धनतेरस : इस दिन खरीदारी और यम दीप जलाने का क्या है महत्व, जानिए सही नियम...

ब्रेकिंग ADN न्यूज़ :-
नई दिल्ली: हर साल कार्तिक मास की त्रयोदशी तिथि पर धनतेरस का पावन पर्व धूमधाम से मनाया जाता है। इस बार त्रयोदशी तिथि का आरंभ शुक्रवार, 6 नवंबर को सुबह 10:31 बजे होगा और इसका समापन अगले दिन 7 नवंबर को सुबह 10:48 बजे पर होगा। इस प्रकार, इस वर्ष धनतेरस का त्योहार 6 नवंबर को मनाया जाएगा।
खरीदारी और पूजा के शुभ मुहूर्त -
पंचांग के अनुसार, इस दिन खरीदारी के लिए शुभ समय सुबह 10:30 बजे से शाम 5:30 बजे तक रहेगा। इसके पश्चात, संध्याकाल में पूजा के लिए श्रेष्ठ मुहूर्त शाम 6:18 बजे से रात 8:10 बजे तक निर्धारित है। धार्मिक परंपराओं के मुताबिक, इस विशेष अवसर पर आरोग्य के देवता भगवान धनवंतरि, धन के अधिपति कुबेर और माता लक्ष्मी की उपासना का विधान है।
क्यों की जाती है नई वस्तुओं की खरीदी ?
सनातन परंपरा में धनतेरस के दिन नई वस्तुएं घर लाने की प्राचीन परंपरा है। मान्यता है कि इस दिन विधि-विधान से पूजन करने और बर्तनों, आभूषणों या अन्य मांगलिक सामग्री की खरीदारी करने से घर में बरकत बनी रहती है और आर्थिक समृद्धि में इज़ाफा होता है।
पूजन और अनुष्ठान की विधि -
स्वच्छता और स्नान: पर्व के दिन प्रातःकाल सूर्योदय से पूर्व उठकर संपूर्ण आवास और पूजा घर की अच्छी तरह साफ-सफाई करनी चाहिए। स्नान के बाद स्वच्छ वस्त्र धारण कर भगवान कुबेर और धनवंतरि की प्रतिमा स्थापित की जाती है।
पारंपरिक खरीदारी: इस दिन मुख्य रूप से सोना, चांदी, पीतल के नए बर्तन और झाड़ू खरीदने का विशेष प्रचलन है। इसके अलावा, मिट्टी के नए दीये खरीदना अत्यंत मंगलकारी माना जाता है, जिन्हें जलाने से घर की नकारात्मक ऊर्जा समाप्त होती है और सकारात्मकता का संचार होता है।
यम दीपदान की परंपरा: धनतेरस की संध्या पर मुख्य द्वार या आंगन में 'यम दीप' प्रज्वलित करने का विधान है। यह विशेष दीपक मृत्यु के देवता यमराज को समर्पित होता है, जिसका मुख हमेशा दक्षिण दिशा की ओर रखा जाता है। ऐसी मान्यता है कि यम दीप जलाने से परिवार के सदस्यों पर से अकाल मृत्यु का संकट टल जाता है।






.jpeg)
.jpeg)
.jpeg)
.jpg)




Comments