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पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने की पत्रकारों से चर्चा.....

Aug 23
4 min read
  • मोदी सरकार का मिनरल संशोधन अधिनियम 2026 छत्तीसगढ़ के हितो के खिलाफ है, प्रदेश को भारी राजस्व क्षति होगी...

  • स्कूलों के मरम्मत को लेकर जेन अल्फा सड़को पर...

  • सरकार बताये विजय शर्मा ने झूठ बोला था या लोकसभा ने गलत जानकारी दिया ?...

  • मोदी और शाह बिना टेलीप्रॉम्प्टर के पूरा वंदे मातरम गाकर बताएं...

पत्रकार अमृतेश्वर सिंह की क़लम से -

रायपुर, पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने पत्रकारों से चर्चा करते हुये कहा कि संसद के पावन सत्र के बिना चर्चा के दोनों सदनों के द्वारा एक बेहद महत्वपूर्ण खान एवं खनिज (विकास और विनियमन) संशोधन अधिनियम, 2026 जबरिया पारित कर दिया गया। यह कानून राज्यों के वित्तीय अधिकारों में कटौती है तथा देश के संघीय ढांचे (फेडरलिज्म) को कमजोर करता है। इस विधेयक के पारित हो जाने के बाद राज्य सरकारें अपने राज्यों से निकलने वाले खनिजो पर कोई भी उपकर (सेस) नहीं लगा सकती है। यह संशोधन सुप्रीम कोर्ट के 2024 के उस ऐतिहासिक फैसले के प्रभाव को निष्प्रभावी करने के लिए षडयंत्र पूर्वक लाया गया है, जिसमें राज्यों को खनिज अधिकारों पर कर लगाने का अधिकार दिया गया था।


छत्तीसगढ़ जैसे खनिज संपदा वाले क्षेत्रों के स्थानीय और आदिवासी समुदायों के अधिकारों तथा उनके हितों की रक्षा से जुड़े प्रावधानों को नजरअंदाज किया गया है। वर्ष 2024 में सुप्रीम कोर्ट की 9 जजों की बैंच ने फैसला दिया था कि संविधान की सातवीं अनुसूची के तहत भूमि राज्यों के अधिकार क्षेत्र में आता है। इस विधेयक ने सुप्रीम कोर्ट के उस फैसले को पलट दिया। अब केन्द्र टैक्स लेगा तथा राज्य के अधिकार सीमित हो गये है। यह कानून छत्तीसगढ़ जैसे राज्य जहां से कोयला आयरनओर, बाक्साईड टिन जिंक जैसे खनिज बड़ी मात्रा में निकलता है, के आर्थिक हितो के खिलाफ है। केरला, झारखंड, तेलंगाना, कर्नाटक जैसे राज्यो ने इस कानून के खिलाफ आवाज उठाई है। छत्तीसगढ़ सरकार क्यों मौन है? डबल इंजन की सरकार का यही फायदा है?


स्कूलों के मरम्मत को लेकर जेन अल्फा सड़को पर

पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कहा कि राज्य भर में बच्चे स्कूलों की जर्जर भवनों के खिलाफ आंदोलन कर रहे है। धमतरी के बारना में, धमधा में, रायगढ़, मोहला मानपुर, बलौदाबााजार, सक्ती, सारंगढ़, बिलाईगढ़ में जेन अल्फा स्कूलों की बिल्डिंग की मरम्मत के लिये सड़को पर उतर कर आंदोलन को बाध्य हुये। छत्तीसगढ़ में हमारी सरकार ने “मुख्यमंत्री स्कूल जतन योजना” के तहत प्रदेश के लगभग 30,000 स्कूलों में मरम्मत और निर्माण कार्यों के लिए 1,807.68 करोड़ की कुल राशि का प्रावधान और आवंटन किया था, जिसमें से 1,191 करोड़ रुपये खर्च किए गए थे। बाद में सरकार बदलने के बाद भाजपा की साय सरकार ने इस योजना को खत्म करके शेष आबंटन को ही निरस्त कर दिया। भवनों का रखरखाव नियमित प्रक्रिया है लेकिन साय सरकार की दुर्भावना के चलते स्कूलों की हालत जर्जर हो गई है, छतें टपक रही है, अनेको स्कूलों में शौचालय खराब हो चुके हैं, क्लास रूम बैठने लायक नहीं हैं, बच्चों की जान जोखिम में है। 10463 स्कूल बंद करने के बाद शेष स्कूलों की मरम्मत नही कर पा रहे।


सरकार बताये विजय शर्मा ने झूठ बोला था या लोकसभा ने गलत जानकारी दिया ?

पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कहा कि उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा ने 09 जून 2026 को मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर यह जानकारी दिया कि राज्य सरकार ने 18.5 लाख प्रधानमंत्री आवास पूर्ण कर लिया है। इसी संबंध में रायपुर के सांसद बृजमोहन अग्रवाल लोकसभा में मिली जानकारी का हवाला देकर 11 अगस्त 2026 को बयान जारी किये है कि राज्य में 9.81 लाख प्रधानमंत्री आवास पूरा हुआ है। लोकसभा में मिली जानकारी के अनुसार कुल 15.45 लाख आवास का लक्ष्य पिछले 5 साल में रखा गया था जिसमें 13.55 लाख आवास स्वीकृत हुए है। अब सरकार बताये झूठ कौन बोल रहा ? गृहमंत्री विजय शर्मा ने मुख्यमंत्री से झूठ बोला कि लोकसभा में उनके ही सांसद बृजमोहन अग्रवाल को जो जानकारी मिली है वह गलत है। लोकसभा में सांसद को मिली जानकारी और उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा के मुख्यमंत्री को लिखे पत्र के विरोधाभास के बारे में सरकार स्पष्टीकरण जारी करे।


मोदी और शाह बिना टेलीप्रॉम्प्टर के पूरा वंदे मातरम गाकर बताएं

पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने वंदे मातरम को लेकर भाजपाइयों द्वारा पैदा किए जा रहे भ्रम और विवाद पर कहा कि आजादी के आंदोलन के दौरान वंदे मातरम गाते हुए कांग्रेस के लोगों ने लाठियां और गोलियां खाई थीं, जबकि उस समय भाजपा के वैचारिक पूर्वज महासभा और आरएसएस के लोग इससे दूरी बनाकर रखते थे। 1896 में कांग्रेस के अधिवेशन जब पहली बार वंदे मातरम गाया गया तब भी केवल 2 ही पद गाये गए थे, शुरुआती दो छंदों में मातृभूमि की वंदना है, जिसे डेढ़ सौ साल से सभी भारतीय स्वीकार करके गायन करते रहे हैं। 1937 में महात्मा गांधी, जवाहरलाल नेहरू, रविंद्र नाथ टैगोर, सुभाष चंद्र बोस, सरदार वल्लभ भाई पटेल जैसे नेताओं ने जो प्रथम 2 अंतरा गाने का फैसला लिया था, वर्तमान सरकार उस पर सवाल उठा रही है ? भूपेश बघेल ने भाजपा नेताओं को चुनौती दी कि वे यह साबित करें कि उनके किसी पूर्वज नेताओं ने वंदे मातरम गाते हुए कभी लाठी या गोली खाई हो? 24 जनवरी 1950 को डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने स्पष्ट किया था कि ”वंदे मातरम“ के पहले दो पद राष्ट्रगीत के रूप में मान्य होंगे। तब तो इनके नेता श्यामा प्रसाद मुखर्जी को भी आपत्ति नहीं थी लेकिन अब ये राजनीतिकरण करना चाहते हैं, उसी क्रम में वंदे मातरम विवाद के रूप में एक नया षड्यंत्र रचा गया है। इतने वर्षों बाद अचानक पूरे छह अंतरे गाने का दबाव क्यों बनाया जा रहा है? प्रधानमंत्री मोदी और गृह मंत्री अमित शाह को चुनौती देते हैं कि बिना टेलीप्रॉम्प्टर के पूरा वंदे मातरम गाकर सुनाये।

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