क्या भाजपा सिर्फ चुनावों में याद करती है पिछड़ा वर्ग को? दीपक बैज ने लगाए गंभीर आरोप....

पत्रकार अमृतेश्वर सिंह की क़लम से :-
रायपुर: छत्तीसगढ़ में अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) के अधिकारों और आरक्षण के मुद्दों को लेकर राजनीतिक सरगर्मी तेज हो गई है। कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष ने राज्य और केंद्र की सरकारों पर तीखा हमला बोलते हुए कहा है कि सत्ताधारी दल के लिए पिछड़ा वर्ग केवल एक सियासी वोट बैंक बनकर रह गया है।
हाल ही में जारी एक बयान में उन्होंने आरोप लगाया कि जब भी इस बहुसंख्यक समाज की सही गिनती या उनके हक की बात सामने आती है, तो जिम्मेदार लोग पीछे हट जाते हैं। उनका कहना है कि चुनावों के दौरान पिछड़ा वर्ग के नाम पर वोट बटोरे जाते हैं, लेकिन सरकार बनने के बाद वादों को भुला दिया जाता है।
प्रमुख बिंदु और चिंताएं:
आरक्षण के मोर्चे पर अड़चनें: कांग्रेस नेताओं का आरोप है कि छत्तीसगढ़ विधानसभा की ओर से पारित 27 प्रतिशत ओबीसी आरक्षण से जुड़ा विधेयक लंबे समय से लंबित है, जिससे राज्य के युवाओं के शिक्षा और रोजगार के अवसर प्रभावित हो रहे हैं।
जनगणना में स्पष्ट कॉलम की मांग: केंद्र सरकार की आगामी जनगणना प्रक्रिया को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं। मांग की गई है कि अनुसूचित जातियों और जनजातियों की तरह ही जनगणना के मुख्य फॉर्म में ओबीसी वर्ग की अलग और स्पष्ट गिनती के लिए एक निर्धारित विकल्प होना चाहिए।
पारदर्शिता का अभाव: नेताओं का तर्क है कि जब तक सटीक और पृथक आंकड़े सामने नहीं आएंगे, तब तक योजनाओं का वास्तविक बजट और आरक्षण का दायरा सही तरीके से तय नहीं किया जा सकता।
विपक्ष का यह भी कहना है कि इस वर्ग की आबादी राज्य में सबसे अधिक होने के बावजूद उनके संवैधानिक अधिकारों को लटकाकर रखा गया है, जिससे जनता में अब आक्रोश देखने को मिल रहा है।






.jpeg)
.jpeg)
.jpeg)
.jpg)




Comments