रिक्शा चालक से विधायक तक: ईश्वर साहू की संघर्ष भरी सियासी कहानी...

ब्रेकिंग ADN न्यूज़:-
सामान्य जीवन की कठिनाइयों को पीछे छोड़ते हुए नागपुर की सड़कों पर रिक्शा चलाने वाले एक आम इंसान का छत्तीसगढ़ विधानसभा तक पहुंचना भारतीय राजनीति की एक अनोखी दास्तान है। साल 2023 के विधानसभा चुनाव में साजा सीट से भारतीय जनता पार्टी के उम्मीदवार के रूप में मैदान में उतरे ईश्वर साहू ने सबको चौंका दिया था।

दिग्गज को मात देकर रचा इतिहास साजा विधानसभा सीट पर उनका मुकाबला कांग्रेस पार्टी के कद्दावर नेता और पूर्व मंत्री रविंद्र चौबे से था। राजनीतिक अनुभव में काफी आगे माने जाने वाले दिग्गज नेता को हराकर उन्होंने अप्रत्याशित जीत हासिल की और विधानसभा में प्रवेश किया। इस सियासी उलटफेर ने साजा सीट को पूरे प्रदेश की सुर्खियों में ला दिया।
बेटे की शहादत और पर्दे पर उतरी कहानी राजनीतिक सफलता के इस मुकाम तक पहुंचने से पहले उनकी जिंदगी में एक ऐसा दौर आया जब सांप्रदायिक हिंसा में उनके बेटे भुनेश्वर साहू की बेरहमी से हत्या कर दी गई थी। इस दुखद और असहनीय दौर के बाद उन्होंने हार मानने के बजाय संघर्ष जारी रखने का फैसला किया।

इसी व्यक्तिगत संघर्ष और जीवन की घटनाओं पर आधारित एक फिल्म 'ईश्वर सत्य है: दंगल द वीरनपुर' का निर्माण किया गया। फिल्म के निर्माताओं से चर्चा के बाद इस प्रोजेक्ट को हरी झंडी मिली, जिसमें अभिनेता पवन गांधी ने मुख्य भूमिका निभाई, जबकि शालिनी विश्वकर्मा, श्याम पटेल और कुणाल नायक जैसे कलाकारों ने अन्य अहम किरदार निभाए। नागपुर में रिक्शा चलाकर परिवार पालने वाले एक पिता का विधायक बनने तक का यह सफर और पर्दे पर उतरी उनकी यह गाथा हर किसी को प्रेरित करती है।






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