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नैनो-डीएपी से टिकाऊ खेती की ओर स्थानीय किसान का कदम...

Jul 22
3 min read

ब्रेकिंग ADN न्यूज़ :-

रायपुर :- कृषि विभाग द्वारा आधुनिक एवं टिकाऊ कृषि को बढ़ावा देने के उद्देश्य से किसानों को वैज्ञानिक खेती, संतुलित उर्वरक प्रबंधन तथा आधुनिक कृषि तकनीकों को अपनाने के लिए लगातार प्रेरित किया जा रहा है। इसी प्रयास के तहत इफको नैनो डीएपी किसानों के बीच एक प्रभावी एवं नवाचारपूर्ण विकल्प के रूप में तेजी से लोकप्रिय हो रहा है। मनेन्द्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर जिले के जनकपुर क्षेत्र के ग्राम खिरकी निवासी किसान रघुवीर यादव इसकी एक प्रेरणादायक मिसाल हैं, जिन्होंने पारंपरिक उर्वरकों के साथ नैनो डीएपी का उपयोग कर खेती में बेहतर परिणाम प्राप्त किए हैं और अन्य किसानों के लिए प्रेरणा बने हैं।


रघुवीर यादव वर्षों से खेती-किसानी से जुड़े हुए हैं। उनका कहना है कि हर कृषि सीजन में रासायनिक उर्वरकों की बढ़ती कीमत, समय पर पर्याप्त मात्रा में खाद की उपलब्धता तथा बढ़ती उत्पादन लागत किसानों के सामने बड़ी चुनौती बन जाती है। इन परिस्थितियों में लाभकारी खेती करना लगातार कठिन होता जा रहा था। इसी दौरान कृषि विभाग एवं आदिम जाति सेवा सहकारी समिति मर्यादित, जनकपुर के माध्यम से उन्हें इफको नैनो डीएपी के बारे में जानकारी मिली।


कृषि विभाग के अधिकारियों ने बताया कि नैनो डीएपी आधुनिक नैनो तकनीक पर आधारित तरल उर्वरक है, जो फसलों को आवश्यक पोषक तत्व अधिक प्रभावी ढंग से उपलब्ध कराता है। साथ ही इसके उपयोग से पोषक तत्वों की दक्षता बढ़ती है, उर्वरकों का संतुलित उपयोग संभव होता है तथा खेती की लागत को नियंत्रित करने में भी सहायता मिलती है। विभागीय अधिकारियों ने उन्हें इसके वैज्ञानिक उपयोग की विधि भी विस्तार से समझाई। रघुवीर यादव ने आदिम जाति सेवा सहकारी समिति मर्यादित, जनकपुर से नैनो डीएपी खरीदा और कृषि विभाग के मार्गदर्शन में अपनी फसल में इसका उपयोग किया। शुरुआत में उन्हें इस नई तकनीक को लेकर कुछ संकोच और आशंका थी, लेकिन उन्होंने वैज्ञानिक सलाह पर भरोसा करते हुए निर्धारित मात्रा एवं समय के अनुसार इसका प्रयोग किया।


कुछ ही समय बाद फसल में सकारात्मक बदलाव दिखाई देने लगे। पौधों की बढ़वार पहले की तुलना में अधिक अच्छी हुई, फसल हरी-भरी एवं स्वस्थ नजर आने लगी तथा पोषक तत्वों का प्रभाव स्पष्ट रूप से दिखाई दिया। इससे उनके मन में आधुनिक कृषि तकनीकों के प्रति विश्वास और अधिक मजबूत हुआ। उन्होंने अनुभव किया कि संतुलित पोषण मिलने से फसल की गुणवत्ता में सुधार हुआ और उत्पादन की बेहतर संभावनाएं भी दिखाई देने लगीं। रघुवीर यादव बताते हैं कि पहले जहां अधिक मात्रा में पारंपरिक उर्वरकों का उपयोग करना पड़ता था, वहीं नैनो डीएपी के उपयोग से पोषण प्रबंधन अधिक प्रभावी हुआ।


इससे खेती की लागत को नियंत्रित करने में सहायता मिली और उर्वरकों के विवेकपूर्ण एवं संतुलित उपयोग के प्रति उनकी सोच भी बदली। उनका मानना है कि यदि किसान कृषि विभाग के मार्गदर्शन में वैज्ञानिक पद्धति अपनाएं और नई तकनीकों को स्वीकार करें तो खेती को अधिक लाभकारी, टिकाऊ एवं पर्यावरण अनुकूल बनाया जा सकता है। वे अन्य किसानों से भी अपील करते हैं कि आधुनिक कृषि तकनीकों को अपनाने से घबराएं नहीं। कृषि वैज्ञानिकों एवं विभागीय अधिकारियों की सलाह के अनुसार नैनो डीएपी जैसे नवाचारों का उपयोग करें। इससे फसलों की गुणवत्ता में सुधार, उत्पादन क्षमता में वृद्धि, उर्वरकों के बेहतर उपयोग तथा खेती की लागत में कमी लाने में सहायता मिल सकती है।


कृषि विभाग द्वारा जिले में किसानों को संतुलित उर्वरक प्रबंधन के प्रति जागरूक करने के लिए लगातार प्रशिक्षण, प्रदर्शन एवं जनजागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। किसानों को नैनो डीएपी, नैनो यूरिया तथा अन्य आधुनिक कृषि तकनीकों की जानकारी देकर उन्हें वैज्ञानिक खेती अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है। विभाग का उद्देश्य किसानों की उत्पादन लागत कम करना, मृदा स्वास्थ्य का संरक्षण करना तथा टिकाऊ कृषि प्रणाली को बढ़ावा देना है।

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