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विधायक डॉ. संपत अग्रवाल ने मां काली शक्तिपीठ गिधली में की पूजा-अर्चना, हरेली पर क्षेत्र की सुख-समृद्धि की मांगी मन्नत.....

Aug 13
3 min read
  • हरेली अमावस्या पर ग्राम गिधली में विधायक डॉ. संपत अग्रवाल ने रचा भक्ति का वातावरण,बोले-माटी, प्रकृति और आस्था का संगम है हरेली तिहार...

  • हरेली छत्तीसगढ़ का पहला और लोक-संस्कृति की आत्मा का पर्व है : विधायक डॉ. संपत अग्रवाल...

  • बसना विधानसभा के ग्राम गिधली स्थित मां काली शक्तिपीठ में विधायक डॉ. संपत अग्रवाल ने की विषेश पूजा-अर्चना, छत्तीसगढ़ी संस्कृति और कृषि परंपरा के संवर्धन पर दिया जोर...

पत्रकार अमृतेश्वर सिंह की क़लम से -

बसना/गिधली छत्तीसगढ़ की माटी, लोक-संस्कृति और प्राकृतिक सौंदर्य के अप्रतिम लोक-पर्व 'हरेली तिहार' के पावन अवसर पर बसना विधानसभा क्षेत्र भक्ति और उत्साह के वातावरण में सराबोर नजर आया। इस पावन तिहार के शुभ अवसर पर क्षेत्रीय विधायक डॉ. संपत अग्रवाल ने बसना विधानसभा क्षेत्र के ग्राम गिधली स्थित ऐतिहासिक एवं जन-आस्था के केंद्र 'मां काली शक्ति पीठ' में उपस्थित होकर हरेली अमावस्या के शुभ मुहूर्त पर माता रानी के दर्शन एवं विशेष पूजा-अर्चना की। उन्होंने मातारानी के चरणों में शीश नवाकर समस्त बसना क्षेत्र एवं छत्तीसगढ़ प्रदेश की सुख, शांति, समृद्धि और खुशहाली की कामना की।

मां काली के भव्य दरबार में वैदिक मंत्रोच्चार और मां भगवती के जयकारों के बीच विधायक डॉ. संपत अग्रवाल ने विधिवत जल, अक्षत, पुष्प और फल-नैवेद्य अर्पित किए। पूजा-अर्चना के पश्चात उपस्थित जनसमूह को संबोधित करते हुए विधायक डॉ. संपत अग्रवाल ने कहा कि छत्तीसगढ़ की धरा सनातन संस्कृति, प्रकृति पूजन और लोक-परंपराओं की अनुपम भूमि है। हरेली केवल एक पर्व नहीं, बल्कि हमारी माटी से जुड़ाव, कृषि संस्कृति के प्रति कृतज्ञता और प्रकृति के साथ तादात्म्य स्थापित करने का एक जीवंत माध्यम है। मां काली शक्तिपीठ में हरेली अमावस्या के दिन पूजा-अर्चना करने का सौभाग्य मिलना अत्यंत फलदायी है। माता रानी की कृपा से हमारे क्षेत्र का हर किसान समृद्ध हो, हर घर में खुशहाली आए और प्राकृतिक आपदाओं से हमारे क्षेत्र की रक्षा हो, यही मेरी माता रानी के चरणों में प्रार्थना है।

अपने संबोधन को विस्तार देते हुए विधायक डॉ. संपत अग्रवाल ने आगे कहा कि हरेली तिहार छत्तीसगढ़ के लोक-जीवन का पहला और सबसे महत्वपूर्ण त्यौहार माना जाता है। यह पर्व हमारी कृषि परंपरा और प्रकृति के प्रति अगाध श्रद्धा का प्रतीक है। आषाढ़ मास की कृषि गतिविधियों की पूर्णता के पश्चात जब संपूर्ण धरा हरी-भरी चादर ओढ़ लेती है, तब हमारे किसान भाई अपने नागर, गैंती, कुदाली और हल जैसे कृषि उपकरणों की सफाई कर उनकी पूजा-अर्चना करते हैं। यह त्यौहार हमें सिखाता है कि जो साधन हमें आजीविका देते हैं, उनका सम्मान करना हमारी संस्कृति का मूल संस्कार है।


विधायक डॉ. संपत अग्रवाल ने पौराणिक एवं सांस्कृतिक संदर्भों का उल्लेख करते हुए कहा कि छत्तीसगढ़िया संस्कृति में हरेली का दिन आध्यात्मिक दृष्टि से भी विशेष महत्व रखता है। इस दिन जहां एक ओर आरोग्य और समृद्धि के लिए औषधीय जड़ी-बूटियों एवं नीम की पत्तियों का प्रयोग किया जाता है, वहीं दूसरी ओर नकारात्मक ऊर्जा के शमन और सकारात्मक ऊर्जा के प्रवाह हेतु कुलदेवी एवं इष्टदेवों का ध्यान किया जाता है। गिधली की मां काली शक्तिपीठ जैसी पावन स्थली पर आज के दिन पूजा करने से जन-जन में नव-ऊर्जा का संचार होता है।


कार्यक्रम के दौरान स्थानीय ग्रामीणों, किसान भाइयों एवं शक्तिपीठ के मुख्य पूजकों ने विधायक डॉ. संपत अग्रवाल का आत्मीय स्वागत किया। विधायक ने भी सभी उपस्थित जन-साधारण और किसान भाइयों को हरेली तिहार की बधाई दी तथा युवाओं से अपनी समृद्ध लोक-संस्कृति और लोक-खेलों (जैसे गेड़ी दौड़) को जीवंत रखने का आह्वान किया। इस अवसर पर बड़ी संख्या में जनप्रतिनिधि, गणमान्य नागरिक और श्रद्धालुजन उपस्थित रहे।

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