कवर्धा शिक्षक भर्ती घोटाला: ढाई दशक पुरानी फाइल खुली, 22 लोगों पर 1000 पन्नों का शिकंजा...

ब्रेकिंग ADN न्यूज़ :-
छत्तीसगढ़ के कबीरधाम जिले के पंडरिया ब्लॉक से जुड़ा हुआ लगभग तीन दशक पुराना बहुचर्चित शिक्षाकर्मी घोटाला एक बार फिर सुर्खियों में आ गया है। इस बहुचर्चित मामले में आर्थिक अपराध अन्वेषण शाखा (ईओडब्लू) और भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) ने बड़ा कदम उठाते हुए विशेष अदालत में लगभग एक हजार पन्नों का आरोपपत्र दाखिल कर दिया है। साल 1998 में हुई इस भर्ती प्रक्रिया में बड़े पैमाने पर नियमों को ताक पर रखने और धांधली के गंभीर आरोप हैं।
छह अफसरों समेत 22 आरोपित घेरे में: जांच एजेंसी की ओर से कोर्ट में पेश किए गए चार्जशीट में कुल 22 लोगों को आरोपी बनाया गया है। इसमें तत्कालीन समय के 6 लोकसेवक (अधिकारी और समिति प्रमुख) तथा 16 वे चयनित अभ्यर्थी शामिल हैं जिन्होंने गलत तरीके से नौकरी हासिल की थी। इस पूरे प्रकरण की शुरुआत 25 दिसंबर 1998 को दी गई एक आधिकारिक शिकायत से हुई थी, जिसके बाद सन 2000 में औपचारिक एफआईआर दर्ज की गई थी। लंबी और जटिल जांच के बाद अब जाकर विशेष भ्रष्टाचार निवारण न्यायालय में मामला सुनवाई के चरण में पहुंचा है।
साल 1998 के 320 पदों की भर्ती का विवाद: यह पूरा मामला जनपद पंचायत पंडरिया के अंतर्गत वर्ष 1998 में वर्ग-3 के 320 पदों पर हुई प्राथमिक शिक्षकों की चयन प्रक्रिया से संबंधित है। तत्कालीन पंचायत अध्यक्ष की तरफ से शिकायत दर्ज कराई गई थी कि चयन सूची तैयार करने में भारी फेरबदल हुआ है। इंटरव्यू के नंबरों में गड़बड़ी करने, फर्जी अनुभव प्रमाणपत्रों के आधार पर अतिरिक्त अंक जोड़ने और आरक्षण के प्रावधानों की अनदेखी करने के गंभीर आरोप लगाए गए थे।
रिश्तेदारों को फायदा पहुँचाने और अंकों की हेराफेरी का आरोप: जांच के दौरान यह बात सामने आई कि चयन समिति के सदस्यों और पदाधिकारियों ने अपने ही करीबियों और रिश्तेदारों को अनुचित लाभ पहुंचाया। समिति से जुड़े कुछ सदस्यों के परिवार के लोग भी इस परीक्षा में उम्मीदवार थे, जिन्होंने खुद मूल्यांकन प्रक्रिया और साक्षात्कारों में दखल दिया। इसके अलावा, जो उम्मीदवार कॉलेज में नियमित पढ़ाई कर रहे थे, उन्हें भी फर्जी तरीके से अध्यापन अनुभव का लाभ देकर मेरिट सूची में आगे बढ़ा दिया गया, जिससे कई योग्य और पात्र युवा नौकरी से वंचित रह गए।
आरक्षण और दिव्यांग कोटे में भी गड़बड़ी: जांच में यह भी खुलासा हुआ है कि सामान्य महिला वर्ग और दिव्यांग कोटे के पदों पर चयन के दौरान तय नियमों का पालन नहीं किया गया। इंटरव्यू के लिए उम्मीदवारों को बुलाने से लेकर अंतिम चयन सूची जारी करने तक की प्रक्रिया में पारदर्शिता की कमी पाई गई।
इन गंभीर धाराओं के तहत कार्रवाई: आरोपियों की संलिप्तता और सबूतों के आधार पर भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की विभिन्न धाराओं के साथ-साथ भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धाराओं जैसे आपराधिक षड्यंत्र, धोखाधड़ी, और दस्तावेजों में जालसाजी (120बी, 420, 467, 468, 471) के तहत मामला आगे बढ़ाया जा रहा है। हालांकि, चार्जशीट दाखिल होने का अर्थ यह नहीं है कि सभी आरोपी दोषी साबित हो चुके हैं; अब अदालत में दोनों पक्षों की दलीलों और साक्ष्यों के आधार पर ही अंतिम फैसला आएगा।






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