रवृत्ति योजना' ने एक साधारण श्रमिक परिवार की बेटी की शिक्षा की राह को आसान बना दिया है।
तंगी के बावजूद बुनी गई सपनों की उड़ान -
ग्राम झुमका निवासी फुलेश्वरी साहू अपने सीमित आर्थिक संसाधनों के बीच भी अपने बच्चों को उच्च शिक्षा दिलाकर उनके भविष्य को संवारना चाहती थीं। हालांकि, घर की आर्थिक स्थिति अक्सर बच्चों की पढ़ाई से जुड़ी छोटी-छोटी जरूरतों को पूरा करने में रुकावट बन जाती थी। ऐसे कठिन समय में छत्तीसगढ़ भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार कल्याण मंडल द्वारा संचालित यह योजना मददगार साबित हुई।
योजना ने ऐसे थामा हाथ -
इस कल्याणकारी पहल के तहत पात्र पंजीकृत श्रमिक परिवार की श्रेणी में आने के कारण फुलेश्वरी साहू की बेटी के बैंक खाते में 3,000 रुपये की छात्रवृत्ति राशि अंतरित की गई। इस वित्तीय सहायता से कॉपियां, पाठ्यपुस्तकें और अन्य शिक्षण सामग्रियां खरीदने में बड़ी आसानी हुई।
लाभार्थी फुलेश्वरी साहू बताती हैं, "सरकार की तरफ से मिली यह तीन हजार रुपये की सहायता हमारे लिए बहुत बड़ा संबल है। इससे हमारा यह भरोसा मजबूत हुआ है कि गरीबी हमारी बेटी की राह का रोड़ा नहीं बनेगी। वह बिना किसी बाधा के अपनी पढ़ाई पूरी कर सकेगी। इस सकारात्मक सहयोग के लिए हम पूरी तरह कृतज्ञ हैं।"
धरातल पर सार्थक हो रहे प्रयास -
जिला प्रशासन की मुस्तैदी से यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि शासन की जनहितैषी योजनाओं का लाभ बिना किसी अड़चन के अंतिम छोर पर बैठे व्यक्ति तक पहुंचे। संबंधित विभागों द्वारा पात्र परिवारों की सुगम पहचान कर उन्हें जोड़ा जा रहा है, जिससे शिक्षा के मार्ग में कोई भी बच्चा पीछे न छूटे। आज यह योजना अनगिनत परिवारों के बच्चों के भविष्य को संवारने का मुख्य जरिया बन रही है।






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