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फ्रीमेसनरी: नैतिक, आध्यात्मिक विकास और समाज सेवा को समर्पित सदियों पुराना संगठन....

49 minutes ago
3 min read

पत्रकार अमृतेश्वर सिंह की कलम से :-

फ्रीमेसनरी सदियों पुराना एक धातु संगठन है जो अपने सदस्यों के नैतिक और आध्याधिक विकास को से जुड़े हैं। मध्य युग के राजमिस्ती संघों की परंपराओं में निहित आधुनिक फ्रीमेसनरी व्यक्तिगत विकास धातुत्य भावना के सिद्धांत पर आधारित है। यह ऐसे पुरुषों का समाज है जो नैतिक और आध्यात्मिक मूल्यों सामुदायिक सेवा और पारस्परिक सम्मान पर बल देती है। इसके सदस्यों को इसके सिद्धांतों की शिक्षा अनुष्धानों की एक श्रृंखला के माध्यम से दी जाती है, जो प्राचीन परंपराओं का अनुसरण करते हैं और राजमिस्त्रियों के रीति-रिवाजों एवं औजारों तथा रूपकात्मक मार्गदर्शनों का उपयोग करते हैं। इसका उद्देश्य अच्छे मनुष्यों को और बेहतर बनाना और इस प्रकार दुनिया को रहने के लिए एक बेहतर स्थान बनाना है। फ्रीमेसनरी के मूल सिद्धांत हैं।


1. भ्रातृ प्रेमः फ्रीमेसनरी इस विश्वास को बढ़ावा देती है कि समस्त मानवता परस्पर जुड़ी हुई है तथा सहिष्णुता, समझ और करुणा पर बल देती है।


2. राहत/सहायताः परोपकारी गतिविधियों और सामुदायिक सेवा के माध्यम से फ्रीमेसन अपने संगठन के भीतर तथा व्यापक समुदाय में दूसरों के कष्टों को कम करने के लिए सक्रिय रूप से प्रयास करते हैं।


3. सत्यः फ्रीमेसनरी अपने सदस्यों को नैतिक शिक्षाओं और व्यक्तिगत विकास दोनों में सत्य की खोज करने तथा नैतिक और सम्मानपूर्ण जीवन जीने के लिए प्रेरित करती है।

फ्रीमेसनरी अपने वर्तमान स्वरूप में विश्व में लगभग 310 वर्षों से और भारत में 280 वर्षों से अधिक समय से अस्तित्व में है। विश्वभर में 150 से अधिक ग्रैंड लॉज कार्यरत हैं। फ्रीमेसनरी का संगठन लॉजों में है, जिनमें प्रत्येक अपने अधिकारियों और अनुष्ठानों के अनुसार संचालित होता है। सदस्य, जिन्हें फ्रीमेसन या मेसन कहा जाता है, विभिन्न पृष्ठभूमियों और व्यवसायों से आते हैं तथा फ्रेटरनिटी के सिद्धांतों के प्रति अपनी प्रतिबद्धता से एकजुट होते हैं।

ग्रैंड लॉज ऑफ इंडिया को नवंबर 1961 में भारत गणराज्य के क्षेत्रों पर पूर्ण मेसोनिक अधिकार क्षेत्र के साथ एक संप्रभु ग्रैंड लॉज के रूप में प्रतिष्ठित किया गया था। ग्रैंड लॉज ऑफ इंडिया भारतीय उपमहाद्वीप में सर्वोच्च मेसोनिक प्राधिकरण के रूप में कार्य करता है। यह फ्रीमेसनरी की प्राचीन परंपराओं को बनाए रखता है और यह सुनिश्चित करता है कि पीढ़ियों से चले आ रहे अनुष्ठानों, मूल्यों और सिद्धांतों का पालन हो। ग्रैंड लॉज ऑफ इंडिया के अतिरिक्त, पूरे देश में पश्चिमी, पूर्वी, दक्षिणी और उत्तरी भारत के क्षेत्रीय ग्रैंड लॉज हैं। ये क्षेत्रीय ग्रैंड लॉज अपने-अपने भौगोलिक क्षेत्रों में फ्रीमेसनरी की गतिविधियों की देखरेख करने वाले प्रशासनिक निकाय के रूप में कार्य करते हैं। प्रत्येक क्षेत्रीय ग्रैंड लॉज स्थानीय लॉजों के साथ निकट संबंध बनाए रखता है और क्षेत्रीय आवश्यकताओं के अनुरूप सामुदायिक सहभागिता तथा धर्मार्थ पहलों को सुगम बनाता है।

वर्तमान में हमारे पास 440 लॉज और 158 से अधिक होली रॉयल आर्च चैप्टर, 165 मार्क लॉज तथा 141 रॉयल आर्क मेरिनर्स लॉज अर्थात देश के विभिन्न भागों में स्थित मेसोनिक संस्थाएँ हैं, जिनकी कुल सदस्य संख्या लगभग 20,000 फ्रीमेसन है। विश्वभर के मेसोनिक संगठन अनेक परोपकारी और धर्मार्थ परियोजनाओं में संलग्न हैं। भारत में फ्रीमेसनरी के माध्यम से लोगों के जीवन को बेहतर बनाने के लिए समर्पित है। भ्रात प्रेम और राहत के सिद्धांतों को मूर्त करुणा और सामुदायिक सेवा की एक मिसाल के रूप में कार्य करती है और अपनी व्यापक धर्मार्थ पहलों रूप देते हुए, देशभर के फ्रीमेसन विभिन्न पर पकारी कार्यों में सक्रिय योगदान देते हैं, जिनसे समाज में ठोस और सकारात्मक अंतर आता है।

भारत में मेसोनिक फ्रेटरनिटी देशभर में अनेक धर्मार्थ परियोजनाओं में संलग्न है। दिल्ली में जनरल विलियम्स मेसोनिक पॉलीक्लिनिक और एक मेसोनिक पब्लिक स्कूल (इस वर्ष उनके X CBSE बोर्ड परीक्षा के परिणाम 100% रहे), साथ ही कोयंबटूर में बच्चों के लिए एक मेसोनिक चिकित्सा देखभाल केंद्र; विशाखापत्तनम जिले में पिछड़े क्षेत्र में स्थित एक पूरे गाँव को स्वास्थ्य, स्वच्छता, शिक्षा और आवास के क्षेत्र में सर्वांगीण विकास के लिए गोद लेना: आंध्र प्रदेश में चक्रवात पीड़ितों के लिए शेडों का निर्माणः गुजरात के भुज में कार्य; जरूरतमंद विद्यार्थियों को अनेक छात्रवृत्तियाँ और वजीफे प्रदान करना; दिव्यांगों और वृद्धों की देखभाल करने वाली संस्थाओं की सहायता करना; तथा समय-समय पर रक्तदान शिविर, नेत्र शिविर और अन्य स्वास्थ्य शिविर आयोजित करना- ये देशभर में मेसोनिक संगठनों की कुछ सामाजिक रूप से प्रासंगिक गतिविधियों के उदाहरण हैं।

रीजनल ग्रैंड लॉज ऑफ वेस्टर्न इंडिया ने पंचवटी वृद्धाश्रम के सहयोग से इस वृद्धाश्रम में तीन ब्लॉक (छह कमरे) का निर्माण कराया है; इस परियोजना की लागत लगभग ₹50 लाख थी।फ्रीमेसनरी को नीचे दिए गए कुछ विशिष्ट प्रश्नों के उत्तरों के माध्यम से सर्वोत्तम रूप से समझाया जा सकत है।

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