छत्तीसगढ़ में भ्रष्टाचार के मोर्चे पर ABC की रिपोर्ट: राजस्व और शिक्षा विभाग पर उठे सवाल, पांच साल के आंकड़े उजागर

ब्रेकिंग ADN न्यूज़ :-
छत्तीसगढ़ में घूसखोरी और भ्रष्टाचार के खिलाफ एंटी-करप्शन ब्यूरो (एसीबी) के ताजा आंकड़ों ने प्रशासनिक महकमे में हलचल मचा दी है। बीते पांच वर्षों के दौरान विभिन्न विभागों में हुई छापामार कार्रवाई के ब्योरे से पता चलता है कि आम जनता से जुड़े प्रशासनिक कार्यों में किस हद तक अवैध वसूली की जा रही है। रिपोर्ट के अनुसार, कई प्रमुख महकमों में शासकीय अमला धड़ल्ले से सुविधा शुल्क वसूल रहा है, जिससे सरकारी कामकाज की पारदर्शिता पर बड़े सवाल खड़े हो गए हैं।
भू-अभिलेख और शिक्षा महकमा सबसे आगे -
एजेंसी द्वारा जारी रिकॉर्ड के मुताबिक, पिछले पांच वर्षों में भ्रष्टाचार के मामलों में जमीनी स्तर के कामकाज से जुड़ा महकमा सबसे आगे रहा है। भूमि के रिकॉर्ड, नामांतरण और सीमांकन जैसे कार्यों से जुड़े विभाग में सबसे अधिक प्रकरण दर्ज किए गए हैं, जहां अधिकारी आम नागरिकों से कागजी कार्रवाई के एवज में अनाप-शनाप मांग करते पाए गए।
इस फेहरिस्त में दूसरा स्थान शिक्षण और शैक्षणिक संस्थानों की देखरेख करने वाले महकमे का है, जहां शिक्षकों और प्रशासनिक पदों पर बैठे लोगों ने भी रिश्वत लेने में कोई कोर-कसर नहीं छोड़ी। इसके अलावा ग्रामीण विकास, पुलिस महकमा और नगरीय निकाय जैसे विभाग भी भ्रष्टाचार के मामले में पीछे नहीं रहे हैं। कार्रवाई के दौरान पकड़े गए लोगों में निचले स्तर के कर्मियों से लेकर कई जिम्मेदार पदों पर आसीन अधिकारी तक शामिल हैं।
किस काम के लिए वसूले गए सबसे ज्यादा दाम -
दस्तावेजों के विश्लेषण से यह बात भी सामने आई है कि घुसपैठिए और भ्रष्ट तंत्र सबसे ज्यादा उन मामलों में सक्रिय रहता है, जहां पैसों का सीधा लेनदेन होता है। ठेकेदारों और एजेंसियों द्वारा कराए जाने वाले निर्माण कार्यों के बिल पास कराने के एवज में सबसे अधिक घूसखोरी के प्रकरण सामने आए हैं।
इसके अलावा जमीन के कागजात दुरुस्त कराने, मुआवजा राशि दिलवाने, और पेंशन व सेवानिवृत्ति से जुड़े भुगतान के नाम पर भी जमकर अवैध वसूली की गई। हालांकि, विश्लेषकों का मानना है कि किसी एक विभाग में ज्यादा मामले दर्ज होने का यह मतलब बिल्कुल नहीं है कि उस पूरे महकमे का हर एक कर्मचारी भ्रष्ट है, लेकिन यह व्यवस्था में सुधार की सख्त जरूरत की ओर जरूर इशारा करता है।
पिछले पांच वर्षों में भ्रष्टाचार के खिलाफ ताबड़तोड़ कार्रवाई।
राजस्व और शिक्षा महकमों में सबसे ज्यादा घूसखोरी के मामले आए सामने।
निर्माण कार्यों के भुगतान और भूमि सुधार के कामों में होती है सबसे ज्यादा अवैध मांग।
जिलेवार सूची में कई क्षेत्रों में बढ़े छापे, प्रशासनिक हलकों में मचा हड़कंप।






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