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केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान और गजेंद्र सिंह शेखावत से मिले सांसद बृजमोहन अग्रवाल....

Aug 13
2 min read
  • छत्तीसगढ़ के धान को मिलेगी वैल्यू एडिशन की नई पहचान, भाटापारा के पोहा को देश-विदेश के बाजार तक पहुंचाने की पहल.....

पत्रकार अमृतेश्वर सिंह की क़लम से -

नई दिल्ली/रायपुर छत्तीसगढ़ के धान उत्पादन को आधुनिक खाद्य प्रसंस्करण उद्योग से जोड़कर किसानों की आय बढ़ाने और प्रदेश में बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर सृजित करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल की गई है।

लोकसभा सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने बुधवार को केंद्रीय खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्री चिराग पासवान से मुलाकात कर छत्तीसगढ़ में चावल आधारित खाद्य प्रसंस्करण उद्योगों के विकास का विषय प्रमुखता से उठाया। अग्रवाल ने कहा कि छत्तीसगढ़ देश के प्रमुख धान उत्पादक राज्यों में शामिल है। प्रदेश में धान की प्रचुर उपलब्धता के बावजूद इसका बड़ा हिस्सा प्राथमिक स्तर पर ही प्रसंस्कृत होता है। आवश्यकता इस बात की है कि धान को केवल चावल के रूप में बेचने के बजाय उससे तैयार होने वाले उच्च मूल्य वाले खाद्य उत्पादों की पूरी प्रोसेसिंग चेन छत्तीसगढ़ में विकसित की जाए।

उन्होंने विशेष रूप से भाटापारा के पोहा उद्योग का उल्लेख किया। भाटापारा का पोहा अपनी गुणवत्ता और पहचान के कारण देश के विभिन्न हिस्सों में पहुंचता है। यदि इसी क्षमता को आधुनिक तकनीक, पैकेजिंग, ब्रांडिंग और मार्केटिंग से जोड़ा जाए, तो भाटापारा को Rice-Based Food Processing Hub के रूप में विकसित किया जा सकता है।

अग्रवाल ने कहा कि छत्तीसगढ़ में पोहा, मुरमुरा, राइस-बेस्ड स्नैक्स, रेडी-टू-ईट उत्पाद, राइस फ्लोर तथा अन्य चावल आधारित खाद्य उत्पादों के लिए आधुनिक प्रोसेसिंग यूनिट स्थापित किए जाने की व्यापक संभावनाएं हैं। इससे किसानों को स्थानीय स्तर पर बेहतर बाजार मिलेगा और युवाओं के लिए रोजगार एवं उद्यमिता के नए अवसर पैदा होंगे।


केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने इस प्रस्ताव पर सकारात्मक रुख अपनाते हुए छत्तीसगढ़ में चावल आधारित फूड प्रोसेसिंग उद्योगों की संभावनाओं को लेकर एक विस्तृत परियोजना तैयार कर प्रस्तुत करने को कहा।


अग्रवाल ने कहा कि इस संबंध में एक समग्र परियोजना प्रस्ताव तैयार कर केंद्र सरकार के समक्ष प्रस्तुत किया जाएगा। प्रस्ताव में स्थानीय कृषि उत्पादन, किसानों को बाजार से जोड़ने, आधुनिक प्रसंस्करण, पैकेजिंग, ब्रांडिंग, रोजगार सृजन और देश-विदेश के बाजार तक उत्पाद पहुंचाने की संभावनाओं को शामिल किया जाएगा।


उन्होंने कहा कि “छत्तीसगढ़ का धान केवल प्रदेश की पहचान नहीं, बल्कि प्रदेश की आर्थिक ताकत बन सकता है। हमारा प्रयास है कि खेत में पैदा होने वाले धान की अधिकतम वैल्यू एडिशन छत्तीसगढ़ में ही हो, ताकि किसान, उद्यमी और युवा—तीनों को इसका लाभ मिले।”


भाटापारा के पोहा से लेकर छत्तीसगढ़ के चावल आधारित उत्पादों तक—स्थानीय उत्पादन को राष्ट्रीय और वैश्विक बाजार से जोड़ने की यह पहल प्रदेश में फूड प्रोसेसिंग सेक्टर के लिए एक नई दिशा तय कर सकती है। सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने केंद्रीय संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत से भेंट कर उन्हें छत्तीसगढ़ में आयोजित होने वाले स्वदेशी मेले का निमंत्रण दिया।

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