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छत्तीसगढ़ी कला एवं संस्कृति को समर्पित डॉ. आनंदसिंह चौहान को 'वर्ल्ड कल्चरल एंड एजुकेशनल ऑर्गेनाइजेशन' द्वारा मानद डॉक्टरेट उपाधि से सम्मानित....

Aug 22
2 min read

पत्रकार अमृतेश्वर सिंह की क़लम से -

रायपुर। छत्तीसगढ़ की समृद्ध लोक संस्कृति, कला और मनोरंजन जगत में अद्वितीय एवं ऐतिहासिक योगदान देने वाले प्रख्यात कलाकार व तकनीकी विशेषज्ञ डॉ. आनंदसिंह चौहान को उनकी बहुमूल्य सेवाओं के सम्मान में 'वर्ल्ड कल्चरल एंड एजुकेशनल ऑर्गेनाइजेशन' द्वारा मानद डॉक्टरेट (Honorary Doctorate) की उपाधि से अलंकृत किया गया है। यह प्रतिष्ठित उपाधि 20 अगस्त 2026 को प्रदान की गई।


छत्तीसगढ़ संस्कृति, मीडिया और तकनीकी क्रांति में डॉ. आनंदसिंह चौहान का ऐतिहासिक योगदान:

डॉ. चौहान का छत्तीसगढ़ी कला और संस्कृति के संवर्धन में एक लंबा, प्रेरणादायक और गौरवशाली सफर रहा है।

  • प्रमुख कंपनियों के साथ सहभागिता - डॉ. चौहान ने वर्ष 2004 से 2010 तक 'सुमन ऑडियो वीडियो' सहित 'वीडियो वर्ल्ड', 'SG कैसेट' और 'K.K. कैसेट' जैसी छत्तीसगढ़ की तमाम प्रतिष्ठित ऑडियो-वीडियो कंपनियों के साथ मुख्य सहयोगी के रूप में कार्य किया है।

  • टेक्निकल डायरेक्टर के रूप में अग्रणी भूमिका - छत्तीसगढ़ के पहले 24 घंटे चलने वाले मनोरंजन चैनल 'ग्रैंड यारा' (Grand Yara) की स्थापना में उन्होंने 'टेक्निकल डायरेक्टर' के रूप में अत्यंत महत्वपूर्ण और निर्णायक भूमिका निभाई है।

  • प्रथम डिजिटल प्रोडक्शन हाउस की स्थापना - छत्तीसगढ़ में एक क्रांतिकारी पहल करते हुए उन्होंने राज्य के पहले डिजिटल प्रोडक्शन हाउस की स्थापना की, जिसके लिए उन्हें छत्तीसगढ़ संस्कृति विभाग द्वारा 'कला रत्न पुरस्कार' से भी सम्मानित किया गया।

  • बहुआयामी दक्षता - उन्होंने 'चली आ मा बम्लेश्वरी', 'वरदान मा बम्लेश्वरी', 'गणेश के पापा', 'नाथु का दादा', 'झूमे दिया सारी बमलेशरी के मंदिर में' तथा 'माया के गांव माया के छांव' जैसे चर्चित प्रोजेक्ट्स में निर्देशन, अभिनय, कैमरा और संपादन (Editing) का कार्य अत्यंत उत्कृष्टता के साथ किया है।


इस मानद डॉक्टरेट उपाधि का प्राप्त होना डॉ. आनंदसिंह चौहान की कला-साधना के प्रति एक बड़ी मान्यता है, जो न केवल उनकी व्यक्तिगत उपलब्धि है, बल्कि छत्तीसगढ़ की लोक संस्कृति और मीडिया तकनीक के क्षेत्र में एक गौरवपूर्ण मील का पत्थर भी है। यह सम्मान केवल उनका नहीं, बल्कि पूरे छत्तीसगढ़ की कला-संस्कृति का है और पूरे प्रदेश के लिए गर्व का विषय है।

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