गीता एक ऐसा समुद्र है जिसमें जिस प्राणी को जीवन में जो भी ढूंढना है प्राप्तवकार सकता है......

पत्रकार अमृतेश्वर सिंह की क़लम से :-
रायपुर: अश्वनी नगर स्थित सोनकर मैरिज पैलेस में आयोजित गीता ज्ञान अमृत वर्षा कथा के दौरान प्रवचन देते हुए प्रयागराज से पधारे संत ने कहा कि श्रीमद्भागवत गीता एक ऐसा अथाह सागर है, जिसमें मनुष्य को उसकी चाहत के अनुसार सब कुछ प्राप्त हो सकता है। कथा के दौरान श्रद्धालुओं को जीवन जीने की कला और कर्म के मर्म को समझाया गया।
जीवन और कर्म का गहरा नाता -
संत ने प्रवचन में आगे बताया कि मनुष्य का संपूर्ण जीवन कर्म के इर्द-गिर्द घूमता है। यदि कोई व्यक्ति यह सोचता है कि वह कुछ नहीं कर रहा है, तो कर्म न करना भी एक प्रकार का कर्म ही बन जाता है। जीवन मुख्य रूप से ज्ञान और अज्ञान तथा भक्ति और नास्तिकता के बीच ही व्यतीत होता है। मनुष्य कभी भी कर्म के बंधनों से पूरी तरह मुक्त नहीं हो सकता, इसलिए जीवन में भक्ति का होना अति आवश्यक है क्योंकि भक्ति ही मनुष्य के भीतर अहंकार को पनपने नहीं देती। ज्ञान, भक्ति और कर्म का यह त्रिवेणी संगम ही मानव जीवन को सही दिशा देता है।

आत्म-साक्षात्कार के मार्ग में बाधाएं -
आत्म-साक्षात्कार के विषय पर प्रकाश डालते हुए कहा गया कि हर व्यक्ति के भीतर ऐसे तत्व मौजूद होते हैं जो उसे खुद को पहचानने नहीं देते। राग और द्वेष ही मनुष्य के आत्म-साक्षात्कार के मार्ग में सबसे बड़े अवरोधक हैं। जो लोग इन दोनों विकारों से घिरे रहते हैं, वे कभी भी खुद को नहीं जान पाते। राग की दिशा को बदलकर ईश्वर के चरणों में लगाना और द्वेष का पूरी तरह त्याग करना ही जीवन की सार्थकता है। संसार की हर वस्तु और बात जानने के बावजूद मनुष्य खुद से ही अनजान रहता है, और आत्म-साक्षात्कार तभी संभव है जब मन के अंदर की बुराइयों का अंत हो जाए।
निःशुल्क स्वास्थ्य शिविर का आयोजन -
कथा के विश्राम के बाद भारी संख्या में उपस्थित श्रद्धालुओं के लिए एक विशेष स्वास्थ्य शिविर लगाया गया। इसमें रोहिणीपुरम तालाब डगरिया स्थित वासुदेव हॉस्पिटल की चिकित्सा टीम द्वारा लोगों के स्वास्थ्य की जांच की गई। इस कल्याणकारी शिविर का लाभ कथा में आए तमाम भक्तों ने उठाया। आयोजकों ने बताया कि यह स्वास्थ्य शिविर कथा के आगामी तीन दिनों तक निरंतर जारी रहेगा।
गीता रूपी समुद्र में गोता लगाकर हर प्राणी अपने जीवन का लक्ष्य पा सकता है।
कर्म और भक्ति से ही जीवन का असली संतुलन बनता है।
राग और द्वेष आत्म-साक्षात्कार के सबसे बड़े अवरोधक हैं।
कथा स्थल पर वासुदेव हॉस्पिटल के सहयोग से निःशुल्क चिकित्सा शिविर का शुभारंभ हुआ।






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