कांकेर: बाल संरक्षण आयोग ने किया प्रयास छात्रावास का निरीक्षण, बच्चियों ने रखी स्मार्ट क्लास और सोलर पैनल की मांग....

पत्रकार अमृतेश्वर सिंह की क़लम से :-
कांकेर: छत्तीसगढ़ राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग की अध्यक्ष डॉ. वर्णिका शर्मा ने गुरुवार, 24 सितंबर को अपने कांकेर प्रवास के दौरान प्रयास कन्या छात्रावास एवं आदिवासी आवासीय विद्यालय का औचक निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने छात्राओं के साथ आत्मीय संवाद करते हुए उनके रहन-सहन, पढ़ाई और विद्यालय में उपलब्ध सुविधाओं का जायजा लिया। छात्राओं ने भी पूरे आत्मविश्वास और सहजता के साथ अपनी आवश्यकताओं तथा समस्याओं को आयोग अध्यक्ष के समक्ष रखा।



छात्राओं ने रखी ये प्रमुख मांगें -
निरीक्षण के दौरान छात्राओं ने बताया कि छात्रावास में सैनिटरी पैड वेंडिंग मशीन तो उपलब्ध है, लेकिन पैड डिस्पोजल मशीन की सुविधा नहीं है। इसके अलावा, बिजली कटौती के कारण पढ़ाई प्रभावित होने की बात कहते हुए छात्राओं ने इसके स्थायी समाधान के लिए सोलर पैनल और आपातकालीन लाइट (इमरजेंसी लाइट) की व्यवस्था करने की मांग की। डिजिटल शिक्षा को बेहतर बनाने के लिए कंप्यूटर और स्मार्ट क्लास के लिए स्मार्ट बोर्ड उपलब्ध कराने का भी आग्रह किया गया।
डॉ. वर्णिका शर्मा ने छात्राओं की बातों को बेहद गंभीरता और संवेदनशीलता के साथ सुना। उन्होंने आवश्यक सुविधाओं की पूर्ति के लिए उचित स्तर पर पहल करने का आश्वासन दिया। बातचीत के दौरान छात्राओं ने 'सूर्यकिरण' में रहने और प्रदेश के मुख्यमंत्री से मिलने की प्रबल इच्छा भी जताई, जिस पर अध्यक्ष ने उचित व्यवस्था सुनिश्चित करने का भरोसा दिलाया।
स्वच्छता और अनुशासित दिनचर्या ने खींचा ध्यान -
आयोग अध्यक्ष ने छात्रावास परिसर में स्वच्छता, अनुशासन और व्यवस्थित वातावरण की जमकर सराहना की। उन्होंने कहा कि बच्चों की आवश्यकताओं को समझने और उनकी बातों को सीधे सुनने से ही बाल अधिकारों की वास्तविक सुरक्षा सुनिश्चित की जा सकती है। निरीक्षण के दौरान डॉ. वर्णिका शर्मा का छात्राओं के प्रति आत्मीय एवं मातृत्वपूर्ण व्यवहार रहा, जिससे छात्राएं भी काफी सहज और उत्साहित नजर आईं।

डॉ. शर्मा ने स्पष्ट किया कि बच्चों को केवल शिक्षा उपलब्ध कराना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि उन्हें सुरक्षित, स्वच्छ, सम्मानजनक और सुविधायुक्त वातावरण देना भी हमारी जिम्मेदारी है। बच्चों की छोटी-छोटी जरूरतों को समय पर पूरा करना उनके बेहतर भविष्य की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है और बाल अधिकार संरक्षण आयोग इसके लिए सदैव तत्पर है।






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