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आयोग की ठोस मॉनिटरिंग और SJPU(पुलिस) की मेहनत से सकुशल लौटी बच्ची...

Jul 22
2 min read
  • 4 दिन की निगरानी के बाद बॉर्डर से मिली बिलासपुर की लापता बच्ची.....

पत्रकार अमृतेश्वर सिंह की कलम से -

छत्तीसगढ़ राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग की अध्यक्ष डॉ. वर्णिका शर्मा की त्वरित पहल और लगातार मॉनिटरिंग के बाद बिलासपुर जिले के सिरगिट्टी थाना क्षेत्र से लापता 12 वर्षीय बालिका को SJPU रश्मी कौर (पुलिस) ने सकुशल दस्तयाब कर परिजनों के सुपुर्द कर दिया है। मामले में बिलासपुर पुलिस द्वारा आयोग को विस्तृत प्रतिवेदन भी भेजा गया है। गौरतलब है कि 3 जुलाई की सुबह बालिका की मां ने आयोग की अध्यक्ष डॉ. वर्णिका शर्मा से दूरभाष पर संपर्क कर अपनी 12 वर्षीय पुत्री के 27 जून से लापता होने की जानकारी दी थी। उन्होंने आशंका जताई थी कि बच्ची किसी असुरक्षित स्थिति में हो सकती है। मामले की गंभीरता को देखते हुए डॉ. वर्णिका शर्मा ने तत्काल विशेष किशोर पुलिस इकाई (SJPU) की अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक रश्मिता कौर से चर्चा कर जांच में तेजी लाने के निर्देश दिए। इसके बाद डॉ. वर्णिका शर्मा स्वयं 5 जुलाई को बिलासपुर पहुंचीं और सिरगिट्टी थाना में बालिका के परिजनों से मुलाकात कर उन्हें भरोसा दिलाया था।

उन्होंने पुलिस अधीक्षक, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक एवं थाना प्रभारी के साथ विस्तृत समीक्षा बैठक कर जांच की प्रगति और आगे की रणनीति पर चर्चा की। आयोग की पहल के बाद पुलिस ने विशेष टीम गठित कर संभावित स्थानों पर तकनीकी एवं मैदानी जांच तेज की। पुलिस की सतत कार्रवाई के परिणामस्वरूप बालिका को 9 जुलाई को अंतरराष्ट्रीय बॉर्डर से सकुशल दस्तयाब किया गया। महिला पुलिस अधिकारियों की उपस्थिति में बालिका का कथन दर्ज किया गया, जिसमें उसने बताया कि उसके साथ किसी प्रकार की अप्रिय घटना नहीं हुई। आवश्यक कानूनी प्रक्रिया पूरी करने के बाद उसे सुरक्षित परिजनों के सुपुर्द कर दिया गया।


डॉ. वर्णिका शर्मा ने कहा कि प्रत्येक बच्चे की सुरक्षा राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग की सर्वोच्च प्राथमिकता है। आयोग इस पूरे मामले की लगातार निगरानी करता रहा है और अब भी बालिका के पुनर्वास, मनोसामाजिक परामर्श (काउंसलिंग), शिक्षा की निरंतरता तथा बाल संरक्षण से जुड़े सभी आवश्यक पहलुओं पर संबंधित विभागों के साथ समन्वय बनाकर कार्य करेगा, ताकि बच्ची सामान्य जीवन में सुरक्षित रूप से लौट सके। आयोग ने बिलासपुर पुलिस की त्वरित कार्रवाई की सराहना करता है और अभिभावकों से अपील करता है कि बच्चों के व्यवहार में अचानक बदलाव, घर से बिना बताए निकलना, अत्यधिक चिड़चिड़ापन या ध्यान की समस्या जैसे संकेतों को हल्के में न लें। कई बार ये ADHD या अन्य मानसिक एवं व्यवहारगत समस्याओं के संकेत भी हो सकते हैं। ऐसे में बच्चों को डांटने के बजाय उनसे संवाद करें और जरूरत पड़ने पर विशेषज्ञ की सलाह लें |

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