एमसीडी की विशेष बैठक में ठोस कचरा प्रबंधन नियमों पर मंथन, कचरे के पृथक्करण और जन-भागीदारी पर जोर...

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नई दिल्ली: दिल्ली नगर निगम (एमसीडी) द्वारा शहर की स्वच्छता व्यवस्था को सुदृढ़ बनाने और कचरा प्रबंधन को अधिक वैज्ञानिक रूप देने के लिए एक विशेष बैठक का आयोजन किया गया। उप-महापौर डॉ. मोनिका पंत की अध्यक्षता में हुई इस बैठक में ठोस कचरा प्रबंधन नियम, 2026 के प्रावधानों, चार-स्तरीय कचरा पृथक्करण प्रणाली, सर्कुलर इकोनॉमी, बल्क वेस्ट जनरेटर (बड़े स्तर पर कचरा उत्पन्न करने वालों) के पंजीकरण और सफाई कर्मचारियों की कार्यप्रणाली जैसे अहम मुद्दों पर गहन चर्चा हुई।
सत्र के दौरान निगम के मुख्य अभियंता ने पार्षदों को नए नियमों की बारीकियों से अवगत कराया। उन्होंने इस बात पर विशेष बल दिया कि यदि कचरे को उसके शुरुआती स्रोत पर ही अलग-अलग कर लिया जाए, तो इसके संग्रहण, परिवहन और पुनर्चक्रण की पूरी प्रक्रिया काफी आसान और प्रभावी हो जाती है। उप-महापौर ने स्पष्ट किया कि घरों, व्यापारिक बाजारों और विभिन्न संस्थानों से निकलने वाले कचरे को निर्धारित श्रेणियों में बांटना आज की सबसे बड़ी जरूरत है, जिसके लिए वार्ड स्तर पर व्यापक जन-जागरूकता अभियान चलाने की आवश्यकता है।
बैठक को संबोधित करते हुए डॉ. मोनिका पंत ने कहा कि ठोस कचरा प्रबंधन की सफलता केवल कागजी नियमों पर नहीं, बल्कि धरातल पर उनके सटीक क्रियान्वयन और आम जनता की सक्रिय भागीदारी पर निर्भर करती है। उन्होंने पार्षदों से आह्वान किया कि वे अपने-अपने वार्डों में रेजिडेंट्स वेलफेयर एसोसिएशन (RWA), मार्केट एसोसिएशन और स्थानीय नागरिकों के साथ मिलकर स्वच्छता के प्रति जनजागरण अभियान चलाएं।
चर्चा के दौरान पार्षदों ने अपने-अपने क्षेत्रों की जमीनी समस्याओं और चुनौतियों को भी सदन के समक्ष रखा। उन्होंने कचरा संग्रहण के तंत्र को और बेहतर करने, बल्क जनरेटर के पंजीकरण की प्रक्रिया को सख्त बनाने तथा स्वच्छता कर्मियों के हितों एवं सुरक्षा का पूरा ध्यान रखने से जुड़े कई महत्वपूर्ण सुझाव दिए। उप-महापौर ने सभी पार्षदों को आश्वस्त किया कि उनके द्वारा दिए गए सुझावों पर प्राथमिकता से अमल किया जाएगा, क्योंकि एक स्वच्छ और सुंदर शहर का निर्माण केवल प्रशासन की नहीं, बल्कि हम सबकी सामूहिक जिम्मेदारी है।






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