कपिल सिब्बल बोले- BJP को फायदा पहुंचाने के लिए हटाए जा रहे अल्पसंख्यकों के नाम.....
- ANIS LALA DANI

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ब्रेकिंग ADN न्यूज़:-
नई दिल्ली राज्यसभा सांसद और वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने मतदाता सूची के स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) को लेकर चुनाव आयोग पर गंभीर आरोप लगाए हैं। बुधवार को उन्होंने दावा किया कि विभिन्न राज्यों में चल रही SIR प्रक्रिया मतदाता सूची में हेरफेर की कोशिश है। सिब्बल ने सुप्रीम कोर्ट से इस मामले में हस्तक्षेप करने और मतदाता सूची से बड़े पैमाने पर नाम हटाए जाने की कथित प्रक्रिया पर रोक लगाने की अपील की। पूर्व केंद्रीय मंत्री सिब्बल ने आरोप लगाया कि SIR के जरिए मतदाता सूचियों में बदलाव का उद्देश्य भारतीय जनता पार्टी को चुनावी फायदा पहुंचाना है। हालांकि ये सिब्बल के आरोप हैं और संबंधित दावों की स्वतंत्र पुष्टि आवश्यक है। चुनाव आयोग या भाजपा की प्रतिक्रिया सामने आने पर उनका पक्ष भी इस मामले में महत्वपूर्ण होगा।
सिब्बल की टिप्पणी ऐसे समय आई है जब एक मीडिया रिपोर्ट में झारखंड के गोड्डा जिले में मतदाता सूची से नाम हटाने के प्रयासों को लेकर दावा किया गया है। रिपोर्ट के आधार पर सिब्बल ने सवाल उठाया कि क्या SIR प्रक्रिया का इस्तेमाल चुनिंदा मतदाताओं को सूची से बाहर करने के लिए किया जा रहा है। गोड्डा की रिपोर्ट का दिया हवाला कपिल सिब्बल ने अपनी बात के समर्थन में झारखंड के गोड्डा जिले से जुड़ी एक मीडिया रिपोर्ट का उल्लेख किया। रिपोर्ट में दावा किया गया है कि वहां भाजपा से जुड़े एजेंट बूथ लेवल अधिकारियों यानी BLO के साथ मिलकर कुछ मतदाताओं के नाम वोटर लिस्ट से हटवाने की कोशिश कर रहे हैं।
रिपोर्ट में यह भी दावा किया गया कि जिन मतदाताओं के नाम हटाने की कोशिश की गई उनमें बड़ी संख्या अल्पसंख्यक समुदाय से जुड़े लोगों की है। इन दावों को लेकर सिब्बल ने चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि यदि मतदाता सूची में इस तरह बड़े पैमाने पर बदलाव किए जाते हैं तो इससे लोगों के मतदान के अधिकार पर सीधा असर पड़ सकता है। BJP को फायदा पहुंचाने का लगाया आरोप सिब्बल ने आरोप लगाया कि विभिन्न राज्यों में चल रहे SIR का उद्देश्य भाजपा को चुनाव जिताने में मदद करना है। उन्होंने इस प्रक्रिया को केवल मतदाता सूची की सामान्य समीक्षा मानने से इनकार करते हुए इसके पीछे राजनीतिक उद्देश्य होने का दावा किया।
उनका कहना है कि अगर पात्र मतदाताओं के नाम बिना उचित आधार के सूची से हटाए जाते हैं तो इससे चुनाव परिणाम भी प्रभावित हो सकते हैं। हालांकि चुनावी सूची में संशोधन एक प्रशासनिक प्रक्रिया है और इसमें नए पात्र मतदाताओं को जोड़ने के साथ मृत, स्थानांतरित या अन्य कारणों से अपात्र हो चुके मतदाताओं के रिकॉर्ड में बदलाव भी किया जाता है। विवाद का मुख्य सवाल यह है कि नाम जोड़ने और हटाने की प्रक्रिया निर्धारित नियमों तथा उचित सत्यापन के तहत हो रही है या नहीं।
सुप्रीम कोर्ट से हस्तक्षेप की मांग सिब्बल ने सुप्रीम कोर्ट से अपील की कि वह मतदाता सूची से बड़े पैमाने पर नाम हटाने की कथित कार्रवाई को रोके। वरिष्ठ अधिवक्ता होने के नाते सिब्बल ने इस मुद्दे को मताधिकार और लोकतांत्रिक प्रक्रिया से जोड़ते हुए न्यायिक निगरानी की जरूरत बताई। उनका तर्क है कि मतदाता सूची से किसी पात्र नागरिक का नाम हटना उसके मतदान के अधिकार को प्रभावित करता है। इसलिए ऐसी प्रक्रिया में पारदर्शिता और पर्याप्त जांच जरूरी है। सिब्बल की मांग के बाद इस मुद्दे पर कानूनी और राजनीतिक बहस तेज हो सकती है। SIR से जुड़े मामलों पर अदालतों में उठ रहे सवालों के बीच उनका बयान नई राजनीतिक प्रतिक्रिया को जन्म दे सकता है। क्या है स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन मतदाता सूची की गहन समीक्षा की प्रक्रिया है। इसका घोषित उद्देश्य मतदाता सूची को अद्यतन और सटीक बनाना होता है। इस प्रक्रिया में मतदाताओं की पात्रता का सत्यापन किया जाता है।
नए पात्र नागरिकों के नाम जोड़े जा सकते हैं जबकि मृत मतदाताओं, स्थायी रूप से स्थानांतरित लोगों या अन्य निर्धारित कारणों से अपात्र पाए गए नामों को हटाने की प्रक्रिया भी की जा सकती है। हालांकि मतदाता सूची से नाम हटाने से पहले निर्धारित प्रक्रिया और संबंधित मतदाता को अपना पक्ष रखने का उचित अवसर दिए जाने जैसे कानूनी प्रावधान महत्वपूर्ण होते हैं। इसी कारण SIR को लेकर विपक्षी दल लगातार पारदर्शिता और निष्पक्षता की मांग करते रहे हैं। BLO की भूमिका पर भी उठे सवाल गोड्डा से जुड़ी रिपोर्ट में बूथ लेवल अधिकारियों की कथित भूमिका का उल्लेख होने के कारण विवाद और बढ़ गया है। BLO मतदाता सूची के जमीनी सत्यापन और चुनाव संबंधी प्रशासनिक काम में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। चूंकि बूथ लेवल अधिकारी सरकारी व्यवस्था का हिस्सा होते हैं, इसलिए उनसे निष्पक्ष तरीके से जिम्मेदारी निभाने की अपेक्षा की जाती है। सिब्बल द्वारा उद्धृत रिपोर्ट में राजनीतिक दल के एजेंट और BLO के बीच कथित समन्वय का दावा किया गया है। यदि ऐसे आरोप औपचारिक जांच में सामने आते हैं तो यह चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता से जुड़ा गंभीर मामला हो सकता है। फिलहाल इन आरोपों को सत्यापित तथ्यों के बजाय दावों के रूप में ही देखा जाना चाहिए।
अल्पसंख्यक मतदाताओं को लेकर दावा सिब्बल ने मीडिया रिपोर्ट के आधार पर यह मुद्दा भी उठाया कि कथित तौर पर जिन लोगों के नाम हटाने की कोशिश की जा रही है उनमें अधिकांश अल्पसंख्यक समुदाय से संबंधित हैं। इस दावे के कारण मामला राजनीतिक रूप से और संवेदनशील हो गया है। किसी खास समुदाय या समूह के पात्र मतदाताओं को लक्षित करके सूची से हटाया जाना लोकतांत्रिक और संवैधानिक दृष्टि से गंभीर चिंता का विषय होगा, यदि ऐसा किसी निष्पक्ष जांच में प्रमाणित होता है। इसी वजह से सिब्बल ने सुप्रीम कोर्ट से हस्तक्षेप की मांग करते हुए कथित सामूहिक नाम हटाने की प्रक्रिया पर रोक लगाने की बात कही है। मतदाता सूची को लेकर राजनीतिक टकराव देश में मतदाता सूची की समीक्षा को लेकर पिछले कुछ समय से राजनीतिक दलों के बीच तीखी बहस देखने को मिल रही है। विपक्षी दल प्रक्रिया की पारदर्शिता, दस्तावेजों की आवश्यकता और नाम हटाने की प्रक्रिया पर सवाल उठा रहे हैं। दूसरी तरफ चुनाव आयोग का संवैधानिक दायित्व मतदाता सूची को अद्यतन रखना और यह सुनिश्चित करना है कि केवल पात्र मतदाता ही सूची में शामिल हों।
ऐसे में विवाद का केंद्र यह है कि संशोधन की प्रक्रिया कितनी पारदर्शी है और क्या पात्र मतदाताओं के हितों की पर्याप्त सुरक्षा की जा रही है। चुनाव आयोग के जवाब पर नजर कपिल सिब्बल के आरोपों के बाद अब चुनाव आयोग की प्रतिक्रिया महत्वपूर्ण होगी। आयोग की ओर से यदि गोड्डा से जुड़े आरोपों या SIR प्रक्रिया पर कोई स्पष्टीकरण दिया जाता है तो उससे स्थिति और स्पष्ट हो सकती है। इसी तरह भाजपा की प्रतिक्रिया भी महत्वपूर्ण होगी क्योंकि सिब्बल ने सीधे तौर पर पार्टी को चुनावी फायदा पहुंचाने के उद्देश्य से SIR कराए जाने का आरोप लगाया है। फिलहाल सिब्बल के आरोपों ने SIR और मतदाता सूची में नाम हटाने के मुद्दे को एक बार फिर राजनीतिक बहस के केंद्र में ला दिया है। उनकी सुप्रीम कोर्ट से की गई अपील के बाद यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि इस मुद्दे पर आगे कोई न्यायिक या चुनाव आयोग स्तर की कार्रवाई होती है या नहीं।




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