रायपुर में गणेशोत्सव की धूम: समाजसेवी कुबेर राठी ने पत्नी सहित की महाआरती, प्रदेशवासियों की सुख-समृद्धि की मांगी मन्नत.....

पत्रकार अमृतेश्वर सिंह की क़लम से :-
रायपुर। छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में गणेश चतुर्थी का पर्व अगाध श्रद्धा, भक्ति और उल्लास के साथ मनाया जा रहा है। ‘मोर रायपुर’ की गलियां और चौराहे गजानन के स्वागत में जगमगा रहे हैं। इस पावन अवसर पर राजधानी के प्रमुख गणेश उत्सव पंडालों में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ रही है। इसी कड़ी में शहर के प्रमुख समाजसेवी कुबेर राठी अपनी पत्नी मंजू राठी के साथ शहर के विभिन्न धार्मिक आयोजनों में शामिल हुए।
उन्होंने कोटा स्थित जगन्नाथ चौक में 'सरस्वती क्लब गणेश उत्सव समिति' द्वारा स्थापित भगवान विनायक की भव्य झांकी के दर्शन किए। राठी दंपत्ति ने विधि-विधान से प्रथम पूज्य का पूजन-अर्चन कर संपूर्ण छत्तीसगढ़ की सुख, शांति और खुशहाली की मंगल कामना की।
इसके पश्चात वे स्टेशन चौक स्थित नेहरू पारा पहुंचे, जहां 'जनजागृति गणेश उत्सव समिति' द्वारा आयोजित कार्यक्रम में उन्होंने मुख्य अतिथि के रूप में शिरकत की। यहां उन्होंने मंगलमूर्ति की आरती उतारी और मोदक व दूर्वा अर्पित कर जन-कल्याण का आशीर्वाद मांगा।
मीडिया से चर्चा करते हुए कुबेर राठी ने भगवान गणेश के पौराणिक और सांस्कृतिक महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि भगवान गणेश केवल हिंदू धर्म के प्रथम पूज्य देव ही नहीं, बल्कि वे बुद्धि, विवेक, सिद्धि और समस्त विघ्नों के विनाशक हैं। सनातन परंपरा में किसी भी शुभ कार्य का शुभारंभ भगवान गजानन के स्मरण के बिना अधूरा माना जाता है। उनका विशाल मस्तक महाज्ञानी होने का, बड़े कान सबकी सुनने व धैर्य धारण करने का और सूक्ष्म आंखें तीक्ष्ण दृष्टि व विवेक का संदेश देती हैं। गणेश उत्सव केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि सांस्कृतिक चेतना और सामाजिक एकता का महाकुंभ है।
उन्होंने आगे कहा कि आज के समय में भगवान गणेश के आदर्शों को जीवन में उतारने की सर्वाधिक आवश्यकता है। जिस प्रकार विघ्नहर्ता अपने भक्तों के संकटों को हर लेते हैं, उसी प्रकार हम सभी को भी समाज में व्याप्त दुखों और असमानता को दूर करने का संकल्प लेना चाहिए। यह पर्व आपसी भाईचारे, समरसता और एक-दूसरे के सहयोग की प्रेरणा देता है।
आयोजन के दौरान समिति के पदाधिकारियों और स्थानीय नागरिकों ने कुबेर राठी और उनकी पत्नी का पारंपरिक रूप से स्वागत किया। पूरी आरती के दौरान पंडाल 'गणपति बप्पा मोरया, मंगलमूर्ति मोरया' के जयकारों से गुंजायमान रहा।






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