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जावा सागर: विर्गो ट्रांसपोर्ट-8 जहाज लापता, रेस्क्यू में 103 बचाए गए...

Sep 13
3 min read

ब्रेकिंग ADN न्यूज़ :-

नई दिल्ली :- इंडोनेशिया में रविवार को उस समय हड़कंप मच गया, जब 243 यात्रियों को लेकर जा रहा एक यात्री जहाज जावा सागर में अचानक लापता हो गया। जहाज से संपर्क टूटने के बाद रेस्क्यू एजेंसियों ने बड़े स्तर पर तलाश अभियान शुरू किया। अब तक 103 लोगों को अलग-अलग जहाजों की मदद से सुरक्षित निकाला जा चुका है। हालांकि, इनमें से एक व्यक्ति की मौत हो गई है, जबकि 140 लोगों की तलाश अभी जारी है।

















लापता हुआ यात्री जहाज विर्गो ट्रांसपोर्ट 8 बताया गया है। यह जहाज पूर्वी जावा के सुराबाया से बोर्नियो द्वीप के बंजारमासिन की ओर जा रहा था। सफर के दौरान जहाज में कम्युनिकेशन फेलियर हुआ। इसके बाद जहाज से संपर्क नहीं हो सका। बंजारमासिन स्थित सर्च एंड रेस्क्यू ऑफिस के मुताबिक, जहाज की आखिरी लोकेशन जावा सागर में बंजारमासिन के एक पियर से करीब 148 किलोमीटर दूर मिली है। संपर्क टूटने की जानकारी मिलने के बाद अधिकारियों ने तुरंत सर्च ऑपरेशन शुरू किया।


रेस्क्यू एजेंसी ने बताया कि अलग-अलग जहाजों की मदद से अब तक 103 लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला गया है। इनमें से एक की मौत हो गई। वहीं बाकी 140 लोगों का अभी तक पता नहीं चल पाया है। रेस्क्यू टीमों ने लापता जहाज की आखिरी लोकेशन की तरफ कई जहाज भेजे हैं। साथ ही एक हेलिकॉप्टर की मदद से भी समुद्र में तलाश की जा रही है। इंडोनेशिया में समुद्री हादसों का इतिहास भी काफी गंभीर रहा है। साल 1981 में तंपोमास-2 नाम का यात्री जहाज जावा सागर में डूब गया था। इस हादसे में करीब 430 लोगों की मौत हुई थी।


इसके बाद 2006 में सेनोपाती नुसंतारा नाम की यात्री फेरी खराब मौसम के दौरान जावा सागर में डूब गई थी। इस हादसे में 400 से ज्यादा लोग मारे गए या लापता हुए थे। साल 2007 में लेविना-1 फेरी में आग लगने के बाद वह डूब गई थी। इस हादसे में 50 से ज्यादा लोगों की मौत हुई थी। वहीं 2018 में लेस्तारी माजू फेरी दक्षिण सुलावेसी के पास डूब गई थी। इसमें 36 लोगों की जान गई थी।


इंडोनेशिया में समुद्री परिवहन लोगों की आवाजाही का अहम साधन है। देश में 17 हजार से ज्यादा द्वीप हैं और करीब 28 करोड़ की आबादी का बड़ा हिस्सा अलग-अलग द्वीपों पर रहता है। ऐसे में कई शहरों और द्वीपों के बीच आने-जाने के लिए फेरी और यात्री जहाजों का इस्तेमाल बड़े पैमाने पर होता है। उष्णकटिबंधीय क्षेत्र में होने के कारण यहां तेज बारिश, आंधी और ऊंची समुद्री लहरों का खतरा रहता है। ऐसे मौसम में छोटे और मध्यम आकार के जहाजों के लिए समुद्र में सफर करना मुश्किल हो सकता है।


इसके अलावा कई समुद्री हादसों की जांच में क्षमता से ज्यादा यात्रियों को बैठाने, सुरक्षा उपकरणों की कमी और सुरक्षा नियमों का सही तरीके से पालन नहीं करने जैसी खामियां भी सामने आई हैं। हालांकि, हर हादसे की वजह अलग हो सकती है। इंडोनेशिया में जहाज के लापता होने की घटना के बीच फिलीपींस में भी कुछ दिन पहले एक यात्री फेरी में आग लगने का बड़ा हादसा हुआ था। रात हुए इस हादसे में अब तक 76 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 13 लोग लापता हैं।


फेरी में कुल 132 लोग सवार थे और 43 लोगों को बचा लिया गया था। यह फेरी राजधानी मनीला से कोरोन जा रही थी और मंजिल से करीब 39 किलोमीटर पहले आग की चपेट में आ गई थी। फिलीपींस में भी इंडोनेशिया की तरह द्वीपों के बीच आवाजाही के लिए फेरी महत्वपूर्ण साधन हैं। फिलीपींस में इससे पहले भी बड़ा समुद्री हादसा हो चुका है। 1987 में डोना पाज़ फेरी एक तेल टैंकर से टकराकर डूब गई थी। इस हादसे में 4,300 से ज्यादा लोगों की मौत हुई थी और इसे दुनिया के सबसे घातक शांतिपूर्ण समय के समुद्री हादसों में माना जाता है।

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