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मुकेश खन्ना का विवादित बयान: ‘जन गण मन’ हटाओ, ‘वंदे मातरम’ को बनाओ राष्ट्रगान!....

Aug 18
3 min read

ब्रेकिंग ADN न्यूज़ :-

नई दिल्ली। लोकप्रिय अभिनेता और ‘शक्तिमान’ फेम मुकेश खन्ना ने भारत के राष्ट्रगान को लेकर एक बड़ा बयान दिया है। उन्होंने मांग की है कि वर्तमान राष्ट्रगान ‘जन गण मन’ की जगह ‘वंदे मातरम’ को भारत का राष्ट्रगान बनाया जाना चाहिए। उनके इस बयान के बाद सोशल मीडिया और राजनीतिक गलियारों में बहस तेज हो गई है। मुकेश खन्ना ने यह बयान स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों की याद में बनाए गए देशभक्ति गीत ‘आओ बच्चों’ के रिलीज के दौरान दिए गए एक इंटरव्यू में दिया। बातचीत के दौरान उन्होंने राष्ट्रगान और राष्ट्रीय गीत को लेकर अपनी राय रखी और कहा कि ‘वंदे मातरम’ भारत की भावना और स्वतंत्रता आंदोलन से ज्यादा गहराई से जुड़ा हुआ है।


‘जन गण मन’ को लेकर अपनी बात रखते हुए मुकेश खन्ना ने कहा कि उनके अनुसार यह भारत का वास्तविक राष्ट्रगान नहीं है। उन्होंने दावा किया कि इसे रवींद्रनाथ टैगोर ने ब्रिटेन की महारानी एलिजाबेथ की प्रशंसा में लिखा था। हालांकि, उनके इस दावे को लेकर इतिहासकारों और विशेषज्ञों के बीच अलग-अलग राय रही है। मुकेश खन्ना ने कहा कि देश ने ‘जन गण मन’ को स्वीकार किया है और इसका सम्मान भी किया जाता है, लेकिन उनकी नजर में ‘वंदे मातरम’ को राष्ट्रगान का दर्जा मिलना चाहिए। उन्होंने कहा कि यह गीत भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान लोगों में देशभक्ति और एकजुटता की भावना पैदा करने वाला प्रमुख गीत रहा है।


उन्होंने प्रसिद्ध गायिका लता मंगेशकर का भी जिक्र किया और कहा कि उन्होंने ‘वंदे मातरम’ को बेहद शानदार तरीके से प्रस्तुत किया था। मुकेश खन्ना के अनुसार, यह गीत भारत की संस्कृति, इतिहास और राष्ट्र भावना को दर्शाता है। मुकेश खन्ना के इस बयान के बाद सोशल मीडिया पर लोगों की अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आईं। कुछ लोगों ने उनके विचारों का समर्थन करते हुए कहा कि ‘वंदे मातरम’ का स्वतंत्रता आंदोलन में विशेष महत्व रहा है। वहीं, कई लोगों ने राष्ट्रगान बदलने की मांग को लेकर सवाल भी उठाए।


भारत का वर्तमान राष्ट्रगान ‘जन गण मन’ है, जिसे संविधान सभा ने 24 जनवरी 1950 को आधिकारिक रूप से अपनाया था। इसे रवींद्रनाथ टैगोर ने लिखा था। यह गीत भारत की विविधता, एकता और राष्ट्रीय भावना को दर्शाने वाला माना जाता है। वहीं, ‘वंदे मातरम’ की भी भारतीय इतिहास में महत्वपूर्ण भूमिका रही है। इसे बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय ने लिखा था और स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान यह देशभक्ति का प्रमुख प्रतीक बन गया था। वर्तमान में इसे भारत का राष्ट्रीय गीत माना जाता है।


इतिहासकारों के अनुसार, ‘जन गण मन’ और ‘वंदे मातरम’ दोनों का अपना अलग ऐतिहासिक महत्व है। एक ओर ‘जन गण मन’ संवैधानिक रूप से राष्ट्रगान है, वहीं ‘वंदे मातरम’ स्वतंत्रता आंदोलन की भावना और राष्ट्रीय चेतना से जुड़ा हुआ है। मुकेश खन्ना का बयान ऐसे समय में आया है जब देश में राष्ट्र, संस्कृति और देशभक्ति से जुड़े मुद्दों पर लगातार चर्चा होती रहती है। इससे पहले भी कई बार ‘वंदे मातरम’ को राष्ट्रगान बनाने की मांग उठ चुकी है, लेकिन आधिकारिक स्तर पर इसमें कोई बदलाव नहीं किया गया है। विशेषज्ञों का कहना है कि राष्ट्रगान में बदलाव केवल भावनात्मक अपील के आधार पर नहीं किया जा सकता। इसके लिए संवैधानिक प्रक्रिया और सरकार तथा संसद स्तर पर निर्णय की आवश्यकता होती है। मुकेश खन्ना अपने बेबाक बयानों के लिए जाने जाते हैं। वह समय-समय पर सामाजिक और राष्ट्रीय मुद्दों पर अपनी राय रखते रहे हैं। उनके इस बयान ने एक बार फिर राष्ट्रगान और राष्ट्रीय पहचान को लेकर चर्चा शुरू कर दी है। फिलहाल उनके बयान के बाद ‘जन गण मन’ और ‘वंदे मातरम’ को लेकर बहस जारी है। जहां एक पक्ष ‘वंदे मातरम’ को देशभक्ति का मजबूत प्रतीक मानता है, वहीं दूसरा पक्ष वर्तमान राष्ट्रगान की संवैधानिक और ऐतिहासिक स्थिति को महत्वपूर्ण बताता है।

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