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आजीविका से जोड़ना आर्थिक सशक्तिकरण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम : वन मंत्री केदार कश्यप.....

Aug 21
3 min read
  • वनौषधियों से महिलाओं को रोजगार की मिलेगी नई राह....

  • मानव-हाथी द्वंद्व रोकने सामुदायिक भागीदारी पर जोर....

पत्रकार अमृतेश्वर सिंह की कलम से:-

रायपुर, आजीविका से जोड़ना आर्थिक सशक्तिकरण की मुख्य धुरी है। इससे व्यक्तियों और परिवारों को नियमित आय मिलती है, गरीबी कम होती है और समाज में उनका आत्मसम्मान बढ़ता है। यह कदम देश के समग्र विकास और आत्मनिर्भरता को मजबूत करता है। वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री केदार कश्यप ने अपने कोरबा प्रवास के दौरान यह बात कहा है कि वन केवल पर्यावरण संरक्षण का आधार नहीं, बल्कि वन क्षेत्रों में रहने वाले लोगों की आजीविका का भी महत्वपूर्ण साधन हैं।

मंत्री कश्यप ने कहा कि वन संसाधनों का संरक्षण करते हुए उनका स्थानीय स्तर पर प्रसंस्करण और मूल्य संवर्धन किया जाए, तो महिलाओं और ग्रामीणों के लिए रोजगार तथा आय के नए अवसर तैयार किए जा सकते हैं। उन्होंने कहा कि मानव-हाथी द्वंद्व की रोकथाम में वन विभाग के साथ स्थानीय समुदाय की भागीदारी और समय पर सूचना व्यवस्था बेहद महत्वपूर्ण है।

डोंगानाला में वनौषधि प्रसंस्करण केंद्र का अवलोकन...

वन मंत्री कश्यप अपने कोरबा प्रवास के दौरान पाली विकासखंड के ग्राम डोंगानाला स्थित वनौषधि प्रसंस्करण केंद्र पहुंचे। उन्होंने यहां हरि बोल स्व-सहायता समूह की महिलाओं से आत्मीय संवाद किया और वनौषधियों के संग्रहण, प्रसंस्करण तथा उनसे तैयार किए जा रहे उत्पादों की जानकारी ली। उन्होंने समूह द्वारा तैयार उत्पादों का अवलोकन कर महिलाओं के प्रयासों की सराहना की।

वनौषधियों से मजबूत हो रही महिलाओं की आजीविका...

कश्यप ने कहा कि स्थानीय स्तर पर उपलब्ध वनौषधियों और अन्य वन उत्पादों का उचित प्रसंस्करण ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई गति दे सकता है। इससे वन आधारित उत्पादों को बेहतर मूल्य मिलेगा और स्व-सहायता समूहों से जुड़ी महिलाओं की आय बढ़ाने के अवसर मिलेंगे। उन्होंने कहा कि महिला स्व-सहायता समूहों को वन आधारित आजीविका से जोड़ना आर्थिक सशक्तिकरण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। महिलाओं की मेहनत, स्थानीय संसाधनों का ज्ञान और समूह के रूप में काम करने की क्षमता को उचित सहयोग मिले, तो ग्रामीण क्षेत्रों में आत्मनिर्भरता की नई मिसालें तैयार की जा सकती हैं।

चोटिया में हाथी नियंत्रण केंद्र का निरीक्षण...

वन मंत्री कश्यप ने पोड़ी-उपरोड़ा विकासखंड के चोटिया स्थित हाथी नियंत्रण केंद्र का भी निरीक्षण किया। उन्होंने हाथी मित्र दल के सदस्यों से क्षेत्र में हाथियों की गतिविधियों, ग्रामीण क्षेत्रों में उनकी आवाजाही और मानव-हाथी द्वंद्व की स्थिति की जानकारी ली। इस दौरान उन्होंने हाथी मित्र दल को मोटरसाइकिल और सुरक्षा किट प्रदान की। इससे वन क्षेत्रों में निगरानी, गश्त और हाथियों की गतिविधियों की समय पर सूचना देने की व्यवस्था को और मजबूत करने में मदद मिलेगी।


समय पर सूचना और सतर्कता से कम होगा मानव-हाथी द्वंद्व...

वन मंत्री कश्यप ने आमजनों का अवगत कराया कि मानव-हाथी द्वंद्व की रोकथाम केवल वन विभाग की जिम्मेदारी नहीं है। इसके लिए वन विभाग, स्थानीय प्रशासन, जनप्रतिनिधियों, वन प्रबंधन समितियों और ग्रामीणों के बीच बेहतर समन्वय जरूरी है। हाथियों की गतिविधियों की समय पर जानकारी मिलने से ग्रामीणों को सतर्क किया जा सकता है और संभावित घटनाओं को रोकने में मदद मिलती है। उन्होंने हाथी मित्र दल और वन प्रबंधन समितियों के सदस्यों को ग्रामीणों की सुरक्षा के साथ हाथियों के संरक्षण को भी प्राथमिकता देने तथा लगातार निगरानी और समन्वय के साथ कार्य करने के लिए प्रेरित किया।


वन संरक्षण में ग्रामीणों की भागीदारी महत्वपूर्ण

वन मंत्री केदार कश्यप ने स्थानीय वन प्रबंधन समितियों के सदस्यों से भी चर्चा की। उन्होंने कहा कि वन क्षेत्रों में रहने वाले ग्रामीण वन और वन्यजीवों के संरक्षण के महत्वपूर्ण भागीदार हैं। उनके स्थानीय अनुभव और सहयोग से वन विभाग की संरक्षण गतिविधियों को अधिक प्रभावी बनाया जा सकता है। उन्होंने कहा कि वन संरक्षण, वन आधारित आजीविका और वन्यजीव सुरक्षा सहित इन तीनों क्षेत्रों में स्थानीय समुदाय को साथ लेकर आगे बढ़ना ही स्थायी विकास का मजबूत आधार है। इस अवसर पर विधायक प्रेमचंद पटेल सहित स्थानीय जनप्रतिनिधि, वन विभाग के अधिकारी-कर्मचारी, वन प्रबंधन समितियों के सदस्य, हाथी मित्र दल के सदस्य और बड़ी संख्या में ग्रामीण उपस्थित रहे।

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