google.com, pub-3310156774694367, DIRECT, f08c47fec0942fa0
top of page
WhatsApp Image 2025-09-10 at 15.54_edite
ADN FILMS POSTER

BREAKING ADN NEWS

WhatsApp Image 2026-09-19 at 09.46.31.jpeg
WhatsApp Image 2026-09-08 at 12.10.10.jpeg
WhatsApp Image 2026-09-19 at 09.46.30 (2).jpeg
WhatsApp Image 2026-09-19 at 09.46.31 (1).jpeg
WhatsApp Image 2026-09-19 at 09.46.30 (1).jpeg

मातृ-रूपेण संस्थिता(Form of a Mother)...जब माँओं ने बचाई एक माँ की जान...

8 hours ago
4 min read
  • नवरात्रि में मातृशक्ति का जीवनरक्षक स्वरूप: अम्बेडकर अस्पताल की महिला चिकित्सकों ने बचाई माँ की जान |

  • बच्चेदानी और मूत्राशय फटने से गंभीर थी 32 वर्षीय महिला की हालत, पांच घंटे चली जटिल सर्जरी; 10 यूनिट रक्त चढ़ाने और दो दिन वेंटिलेटर पर रखने के बाद मिली जिंदगी |

पत्रकार अमृतेश्वर सिंह की कलम से :-

रायपुर :- नवरात्रि में हम माँ दुर्गा के नौ स्वरूपों की आराधना करते हैं और नारी शक्ति के सामर्थ्य को नमन करते हैं। इसी मातृशक्ति का एक प्रेरक स्वरूप पं. नेहरू चिकित्सा महाविद्यालय से संबद्ध अम्बेडकर अस्पताल, रायपुर में देखने को मिला, जहाँ महिला चिकित्सकों की टीम ने अपने चिकित्सकीय कौशल, साहस और समर्पण से एक माँ को नया जीवन दिया। वह भी तब, जब गंभीर प्रसूति जटिलता से जूझ रही 32 वर्षीय महिला की बच्चेदानी और मूत्राशय बुरी तरह फट गए थे। गर्भस्थ शिशु की मृत्यु हो चुकी थी और अत्यधिक रक्तस्राव के कारण महिला की जान पर बन आई थी।


ऐसे कठिन समय में स्त्री एवं प्रसूति रोग विभाग की टीम ने लगभग पांच घंटे तक जटिल सर्जरी की। मरीज को 10 यूनिट रक्त एवं रक्त घटक (Blood components) चढ़ाए गए। इसके बाद दो दिनों तक वेंटिलेटर पर गहन उपचार चला। आखिरकार चिकित्सकों के अथक प्रयास सफल हुए और महिला स्वस्थ होकर अपने परिवार के पास लौट गई। नवरात्रि में नारी शक्ति के साहस, समर्पण और सम्मान का इससे बेहतर उदाहरण क्या होगा कि एक ओर देवी स्वरूपा माँ की आराधना हो रही है, तो दूसरी ओर महिला चिकित्सकों ने अपने ज्ञान, कौशल और सेवा भाव से एक माँ का जीवन बचाने के लिए अथक प्रयास करते हुए उसे मौत के मुँह से वापस लेकर आने में सफलता प्राप्त(Snatched from the jaws of death) की।


आज की स्थिति में मरीज स्वस्थ्य होकर डिस्चार्ज लेकर अपने घर चली गई है। पं. नेहरू चिकित्सा महाविद्यालय के डीन डॉ. विवेक चौधरी ने इस मौके पर कहा कि नवरात्रि हमें शक्ति, साहस और करुणा का संदेश देती है। अम्बेडकर अस्पताल में एक माँ के जीवन को बचाने की यह घटना; शक्ति केवल आराधना में नहीं, सेवा में भी है, इसी भावना को जीवंत करती है। जहाँ महिला चिकित्सकों ने अपने ज्ञान और अनुभव से एक गंभीर मरीज की जान बचाने का हरसंभव प्रयास किया, वहीं विभिन्न विभागों की टीम ने एकजुट होकर चिकित्सा सेवा का उत्कृष्ट उदाहरण प्रस्तुत किया।


चिकित्सा अधीक्षक डॉ. संतोष सोनकर ने कहा कि प्रसूति एवं स्त्री रोग विभाग की टीम द्वारा अथक प्रयास करते हुए एक माँ को नया जीवन देना, मातृशक्ति के प्रति सच्चे सम्मान और सेवा भाव का प्रतीक है क्योंकि अस्पताल में उपचार हेतु आनेवाला प्रत्येक मरीज किसी के परिवार की आशा, उम्मीद और अपनों का पूरा सहारा होती है।


*सामान्य प्रसव की स्थिति से जानलेवा आपातकाल तक*

32 वर्षीय महिला अपनी चौथी गर्भावस्था में थी। गर्भावस्था की पूरी अवधि समाप्त होने के बाद उसे प्रसव पीड़ा शुरू हुई। परिजन उसे पहले प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र लेकर पहुँचे। वहाँ से सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र और फिर समीपस्थ मेडिकल कॉलेज रेफर किया गया, जहाँ उपचार प्रारंभ हुआ।


इसी दौरान प्रसव के प्रयास में महिला की बच्चेदानी और मूत्राशय बुरी तरह फट गए। गर्भस्थ शिशु की पेट के भीतर ही मृत्यु हो गई और महिला को भारी रक्तस्राव होने लगा। उसकी गंभीर स्थिति को देखते हुए उसे अम्बेडकर अस्पताल, रायपुर लाया गया। चिकित्सकों के सामने चुनौती बेहद कठिन थी, समय कम था, स्थिति गंभीर थी और महिला की जान बचाने के लिए तत्काल निर्णय लेना आवश्यक था।


*पांच घंटे की जटिल सर्जरी, 10 यूनिट रक्त एवं रक्त घटकों का आधान (Blood and Blood Component Transfusion)*

मरीज की नाजुक स्थिति को देखते हुए तत्काल उपचार शुरू किया गया और आपातकालीन सर्जरी की तैयारी की गई। स्त्री एवं प्रसूति रोग विभाग की विभागाध्यक्ष डॉ. ज्योति जायसवाल के नेतृत्व में डॉ. नीलम सिंह, डॉ. अर्पणा वर्मा और डॉ. नीति गोसाई की टीम ने जटिल सर्जरी को अंजाम दिया।


बच्चेदानी बुरी तरह क्षतिग्रस्त होने के कारण उसे निकालना पड़ा। वहीं, सर्जरी विभाग की डॉ. प्राची के सहयोग से क्षतिग्रस्त मूत्राशय की मरम्मत की गई। निश्चेतना विभाग से डॉ. अमृता की टीम ने भी मरीज की स्थिति को नियंत्रित रखने और सर्जरी के दौरान आवश्यक चिकित्सकीय सहयोग प्रदान करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।


लगभग पांच घंटे तक चली इस जटिल सर्जरी के दौरान मरीज को कुल 10 यूनिट रक्त एवं रक्त घटकों का आधान ( (Blood and Blood Component Transfusion) किया गया। विभिन्न विभागों के बीच समन्वय और चिकित्सकों के त्वरित निर्णय ने इस चुनौतीपूर्ण उपचार को सफल बनाने में अहम भूमिका निभाई।


*ऑपरेशन के बाद भी जारी रही जीवन बचाने की जंग*

सर्जरी के बाद मरीज की स्थिति गंभीर बनी हुई थी। उसे वेंटिलेटर सपोर्ट की आवश्यकता पड़ी और क्रिटिकल केयर यूनिट (CCU) में भर्ती किया गया। यहाँ डॉ. ओ. पी. सुंदरानी की टीम की देखरेख में दो दिनों तक वेंटिलेटर सपोर्ट के साथ गहन चिकित्सा प्रदान की गई।


स्त्री एवं प्रसूति रोग विभाग के साथ निश्चेतना, क्रिटिकल केयर, सर्जरी, ब्लड बैंक और नर्सिंग टीम ने लगातार समन्वय के साथ उपचार जारी रखा। निरंतर निगरानी और सामूहिक प्रयासों से मरीज की स्थिति में सुधार हुआ। अंततः वह खतरे से बाहर आई और स्वस्थ होकर अपने घर लौट गई।

Comments


© 2018 by Anis lala dani. Proudly created with breakingadnnews.com

  • Subscribe Channale
bottom of page
naver-site-verification: navere8d42c0359e3e135363406d5b6093c27.html